इंदौर जैसे टियर-2 ही देश का भविष्य: हाईराइज कंस्ट्रक्शन में एयरोडायनॉमिक डिज़ाइन जरूरी; रेजा काबुल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । तेजी से बढ़ती आबादी और घटती जमीन के बीच वर्टिकल डेवेलपमेंट ही भविष्य है। ऊंची इमारतों के डिज़ाइन में आग से बचाव और भूकंप के साथ-साथ हवा का असर सबसे अहम है। ऊंचाई पर हवा का दबाव कई
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
तेजी से बढ़ती आबादी और घटती जमीन के बीच वर्टिकल डेवेलपमेंट ही भविष्य है। ऊंची इमारतों के डिज़ाइन में आग से बचाव और भूकंप के साथ-साथ हवा का असर सबसे अहम है। ऊंचाई पर हवा का दबाव कई गुना होता है, ऐसे में एयरोडायनॉमिक शेप ही इमारत को लंबे समय मजबूती देता है। एयरोडायनामिक डिज़ाइन बेहद जरूरी है, जो हवा को रोकने के बजाय प्रवाहित होने देती है।
यह बात प्रख्यात आर्किटेक्ट रेज़ा काबुल ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीरियर डिज़ाइनर्स इंदौर रीजनल चैप्टर द्वारा आयोजित ज्ञानार्जन-20 में कही, जो इंदौर में ताज विवांता और नोवोटेल जैसे तकरीबन पांच लक्जरी होटल व अन्य प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
उज्जैन और महेश्वर में भी कई बड़े होटल प्रोजेक्ट पर काम कर मप्र के वर्टिकल डेवेलपमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रेज़ा कहते हैं मेट्रो शहरों में बढ़ती जनसंख्या के कारण इंदौर जैसे टियर-2 शहर ही देश का भविष्य है। कार्यक्रम के अंतर्गत वार्तालाप सत्र की मॉडरेटर आर्किटेक्ट सना कुरैशी रहीं।
ग्लोबल लेवल एक्सपोजर मिलता है
चेयरपर्सन विकास ठक्कर ने कहा इस तरह के सीनियर आर्किटेक्ट जब शहर के स्टूडेंट्स और वर्किंग प्रोफेशनल्स के साथ अपने अनुभव को साझा करने आते हैं तो हमें ग्लोबल लेवल एक्सपोज़र मिलता है। इससे न सिर्फ हमारी कम्युनिटी बल्कि शहर के विकास को भी नई दिशा मिलती है।
ज्ञानार्जन और वार्तालाप जैसी पहल के जरिए इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। वाइस चेयरपर्सन ट्रेड पवन तराडे ने बताया इस मौके पर नए साल का कैलेंडर लॉन्च किया गया, जिसमें संस्था से जुड़े आर्किटेक्ट्स के आर्ट वर्क को प्रेजेंट किया गया है।
लगातार सीखने से आते हैं नए आइडिया
रेज़ा काबुल ने बताया भारत सहित दुबई, अफ्रीका सहित दुनियाभर में उनके कई प्रोजेक्ट हैं, लेकिन सीखने की प्रक्रिया जारी रहती है। वैश्विक आर्किटेक्ट्स से नए विचार सीखकर उन्हें प्रोजेक्ट्स में लागू करते हैं।
उदाहरण दिया किस तरह पहले फ्लोर पर कांच के बेस वाले स्विमिंग पूल जैसी इनोवेटिव सोच को अमल में लाए, जिसमें नीचे के फ्लोर से स्विमिंग करते लोगों को देखा जा सकता है।
मेंटेनेंस के मुद्दे पर कहा विदेश में 100 साल से ज्यादा पुरानी इमारतें आज भी सुरक्षित हैं क्योंकि वहां रखरखाव पर लगातार ध्यान दिया जाता है। भारत में मेंटेनेंस की कमी के कारण संरचनाएं लंबे समय टिक नहीं पातीं।
आर्ट और क्रिएटिविटी के साथ जरुरी है धैर्य: रेजा ने स्टूडेंट्स से कहा आज के बच्चों में धैर्य की बहुत कमी है। सीखने के बजाए सीधे पैसे कमाना चाहते हैं जबकि लगन के साथ सीखते हैं और मेहनत करते हैं तो पैसा अपने आप चला आता है। मैंने अपनी जॉब सिर्फ 600 रुपए महीने में शुरू की थी।
पापा सवाल करते थे यह क्यों कर रहा हूं जबकि तब मेरे घर के ड्राइवर की सैलरी इससे ज्यादा थी पर आर्किटेक्टर मेरा पैशन हैं और तब भी मुझे पता था इसी तरह सीखते हुए ही सफलता पाई जा सकती हैं। आभार नूपुर नामजोशी ने माना।
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