सहकारिता विभाग में मनमानी; ट्रांसफर के बावजूद बिलौदिया समेत कई इंदौर में ही जमे
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । सहकारिता विभाग वैसे ही हाऊसिंग सोसायटियों में गड़बड़ियों को लेकर बदनाम है और अब अधिकारियों के ट्रांसफर के बावजूद इंदौर में ही जमे होने को लेकर फिर चर्चा में आ गया है। सहायक आयुक्त
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सहकारिता विभाग वैसे ही हाऊसिंग सोसायटियों में गड़बड़ियों को लेकर बदनाम है और अब अधिकारियों के ट्रांसफर के बावजूद इंदौर में ही जमे होने को लेकर फिर चर्चा में आ गया है। सहायक आयुक्त अजयपाल सिंह बिलौदिया का ट्रांसफर श्योपुर हो चुका है, लेकिन वो बीमारी का बहाना बनाकर इंदौर में ही डटे हुए हैं। उनके अलावा, कई अन्य अधिकारी भी अन्य जगह पदस्थ कर दिए गए हैं लेकिन इंदौर छोड़ ही नहीं रहे।
बिलौदिया को शासन ने 17 जून श्योपुर भेज दिया था, लेकिन वो बीमारी का बहाना बनाकर नहीं गए। ट्रांसफर रुकवाने के लिए अधिकारियों से लेकर नेताओं तक चक्कर काटते रहे। कोर्ट पहुंच गए लेकिन फिर भी राहत नहीं मिली लेकिन इन सबके बावजूद इंदौर से जाने को तैयार नहीं हैं। आश्चर्य की बात तो ये है कि 17 जून को ट्रांसफर होने के बाद 14 अक्टूबर को उन्हें जेआर बीआर मकवाना ने रिलीव किया, लेकिन इसके बावजूद वो यहीं पर रहकर काम कर रहे हैं।
आदेश पारित कर रहे हैं बिलौदिया
सूत्रों का कहना है कि इंदौर में बिलौदिया जेआर बीआर मकवाना के खास हैं और वो उन्हें बचा रहे हैं। स्थिति ये है कि बिलौदिया ऑफिस में बैठकर न केवल काम कर रहे हैं, बल्कि आदेश भी पास कर रहे हैं। अभी हाल ही में डीआर मनोज जायसवाल की समीक्षा बैठक में पता चला कि बिलोदिया ने पुरानी तारीखों में चार गृह निर्माण संस्थाओं के ऑडिट नोट पास किए हैं। इतना ही नहीं 4 दिसंबर को बिलोदिया श्रमिक सहकारी बैंक में काम करते देखे गए।
जड़े-गुप्ता भी इंदौर में ही जमे
सूत्रों ने बताया कि जेआर बीआर मकवाना ने तिलहन संघ खरगोन से आए ऑडिटर भूषण जड़े को महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक में परिसमापक नियुक्त कर दिया है, जबकि उनकी पदस्थापना खरगोन में है। इतना ही नहीं अवंतिका सूत मिल सनावद, जिला खरगोन के प्रबंधक बनाए गए गुप्ता भी यहीं इंदौर के जेआर ऑफिस में काम कर रहे हैं।
अमित शाह की सख्ती का असर नहीं
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विभाग की व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने ट्रांसफर को लेकर सख्ती भी दिखाई है। वे साफ कह चुके हैं कि जिनका ट्रांसफर हो गया है, वे वहीं जाएं लेकिन इंदौर में बिलौदिया पर इसका असर नहीं है। श्योपुर में जून से कोई अधिकारी नहीं है।
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