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पाटनीपुरा के भैरव बाबा मंदिर पर अवैध कब्जा: बड़ा विवाद, मृत व्यक्ति के नाम से खुलवा रखा था खाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । पाटनीपुरा स्थित भैरव बाबा मंदिर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 150 वर्ष पुराने इस मंदिर पर एक परिवार ने कब्जा जमा रखा है, जबकि ये शासकीय भूमि पर स्थित है। इस पर कब्जाधारी परिवा

Khulasa First

संवाददाता

29 दिसंबर 2025, 8:46 पूर्वाह्न
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पाटनीपुरा के भैरव बाबा मंदिर पर अवैध कब्जा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
पाटनीपुरा स्थित भैरव बाबा मंदिर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 150 वर्ष पुराने इस मंदिर पर एक परिवार ने कब्जा जमा रखा है, जबकि ये शासकीय भूमि पर स्थित है। इस पर कब्जाधारी परिवार ने संपत्तिकर का खाता भी खुलवा रखा था। बाद में मामले का खुलासा होने के बाद इसे बंद कर दिया गया।

रहवासी सुरेश बैरागी, माताप्रसाद प्रजापति, ओमप्रकाश यादव और करण ठाकुर ने बताया कि पाटनीपुरा से मालवा मील चौराहा जाने वाले मार्ग पर स्थित इस प्राचीन मंदिर का राजस्व रिकार्ड में भी सन 1925 मिसल बंदोबस्त में दर्ज है। ये भूमि मंदिर की भूमि न होकर शासकीय भूमि रही है जो कई बार नजूल से हाऊसिंग बोर्ड तक आपस में हस्तांतरित होती रही है।

बोर्ड ने गत 20 अप्रैल 2024 को अपने आदेश में इस भूमि को शासन को समर्पित कर दिया जो आज भी शासकीय भूमि है। उन्होंने बताया कि कुछ वक्त पूर्व मंदिर की भूमि पर कन्नूलाल यादव के वारिसों ने जिनमें गोवर्धन, सागर, मुकेश, दिनेश यादव आदि शामिल हैं, ने स्व. कन्नूलाल यादव के नाम से फर्जी संपत्तिकर का खाता खुलवाया जबकि भूमि के मालिकाना हक से संबंधित कोई भी कागज उनके पास नहीं है।

उक्त भूमि मंदिर की होकर शासकीय रिकार्ड में भी शासकीय है जिस पर संपत्तिकर का खाता नहीं खुलवाया जा सकता। इस फजीर्वाड़े को लेकर भैरव बाबा मंदिर समिति ने वर्ष 2023 में तत्कालीन निगमायुक्त को सप्रमाण शिकायत की जिसकी जांच के दौरान निगम ने हाऊसिंग बोर्ड को पत्र लिखकर पूछा था कि मंदिर की जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट करें।

इस पर अधिकारियों ने भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट दी कि उक्त भूमि शासकीय है जिस पर भैरवबाबा मंदिर स्थापित है। इसके बाद निगम ने कन्नूलाल यादव के संपत्तिकर खाते को बंद कर दिया। उन्होंने बताया क मुकेश और सागर यादव ने निगम को भ्रमित करने के उद्देंश्य से दीवानी मुकदमा पेश किया जो कि भूखंड क्र. 196 का है जिसके बारे में वो बताते हैं कि ये मंदिर के पक्ष में है जबकि हकीकत दूसरी है।

उन्होंने बताया कि उक्त निर्णय मंदिर की भूमि का न होकर किसी अन्य संपत्ति का है। निगम यादव परिवार का ये तर्क खारिज कर चुका है। उन्होंने बताया कि इस शासकीय भूमि पर बनी दुकानों का किराया सागर यादव ले रहा है, जो कि गैरकानूनी है। पूर्व मे उसके खिलाफ एमआईजी पुलिस की जांच जारी है। अब मंदिर समिति और रहवासी जनसुनवाई में जाकर शिकायत करेंगे और यादव परिवार पर एफआईआर दर्ज करने की मांग करेंगे।

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