सेटबैक प्लॉट पर अवैध निर्माण कोर्ट स्टे के बावजूद काम जारी: कानून आम जनता के लिए ही
KHULASA FIRST
संवाददाता

एमआर-4 परियोजना में बाधा, एमआईसी मेंबर पर नियम ताक पर रखने के आरोप
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के स्पष्ट स्टे आदेश के बावजूद इंदौर में सेटबैक प्लॉट पर जारी निर्माण कार्य ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कानून और नियम केवल आम नागरिकों के लिए ही बने हैं? शहर की अग्रविहार कॉलोनी में एक वर्तमान एमआईसी मेंबर द्वारा किए जा रहे कथित अवैध निर्माण को लेकर न सिर्फ नगर निगम की कार्यप्रणाली, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले में डब्ल्यूपी नंबर 12254/2025 (दिनेश गोयल व अन्य बनाम इंदौर नगर निगम व अन्य) की सुनवाई 02 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, इंदौर में न्यायमूर्ति के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से विनय गांधी, जबकि प्रतिवादी क्रमांक 1 व 2 की ओर से सीनियर एडवोकेट विशाल बाहेती के साथ लकी जैन तथा प्रतिवादी क्रमांक 4 की ओर से यश नागिया उपस्थित रहे। सुनवाई के दौरान विवादित संपत्ति पर प्लास्टर व रंग करने की अनुमति मांगी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि 15 अप्रैल 2025 के अंतरिम आदेश से निर्माण पर पूर्ण रोक है।
हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति किसी भी प्रकार के नए निर्माण के लिए नहीं, बल्कि केवल पूर्व से बने ढांचे पर प्लास्टर और रंग तक सीमित है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस अनुमति की आड़ में किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकेगा और यह आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की गई है और तब तक इंटरिम रिलीफ जारी रहेगा।
भवन अनुज्ञा निरस्त, फिर भी निर्माण जारी
हाई कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम आयुक्त और बिल्डिंग ऑफिसर को 30 दिनों में सुनवाई करनी थी, लेकिन समयसीमा का पालन नहीं हुआ। बाद में अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्रवाई के दबाव में भवन अनुज्ञा निरस्त की गई। इसके बावजूद मौके पर निर्माण कार्य नहीं रुका, जिस पर कोर्ट को स्टे आदेश जारी करना पड़ा।
कॉलोनाइजर से एमआईसी मेंबर तक का सफर
यह कॉलोनी कॉलोनाइजर चंद्रकांत पोपट और धीरेंद्र भाई पोपट द्वारा विकसित की गई थी। संबंधित प्लॉट पहले रामलाल यादव (तत्कालीन निगम कर्मचारी महासंघ अध्यक्ष) के नाम रहा, बाद में दिनेश डागा (पूर्व सांसद प्रतिनिधि) को बेचा गया और अंततः यह प्लॉट गीता, पति नंदकिशोर पहाड़ियां वर्तमान एमआईसी मेंबर के स्वामित्व में आया, जिनके द्वारा निर्माण कराया जा रहा है।
2011 से शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं
मामला अग्रविहार कॉलोनी का है, जहां 28 मई 2011 से लगातार शिकायतें की जा रही हैं। यह प्लॉट भविष्य में प्रस्तावित एमआर-4 रोड के लिए छोड़ा गया सेटबैक क्षेत्र बताया जा रहा है। इसके बावजूद यहां भवन निर्माण कराया गया, जो नियमों के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
दस्तावेज क्या कहते हैं
उपलब्ध रिकॉर्ड और पंचनामा के अनुसार:
खसरा क्रमांक 234 पर शासकीय सड़क के मध्य बिंदु से 22.50 मीटर सेटबैक छोड़ा जाना अनिवार्य
रेलवे बाउंड्री सड़क के मध्य से 10.67 मीटर पर स्थित
सर्वे 233 की स्वामित्व दस्तावेज न रेलवे ने दिए, न निगम ने
वर्ष 1958-59 के राजस्व रिकॉर्ड में भूमि नगर निगम इंदौर के नाम दर्ज
पास के शेखर पार्क, सिमरन पार्क जैसे बहुमंजिला भवनों में भी 45 मीटर प्रस्तावित सड़क के अनुसार सेटबैक छोड़ा गया
इन तथ्यों के आधार पर अपर आयुक्त ने ले-आउट संशोधन का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा।
राजनीतिक रसूख या प्रशासनिक मिलीभगत?
उक्त कॉलोनी में जनसंघ के प्रथम प्रदेश अध्यक्ष और एक पूर्व महापौर का निवास भी बताया जाता है। वर्षों से शिकायतें होने और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना, राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका को और मजबूत करता है।
हरी जाली में छुपकर काम सिस्टम पर सवाल
आज भी विवादित स्थल पर हरी जाली (नेट) लगाकर काम जारी रहने के आरोप हैं। यह न सिर्फ न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि नगर निगम और प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
मामला विचाराधीन है
नगर निगम जोन क्रमांक 9 के भवन अधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है 02 दिसंबर 2025 को आदेश जारी किया गया था, जिसका पालन कराया जाएगा।
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