इंदौर आरटीओ को हवा में उड़ने का शौक: जमीनी हकीकत से बेखबर
ऑफिस में कौन घूम रहा, कौन गुंडागर्दी कर रहा... साहब को कुछ पता ही नहीं! आरटीओ बोले- मुझे तीन साल हो गए, ऐसा कुछ नहीं दिख खुलासा फर्स्ट, इंदौर । शुक्रवार को न्यूज 24 के ब्यूरो चीफ हेमंत शर्मा और उनके स
Khulasa First
संवाददाता

ऑफिस में कौन घूम रहा, कौन गुंडागर्दी कर रहा... साहब को कुछ पता ही नहीं!
आरटीओ बोले- मुझे तीन साल हो गए, ऐसा कुछ नहीं दिख
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शुक्रवार को न्यूज 24 के ब्यूरो चीफ हेमंत शर्मा और उनके साथी कैमरामैन राजा खान पर की गई खुलेआम गुंडागर्दी इसका ताजा सबूत है। कैमरे में कैद पूरे घटनाक्रम में दलाल, नगर सैनिक और आरटीओ के पाले हुए बदमाश हाथापाई करते नजर आए, लेकिन पुलिस जैसे बंधी हुई हो…, जैसे सब पर अदृश्य पहरा लगा हो।
मुझे कुछ पता नहीं, बनाया ‘मशहूर बहाना...’ जब खुलासा फर्स्ट के संपादक अंकुर जायसवाल आरटीओ प्रदीप शर्मा से मिलने पहुंचे तो अधिकारी का रवैया ही बता गया कि साहब जमीन पर कम, हवा में ज्यादा रहते हैं। 17 नवंबर 2024 को 10 हजार फीट से उज्जैन में स्काय डाइविंग करने वाले प्रदीप शर्मा शायद उसी दिन से हवा में उड़ रहे हैं, क्योंकि ऑफिस की जमीन पर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी उन्हें जरा भी नहीं। पत्रकारों से बातचीत का लहजा भी ऐसा था जैसे भिड़ंत के लिए तैयार बैठे हों। चेहरे पर अहंकार, बातों में तीखापन और व्यवहार में सत्ता का नशा स्पष्ट दिख रहा था कि उन्हें अपने पद, अपनी पहुंच और अपने संरक्षणकर्ताओं पर पूरा घमंड है। शर्मा का यही रवैया बता रहा था कि आरटीओ जमीन पर नहीं, हवा में फैसले करते हैं। इंदौर का आरटीओ कार्यालय इन दिनों कार्यालय कम, सत्ता संरक्षित एजेंटों, दलालों और गुंडों का अड्डा अधिक दिखाई दे रहा है और साहब? या तो सच में अनजान हैं…या फिर अनजान बनने में ही फायदा है!
घरों से फरार सभी हमलावर
पत्रकार हेमंत शर्मा और कैमरामैन राजा खान पर हमला करने वाले मुख्य आरोपी बाबू अंकित चिंतामण, नरेंद्र चौहान, विनोद, गजेंद्र, नितिन, शंकर प्रजापत, पवन और अन्य बदमाश घरों से फरार हो गए हैं। तेजाजी नगर पुलिस ने उनके ठिकानों पर दबिश दी लेकिन कोई नहीं मिला। हालांकि पुलिस ने परिवार के लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
प्रदेश की आर्थिक राजधानी में जहां हर विभाग मुस्तैद रहने का दावा करता है, वहीं इंदौर आरटीओ कार्यालय में खुला तांडव मचा हुआ है। हालत यह है कि एक साधारण पुलिसकर्मी अपने पूरे थाना क्षेत्र की हर हरकत पर नजर रखता है, लेकिन इंदौर आरटीओ प्रदीप शर्मा को तीन साल से अपने ही ऑफिस में क्या हो रहा है, इसकी भनक तक नहीं है।
आरटीओ ऑफिस में बाबू अधिकारी बन बैठे हैं, एजेंट सिस्टम को चलाते हैं और असामाजिक तत्व खुलेआम घूमकर अवैध वसूली से लेकर दलाली तक सब संचालित करते हैं। यह पूरी फाइलों के पीछे चलने वाली काली साइकिल वर्षों से चल रही है, लेकिन रोकने वाले ही चंद सिक्कों की खनक पर अपनी जुबान बंद कर लेते हैं।
आरटीओ कहते रहे-हेमंत ने मुझे पर्सनल मैसेज किया… पर सच सामने आया तो अधिकारी की बोलती बंद!
जिस वक्त आरटीओ परिसर में पूरी घटना घटित हुई उसी समय आरटीओ प्रदीप शर्मा अपने कैबिन में आराम फरमा रहे थे, लेकिन किस बात की खुजली उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रही थी, यह आज तक साफ नहीं हो पाया। घटना के बाद जब दोपहर को कुछ पत्रकार साथी आरटीओ शर्मा से तथ्य जानने पहुंचे तो साहब का घमंडी अंदाज साफ बताता था कि वो बात करने नहीं, डराने की मुद्रा में हैं।
आरटीओ शर्मा बार-बार एक ही रट लगाए हुए थे-हेमंत शर्मा ने मुझे पर्सनल मैसेज किया था… मेरे पास उसके मैसेज आते थे…। उनका लहजा ऐसा था मानो किसी बड़े खुलासे की तैयारी कर रहे हों, लेकिन जब खुलासा फर्स्ट के संपादक अंकुर जायसवाल ने साफ-साफ कहा कि आप, दिखाइए वो मैसेज! तो प्रदीप शर्मा के पास दिखाने के नाम पर सिर्फ एक खबर की लिंक थी। जैसे ही पत्रकारों ने उसे देखा, पूरा माहौल ठहाकों से गूंज गया।
आरटीओ साहब, मैसेज और न्यूज लिंक में फर्क तो समझिए!
इसके बाद सभी मीडिया साथियों ने स्पष्ट कहा आरटीओ साहब, मैसेज और न्यूज लिंक में फर्क तो समझिए! मीडिया संस्थान ब्रॉडकास्ट सिस्टम से खबरें भेजते हैं, वो किसी को ‘पर्सनल मैसेज’ नहीं होते! यह सुनकर भी शर्मा का अहंकार कम नहीं हुआ, लेकिन इस सच ने एक बात साफ कर दी कि नोट गिनने की कला में निपूण अधिकारी को मोबाइल, तकनीक और मीडिया सिस्टम की बेसिक समझ तक नहीं है। समय के साथ चलना उनकी फितरत में नहीं दिख रहा और ऐसे में इंदौर जैसे तेज शहर में वह कितने दिन टिकेंगे यह देखने वाली बात है।
इंदौर कलेक्टर ने लिया संज्ञान, अब होगी बड़ी कार्रवाई?
घटना के बाद इंदौर के मीडियाकर्मियों ने कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर पूरी घटना क्रमवार बताई। कलेक्टर ने पूरी बात गंभीरता से सुनी और कई बिंदुओं को तुरंत संज्ञान में लिया। सबसे अहम मुद्दा यह निकला कि आरटीओ ऑफिस के आसपास कोई पुलिस चौकी नहीं है, जिसके कारण आए दिन दलालों व गुंडों की हरकतें बढ़ जाती हैं और पुलिस मौके पर पहुंचते-पहुंचते हालात बिगड़ जाते हैं।
कलेक्टर ने माना कि पुलिस कई बार लेट पहुंचती है, अक्सर मूकदर्शक बनी खड़ी रहती है और यह कोई नई बात नहीं, बल्कि इंदौर की पुरानी बीमारी है। कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही दलालों, गुंडों और आरटीओ परिसर में सक्रिय असामाजिक तत्वों पर ठोस कार्रवाई की जाएगी, लेकिन शहर की जनता और मीडिया दोनों जानते हैं कि जब तक पुलिस खुद काम करने का मन न बनाए, तब तक कोई सिस्टम उन्हें हिला नहीं सकता। इंदौर आरटीओ का यह पूरा प्रकरण यह साबित करता है कि जहां अफसर लापरवाह हों, वहां गुंडे ही सत्ता का असली स्वाद चखते हैं।
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