खबर
टॉप न्यूज

इंदौर पुलिस में ‘पॉकेट गवाह’ सिंडिकेट का विस्फोटक खुलासा: यह सिर्फ दो गवाहों की कहानी या गहरे नेटवर्क का संकेत?

1250 गंभीर अपराधों को दो गवाहों से निपटाने का खेल— तत्कालीन खजराना थाना प्रभारी का फर्जी नेटवर्क जांच के शिकंजे में खुलासा फर्स्ट, इंदौर । पुलिस के कुछ थाना प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर अब तक का सबसे

Khulasa First

संवाददाता

11 दिसंबर 2025, 11:48 पूर्वाह्न
2 views
शेयर करें:
इंदौर पुलिस में ‘पॉकेट गवाह’ सिंडिकेट का विस्फोटक खुलासा

1250 गंभीर अपराधों को दो गवाहों से निपटाने का खेल— तत्कालीन खजराना थाना प्रभारी का फर्जी नेटवर्क जांच के शिकंजे में

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
पुलिस के कुछ थाना प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज सवाल खड़ा हो गया है। सूत्रों और विभागीय दस्तावेज़ों के अनुसार वर्षों से संचालित एक गुप्त और खतरनाक ‘गवाह खेल’ खुलासा होने की कगार पर है। आरोप है हत्या, लूट, दुष्कर्म, एनडीपीएस जैसे अति गंभीर अपराधों में भी तैयारशुदा, पॉकेट और संदिग्ध गवाहों के सहारे 1250 से अधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए गए। वह भी सिर्फ दो ही गवाहों के माध्यम से। जब पूरा खेल अधिकारियों की नज़रों में आया, तब तक इंदौर पुलिस की फाइलों में कई मामले ‘निपटा’ दिए गए थे और कई आरोपी ऐसे फर्जी गवाहों के बयान पर वर्षों तक जेलों में सड़े।

खजराना थाना के तत्कालीन टीआई दिनेश वर्मा के कार्यकाल में खेल चरम पर था। आरोप है वर्मा ने अपने पूरे कार्यकाल में नवीन चौहान और इरशाद नामक दो व्यक्तियों को ‘पॉकेट गवाह’ की तरह इस्तेमाल किया और सैकड़ों गंभीर अपराधों में दोनों के हवाले से बयान दर्ज करवाकर प्रकरण तैयार किए। इतना ही नहीं, विभागीय सूत्र बताते हैं 333 दुष्कर्म प्रकरणों, कई एनडीपीएस मामलों और अन्य संवेदनशील घटनाओं में भी यही दोनों गवाह सामने आए। पैटर्न के कारण जांच में स्पष्ट दिखा कि गंभीर अपराधों को निपटाने के लिए इन्हीं दो नामों पर पूरा सिस्टम टिका रहा।

कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए, तत्कालीन थाना प्रभारी ने मानो ‘गवाह फैक्ट्री’ बनाकर अपने कार्यकाल में मुकदमों का अंबार लगा दिया। खेल वर्षों चलने की बात सामने आ रही है।

चंदन नगर टीआई को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
कुछ ही दिन पहले चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को भी ऐसे ही संदिग्ध गवाहों के उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार पड़ी थी। इसके बावजूद, हैरान करने वाला तथ्य यह है इंद्रमणि पटेल आज भी अपनी कुर्सी पर जस की तस जमे हैं और विभागीय कार्रवाई का कहीं कोई ठोस परिणाम ज़मीन पर दिखाई नहीं देता।

पुलिस सिस्टम पर गहरा दाग
इस मामले ने पुलिस की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था की रीढ़ को कठघरे में खड़ा कर दिया है। 1250 गंभीर अपराधों को दो गवाहों से निपटाने का दावा सिर्फ एक थाने की बदहाली नहीं दिखाता। सिस्टम के गहरे, सड़े हुए नेटवर्क की ओर इशारा करता है। जांच आगे बढ़ने पर यह खेल कहीं इंदौर पुलिस के बड़े हिस्से को नंगा न कर दे, यह आशंका अब वास्तविकता बन रही है।

कमिश्नर ने बैठाई विभागीय जांच, डीसीपी को जिम्मेदारी
टीआई दिनेश वर्मा को नोटिस: पूरे कालखंड की जवाबदेही तय की जाएगी जैसे ही प्रकरण उच्च स्तर तक पहुंचा, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने तुरंत विभागीय जांच का आदेश जारी किया। कमान डीसीपी जोन-1 कृष्ण लालचंदानी को सौंपी।

दिनेश वर्मा को नोटिस देकर पूछा गया है 2022-23 के बीच इतने गंभीर मामलों में केवल दो गवाहों पर ही निर्भर क्यों रहे? विभाग इस पूरे घटनाक्रम की परतें उधेड़ने में जुट चुका है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और कई खुलासे हो सकते हैं।

दोनों 774 और 504 केस के गवाह
265 गंभीर मामलों में साथ, जांच रिपोर्ट ने बुनियाद हिला दी पुलिस तंत्र की जैसे ही पुलिस विभाग ने इन प्रकरणों की ‘चटनी’ बनाकर छानबीन शुरू की, रिकॉर्ड देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए।रिपोर्ट में सामने आया आंकड़ा आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए शर्मनाक है

इरशाद पुत्र अब्दुल हमीद का नाम- 774 मामलों में

नवीन चौहान पुत्र रामचंद्र- 504 प्रकरणों में

इनमें से 265 मामलों में दोनों एक साथ गवाह

सवाल है क्या ये दोनों कहीं भी, कभी भी, हर अपराध के मौके पर जादुई तरीके से मौजूद रहते थे? या यह पूरा तंत्र किसी संगठित गठजोड़ था? आंकड़े साबित करते हैं मामला मात्र गड़बड़ी नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक, योजनाबद्ध और खतरनाक ‘गवाह सिंडिकेट’ की ओर इशारा करता है जो इंसाफ की जड़ें खोद रहा था।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!