इंदौर के धृतराष्ट्र आरटीओ: आंखें खुलीं पर सच देखने से इंकार!
डीडी नंबर गिरोह एक्टिव, आरटीओ की छत्रछाया में चल रहा करोड़ों का गैरकानूनी रजिस्ट्रेशन रैकेट 75 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन हर महीने दमन-दीव से: मप्र सरकार को 67 करोड़ का सालाना नुकसान सरकार को चूना लगाने
Khulasa First
संवाददाता

डीडी नंबर गिरोह एक्टिव, आरटीओ की छत्रछाया में चल रहा करोड़ों का गैरकानूनी रजिस्ट्रेशन रैकेट
75 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन हर महीने दमन-दीव से: मप्र सरकार को 67 करोड़ का सालाना नुकसान सरकार को चूना लगाने का सबसे हाई-प्रोफाइल खेल!
खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
महाभारत का जिक्र आते ही धृतराष्ट्र का नाम दिमाग में घूम जाता है, वह राजा, जो सिंहासन पर बैठता था पर देखने से इंकार कर देता था। आज इस शहर में वही किरदार फिर जीवित हो चुका है, और नाम है, इंदौर आरटीओ प्रदीप शर्मा, जो आधुनिक धृतराष्ट्र बन बैठे हैं। फर्क बस इतना है धृतराष्ट्र जन्म से अंधे थे, लेकिन इंदौर का यह धृतराष्ट्र आंखें होते हुए भी अंधेपन का नाटक कर रहा है। गांधारी की तरह आंखों पर पट्टी बांध लेते तो भी लगता कभी तो सच दिखेगा, पर यहां तो मामला उलटा है। सब कुछ साफ दिखाई देने के बावजूद ऐसी अज्ञानता ओढ़ रखी है, मानो पूरा शहर बेवकूफ हो और सत्ता इनके चरणों में बिछी हो। खुलासा फर्स्ट आज इस धृतराष्ट्र की कृत्रिम अंधकारमयी दुनिया को चीरते हुए दिखा रहा है कैसे इनके इशारों पर चल रहा तंत्र सरकार को ही हर महीने करोड़ों का चूना लगा रहा है और यह महाखेल वर्षों से बिना किसी डर के फल-फूल रहा है।
पढ़िए आंकड़े, जो सब बयान कर देंगे
शहर में लक्ज़री गाड़ियों के चमकदार शोरूम ऐसे उग आए हैं जैसे सोते हुए शहर में किसी ने अचानक सोने की खान खोद दी हो। वॉल्वो, डिफेंडर, मर्सिडीज, जैग्वार, ऑडी—ये सिर्फ गाड़ियां नहीं, बल्कि करोड़ों का ‘टैक्स-चोरी साम्राज्य’ खड़ा करने वाले औजार हैं। लैंड रोवर (डिफेंडर) की कीमत इंदौर में ₹98 लाख से ₹2.42 करोड़ और परिवहन टैक्स करीब ₹15.68 लाख यानी 16% दर से। वॉल्वो एक्ससी 90 की कीमत ₹96.97 लाख और टैक्स ₹15.51 लाख। साफ है खेल छोटा नहीं, भारी-भरकम रकम का है। एक अनुमान के मुताबिक इन पांच लक्ज़री ब्रांड्स वॉल्वो, डिफेंडर, मर्सिडीज, जैग्वार, ऑडी के शोरूम हर महीने लगभग 75 गाड़ियां बेचते हैं पर असली कहानी शुरू होती है यहां से—इन 75 गाड़ियों से मप्र सरकार को मिलने वाला राजस्व कहां जाता है? और इसी सवाल का जवाब इस पूरे घोटाले की जड़ में है। मर्सिडीज, जैग्वार और ऑडी जैसे ब्रांड्स के केवल बेसिक मॉडल ही 50 लाख तक आते हैं। तीन शोरूम में महीनेभर में लगभग 30 कारें बेच दी जाती हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 15 करोड़ होती है। इनका टैक्स होना चाहिए करीब ₹2.40 करोड़। वॉल्वो और डिफेंडर के बेसिक मॉडल लगभग एक करोड़ के हैं और दो शोरूम कम से कम 20 गाड़ियां बेचते हैं। कुल 20 करोड़ की बिक्री और ₹3.20 करोड़ का टैक्स। दोनों जोड़ दें तो हर महीने सरकार को मिलना चाहिए ₹5 करोड़ 60 लाख से अधिक का राजस्व लेकिन दमन–दीव की सेटिंग से यह रकम गिरकर 1 करोड़ 5 लाख रह जाती है। नतीजा मप्र सरकार को साल भर में लगभग ₹67 करोड़ 20 लाख का सीधा-सीधा नुकसान। यह सामान्य भ्रष्टाचार नहीं, महीनों बल्कि सालों से चल रही सुनियोजित डकैती है। (गाड़ियों की कीमत अनुमानित है)
दमन–दीव से फर्जी रजिस्ट्रेशन का काला रैकेट
शहर के चमचमाते शोरूम के पीछे ऐसा घिनौना खेल जारी है, जिसकी भनक तक शासन को नहीं या फिर नज़रअंदाज़ करना उसकी आदत बन चुकी है। ग्राहक जैसे ही गाड़ी पसंद करता है, शोरूम में बैठा एजेंट ‘टैक्स बचत’ का लालच देकर इंदौर आरटीओ में रजिस्ट्रेशन से साफ मना कर देता है और दमन–दीव से रजिस्ट्रेशन का रास्ता दिखाता है। हैरानी की बात यह इंदौर आरटीओ के बाबू से लेकर बंद केबिन में ऐश कर रहे साहब तक इस धांधली से ‘अनजान’ हैं या अनजान बनने में ही इनके सारे हित छिपे हैं। ग्राहक के राजी होने पर शोरूम एजेंट सीधे दमन–दीव के अपने सेट एजेंट से संपर्क साधता है। वहां फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पते और फर्जी दस्तावेजों पर मिनटों में गाड़ी रजिस्टर्ड कराई जाती है। टैक्स जमा होते ही नंबर प्लेट बनकर आसानी से इंदौर आ जाती है। ग्राहक का 13% टैक्स बचता है, लेकिन मप्र सरकार को करोड़ों का नुकसान। साफ-सुथरे सरकारी राजस्व पर सीधा डाका। शहर की सड़कों पर दौड़ती सैकड़ों डीडी नंबर की गाड़ियां इस रैकेट की ताकत का सबूत हैं। दमन–दीव की रजिस्ट्रेशन लिस्ट खंगाली जाए तो सैकड़ों वाहन एक ही नाम और एक ही पते पर दर्ज मिलेंगे।
अब आते हैं असली ‘जादू’ पर
2019 में प्रदेश सरकार ने लक्ज़री गाड़ियों पर रोड टैक्स बढ़ाकर 16% कर दिया था। यानी 20 लाख से ऊपर की गाड़ी पर मालिक को टैक्स का देना होता है, पर इंदौर के शोरूम में बैठे ‘जादूगर’ और आरटीओ बाबू ऐसा गणित बना रहे हैं कि सरकार के हिस्से में धूल बचती है। यह खेल दमन–दीव के नाम पर चलता है। दमन में गाड़ी पर टैक्स सिर्फ 3%, और दीव में भी यही दर। दोनों जगह मिलकर यह टैक्स चोरी का ‘काला स्वर्ग’ बन गया है। इंदौर का एजेंट गाड़ी मालिक को सीधे दमन–दीव में रजिस्टर्ड करवाकर 13% राशि की बचत करवा देता है, और इसी के नाम पर चल रहा है करोड़ों का कारोबार। यह सरकार को ठगने की संगठित मशीनरी है, जिसके पहिये इंदौर आरटीओ की निगरानी में बेरोकटोक घूम रहे हैं।
जनता से लूट, फिर भी सरकार का खजाना रीता
तीन साल के कार्यकाल का ढोल पीटने वाले ये दिग्गज ऐसे बैठे हैं जैसे खेल की हर धड़कन से अनजान हों, जबकि सच्चाई यह है कि इनके ऑफिस में ही इस घोटाले की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई देती है। सरकार को करोड़ों का चूना लग रहा है, दमन–दीव की सेटिंग खुलेआम चल रही है पर धृतराष्ट्र की तरह हमारी प्रशासनिक आंखें सिर्फ सत्ता के सुख-चैन की ओर टिकी हैं। जनता लुट रही है, सरकार का खजाना सूख रहा है और इंदौर का यह धृतराष्ट्र सिंहासन पर बैठकर सिर्फ शांत मुद्रा में ‘अनजान बनने का महान अभिनय’ कर रहा है।
अगर आरटीओ चाहे तो पूरा रैकेट
एक दिन में ध्वस्त हो जाए
खेल की धुरी वही आरटीओ है, जो चाह लें तो एक झटके में फर्जी रजिस्ट्रेशन गैंग खत्म हो जाए। इतना कर दें कि सभी शोरूम से कुछ महीनों की पूरी गाड़ियों की लिस्ट की रजिस्ट्रेशन लोकेशन—इंदौर या दमन–दीव—का मिलान कर लें। इससे तुरंत दिख जाएगा कितनी गाड़ियां इंदौर में बिककर भी दमन–दीव में रजिस्ट्रर्ड कराई गईं, कौन से शोरूम सबसे ज्यादा शामिल हैं और किस लाइन से कितनी संदिग्ध एंट्रियां हुई हैं लेकिन असली झटका तब लगेगा जब इस डेटा की जांच आगे बढ़ेगी क्योंकि इसमें सबसे साफ़ दिखाई देगा आरटीओ के बाबूओं और अधिकारियों की मिलीभगत। ये वही लोग हैं जिनके सामने रोज हजारों फाइलें गुजरती हैं, जिनके सिस्टम पर चढ़ती हर गाड़ी का रिकॉर्ड साफ़ दिखाई देता है, फिर भी दमन–दीव वाली गाड़ियों पर इनकी आंखें बंद रहती हैं।
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