किस शहर में मृतक की अर्थी रखकर पुल पर प्रदर्शन: परिवार पर क्यों टूटा दुखों का पहाड़
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से जुड़ा मामला अब सड़क पर आ गया है। बद्रीप्रसाद लिदौरिया की मौत के बाद आक्रोशित रहवासियों ने भागीरथपुरा पुल पर मृतक की अर्थी रखकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
दूषित पानी से ही हुए थे बीमार
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दूषित पानी पीने से बद्रीप्रसाद गंभीर रूप से बीमार हुए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार में एक के बाद एक मौतों से हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब छोटे-छोटे बच्चों के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
एमवाय अस्पताल में 10 दिन भर्ती रहे
मृतक बद्रीप्रसाद के भांजे ने बताया कि बद्रीप्रसाद दूषित पानी पीने के बाद बीमार हुए थे। पहले उन्हें एम.वाय. अस्पताल में करीब 10 दिनों तक भर्ती रखा गया।
घर लौटने के बाद अचानक तबीयत फिर बिगड़ी
कुछ समय घर लौटने के बाद अचानक तबीयत फिर बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें भागीरथपुरा अस्पताल ले जाया गया, जहां से श्री अरबिंदो अस्पताल रेफर कर दिया गया।
अरिबंदो अस्पताल में हुई मौत
17 जनवरी 2026 से वे श्री अरबिंदो अस्पताल में भर्ती थे, जहां इलाज के दौरान 23 जनवरी 2026 को दोपहर 12:56 बजे उनकी मौत हो गई।
परिवार पहले से ही त्रासदी में घिरा
परिजनों के अनुसार बद्रीप्रसाद की बहू पहले से पैरालाइज थी, जिनकी दो महीने पहले ही मौत हो चुकी है। बहू की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया था। बद्रीप्रसाद ही मजदूरी कर बेटे, बहू और पोते-पोती का पालन-पोषण कर रहे थे।
बेटा भी पीड़ित
मृतक का बेटा भी फेफड़ों में पानी भरने की बीमारी से पीड़ित है, जिसके कारण वह नियमित काम नहीं कर पाता। अब बद्रीप्रसाद की मौत के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं बचा, और छोटे बच्चों पोते पोती का भविष्य अधर में लटक गया है।
अस्पताल प्रमाण पत्र में सेप्सिस से मौत का उल्लेख
श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र के अनुसार मृतक बद्रीप्रसाद, निवासी भानगढ़/भागीरथपुरा, की मौत का तत्काल कारण कार्डियोजेनिक शॉक (सेप्सिस) बताया गया है।
यह बात भी लिखी
प्रमाण पत्र में वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन, श्वसन विफलता, गंभीर सेप्सिस और मल्टी ऑर्गन फेल्योर का भी उल्लेख है। साथ ही मृतक की किडनी की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित थी, जिसमें ईजीएफआर मात्र 25 प्रतिशत दर्ज की गई।
पहले से मौजूद बीमारियों ने बढ़ाई जटिलता
अस्पताल के अनुसार बद्रीप्रसाद पहले से सीओपीडी (फेफड़ों की पुरानी बीमारी) और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से भी ग्रसित थे, जिससे उनकी स्थिति और अधिक जटिल हो गई। मृत्यु प्रमाण पत्र पर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अनूप के हस्ताक्षर एवं सील अंकित है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे रहवासियों ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से दूषित जल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पेयजल व्यवस्था सुधारी जाती, तो एक गरीब परिवार को यह दिन नहीं देखना पड़ता।
स्वास्थ्य विभाग का बचाव
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र निवासी बद्रीप्रसाद की मृत्यु जलजनित बीमारी से नहीं, बल्कि उनकी पुरानी और गंभीर बीमारियों के कारण हुई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी के अनुसार, बद्रीप्रसाद को सांस लेने में तकलीफ के चलते अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मधुमेह और रक्तचाप से भी थे पीड़ित
वे पहले से ही पुरानी टीबी, एंजियोप्लास्टी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर उनकी मृत्यु का सीधा संबंध किसी भी जलजनित बीमारी से नहीं पाया गया है।
वहीं, शासन स्तर पर उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए परिजनों को सहायता देने संबंधी प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
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