पर्यटक यान की आड़ में स्लीपर कोच बसों का अवैध संचालन
Khulasa First
संवाददाता

मोटर व्हीकल एक्ट में ‘स्लीपर कोच’ का प्रावधान नहीं फिर भी हो रहा हजारों बसों का रजिस्ट्रेशन और बीमा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पर्यटक यान की आड़ लेकर प्रदेश में स्लीपर कोच बसों का अवैध परिवहन बड़े पैमाने पर जारी है। अखिल भारतीय पर्यटन परमिट के नाम पर चल रही ये बसें न तो केंद्रीय और न ही राज्य परिवहन अधिनियम में तकनीकी रूप से परिभाषित हैं। उल्लेखनीय है स्लीपर कोच के निर्माण को लेकर किसी भी कानून में निर्देश नहीं हैं, फिर भी देशभर में असंवैधानिक रूप से ऐसी बसों का न केवल निर्माण हो रहा, बल्कि बिना रोक-टोक ये सड़कों पर दौड़ भी रही हैं।
परिवहन विशेषज्ञों का सवाल है कि जब मोटर व्हीकल एक्ट में स्लीपर कोच का कोई प्रावधान ही नहीं, तो बॉडी निर्माता कंपनियां किस आधार पर इनका निर्माण कर रही हैं? परिवहन विभाग ऐसे वाहनों को रजिस्ट्रेशन कैसे जारी कर रहा है और उन्हें परमिट कैसे दिया जा रहा है? सबसे बड़ी विसंगति यह कि बीमा कंपनियां भी इनका इंश्योरेंस कर रही हैं।
पूर्व सरकार ने 24 अप्रैल 2001 को संकल्प क्रमांक 166 जारी कर डीलक्स बसों की सीट क्षमता में 10% कमी करके बर्थ लगाने की अनुमति जैसा रास्ता खोल दिया। इसी के बाद देशभर में स्लीपर बसों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई।
हालांकि महालेखाकार की आपत्ति के बाद परिवहन विभाग ने 31 अक्टूबर 2009 को यह संकल्प निरस्त कर दिया, जिससे स्लीपर बर्थ तकनीकी रूप से अवैधानिक हो गए। इसके बावजूद बड़ी संख्या में बसें बिना कार्रवाई के लगातार संचालित होती रहीं।
नियम विपरीत हो रहा संचालन
केंद्रीय मोटरयान अधिनियम 1989 के नियम 128 में पर्यटक यान की बैठक क्षमता और अनुकूलन का प्रावधान है, लेकिन स्लीपर कोच का उल्लेख केंद्रीय या मध्य प्रदेश मोटरयान नियमों में कहीं भी नहीं मिलता। विभाग के अधिकारी 18 अप्रैल 2023 की केंद्रीय अधिसूचना का हवाला देकर स्लीपर बसों को वैध ठहराने का प्रयास करते हैं।
यह अधिसूचना ‘अखिल भारतीय पर्यटन यान (परमिट) नियम 2023’ से संबंधित है, जो 1 मई 2023 से लागू हुई। इसमें पर्यटक यान की परिभाषा दी गई है, परंतु ‘स्लीपर’ या ‘शयनयान’ के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं बनाया गया।
विशेषज्ञ की राय: ‘पर्यटन यान में शयनयान शामिल नहीं’
अधिवक्ता एवं परिवहन विशेषज्ञ सूरज प्रकाश अग्रवाल (नर्मदापुरम) ने बताया पर्यटन यान में शयनयान (स्लीपर) को शामिल नहीं किया गया है। मोटर यान अधिनियम और केंद्रीय मोटरयान नियमों में कहीं भी शयनयान का प्रावधान नहीं है। यदि शयनयान को मान्यता प्राप्त होती, तो इसे परिभाषित किया जाता और पंजीयन व उपयुक्तता प्रमाण-पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख होता।
पूरे मामले पर परिवहन विभाग सचिव मनीष सिंह से चर्चा करने के लिए फोन लगाया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं एसएमएस के माध्यम से भी विषय की जानकारी देकर जवाब मांग, परन्तु खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया गया।
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