डेली कॉलेज, इंदौर में शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय शैक्षिक कार्यशाला सम्पन्न: जिज्ञासा ही सार्थक सीख की बुनियाद
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । डेली कॉलेज इंदौर में 20 से 22 दिसंबर तक शिक्षकों और शैक्षिक नेतृत्व के लिए तीन दिवसीय शैक्षिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें देश के जाने-माने शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया।
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
डेली कॉलेज इंदौर में 20 से 22 दिसंबर तक शिक्षकों और शैक्षिक नेतृत्व के लिए तीन दिवसीय शैक्षिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें देश के जाने-माने शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य था शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक, संवेदनशील और जीवन से जुड़ा बनाया जाए। सनबीम ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की निदेशक अमृता बर्मन ने ‘कौशल-आधारित शिक्षा और कक्षा में उसका सजीव प्रयोग’ विषय पर कहा कि शिक्षा अब केवल पाठ्य सामग्री पढ़ाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने समझाया कि विषय आधारित शिक्षण से आगे बढ़कर कौशल आधारित शिक्षा की ओर बढ़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि कक्षा में ऐसी वर्कशीट तैयार की जानी चाहिए जिनमें ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण तीनों का समन्वय हो। वास्तविक समय के आंकड़ों की मदद से शिक्षक बच्चों की जरूरत के अनुसार अपनी पढ़ाने की शैली बदल सकते हैं और ऐसी कक्षाएं बना सकते हैं जहां बच्चे सोचकर, प्रयोग करके, महसूस करके और कुछ नया रचकर अपनी सीख को व्यक्त करें।
जिज्ञासा केवल सवाल पूछने तक सीमित नहीं
शिव नादर फाउंडेशन के सलाहकार कर्नल गोपाल करुणाकरण ने ‘कक्षा में जिज्ञासा: सीख को रोचक बनाने की कुंजी’ विषय पर कहा कि जिज्ञासा ही सार्थक सीख की बुनियाद है। उन्होंने बताया कि जिज्ञासा केवल सवाल पूछने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में जानने और समझने की इच्छा जगाना है। यदि शिक्षक रोजमर्रा की पढ़ाई में छोटे-छोटे प्रयोग, आत्मचिंतन और संवाद को शामिल करें, तो कक्षा अपने-आप जीवंत हो जाती है।
‘स्किल फॉर अस’ के चीफ लर्निंग ऑफिसर फैज खान ने सामाजिक, भावनात्मक अधिगम महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, जोखिम उठाने की क्षमता और स्वयं निर्णय लेने की आदत, बच्चों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती है। बेंगलुरु स्थित तापस प्रोग्रेसिव स्कूल की संस्थापक प्रीति विक्रम ने ‘क्यों से आगे : जिज्ञासु सोच विकसित करना’ विषय पर अपनी राय रखते हुए कहा कि बच्चों में प्रश्न पूछने की आदत तभी विकसित होती है, जब शिक्षक स्वयं जिज्ञासु होते हैं। उन्होंने समझाया कि प्रश्न पूछना कोई तकनीक नहीं, बल्कि सोचने की एक आदत है।
समूह गान और समूह नृत्य की प्रस्तुति दी... यूनिवर्सल ग्रुप ऑफ स्कूल्स के क्षेत्रीय निदेशक कर्नल ए. शेखर ने ‘विद्यार्थी-विद्यालय संबंध : आज की चुनौतियां और आगे का रास्ता’ विषय पर बदलते डिजिटल और सामाजिक परिवेश में विद्यार्थी, अभिभावक और विद्यालय के रिश्तों पर विचार रखे। उन्होंने बताया कि भावनात्मक और सांस्कृतिक बदलावों के कारण विद्यालयों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों द्वारा एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर समूह गान और समूह नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। मंच पर लगभग 50 प्रतिभागियों और सभागार में 200 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं को एक साथ थिरकते देखना अपने आप में एक अविस्मरणीय अनुभव था। अंत में डेली कॉलेज की प्राचार्या डॉ. गुनमीत बिंद्रा और स्कू-न्यूज़ के संस्थापक रवि संतलानी ने इस आयोजन की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों को बधाई दी तथा मास्टर ट्रेनरों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षा को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
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