नामांतरण, बटांकन, सीमांकन व अमल के सैकड़ों प्रकरण लंबित: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाए आरोप
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । प्रदेश में अचल संपत्ति पंजीयन और राजस्व से जुड़े मामलों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है नामांतरण, बटांकन, सीमांकन और अमल के हजारों प्रकरण लं...
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश में अचल संपत्ति पंजीयन और राजस्व से जुड़े मामलों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है नामांतरण, बटांकन, सीमांकन और अमल के हजारों प्रकरण लंबित होने के कारण रजिस्ट्री का काम ठप है, जिससे राज्य सरकार के राजस्व संग्रहण पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने आरोप लगाया भाजपा सरकार ही राजस्व संग्रहण में सबसे बड़ी बाधा है। अचल संपत्ति की बढ़ी हुई गाइडलाइन के कारण रजिस्ट्री में भारी गिरावट आई है। पूरे प्रदेश में अधिकांश जिले तय लक्ष्य से बहुत पीछे हैं। पंजीयन विभाग की स्थिति यह है इंदौर जैसे बड़े जिले में भी विभाग लक्ष्य से काफी दूर है।
समस्याओं की समीक्षा नहीं
द्विवेदी ने कहा 2026-27 की नई गाइडलाइन की कवायद प्रारम्भ की जा रही है पर न कलेक्टर, न विभागीय अधिकारियों, न ही राजस्व, वाणिज्य मंत्री, मुख्यमंत्री न जिला प्रभारी मंत्रियों ने इस बात की समीक्षा की कि आखिर सौदे होने के बाद भी रजिस्ट्री क्यों नहीं हो पा रही ?
इंदौर जिले की आय का उदाहरण
उन्होंने बताया छत्तीसगढ़ की कुल पंजीयन आय के बराबर इंदौर जिले की पंजीयन आय है। प्रदेश की कुल आय का लगभग 30 प्रतिशत अकेले इंदौर जिले से आता है। यहां अनाप-शनाप गाइडलाइन बढ़ाने के बावजूद पिछले साल की तुलना में राजस्व कुछ करोड़ अधिक ही मिला।
द्विवेदी ने मांग की मप्र सरकार मामले की गंभीर समीक्षा करे और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करे। तंज कसा इवेंट मैनेजमेंट और विज्ञापन वाली सरकार धरातल पर उतरने को तैयार नहीं है और बाजार से उधार लेकर ही खुश नजर आ रही है।
आर्थिक स्थिति बदतर
प्रदेश प्रवक्ता ने आरोप लगाया प्रदेश सरकार की आर्थिक स्थिति बदतर हो गई है। अप्रैल में गाइडलाइन बढ़ने के डर से लोग सौदों को अमल में लाकर रजिस्ट्री कराना चाहते हैं लेकिन खरीदार तभी पैसा देता है जब रेवेन्यू रिकॉर्ड, नगर निगम और नगर पालिका में नाम दर्ज हो। उपपंजीयक नामांतरण मांगते हैं और लोन के लिए भी नामांतरण अनिवार्य है।
शहरों में भी वही स्थिति
द्विवेदी ने बताया नगर निगम संपत्तिकर विभाग, नगर पालिका, नगर पंचायत में भी यही हालात हैं। नाम दर्ज न होने से संपत्ति कर, लोन और अन्य प्रक्रिया प्रभावित हो रही हैं। अधिकारियों द्वारा वोटर लिस्ट पुनः निरीक्षण एवं सुधार कार्य में ड्यूटी लगे होने को बहाना बताया जा रहा है।
हड़ताल और एसआईआर से रुका काम
उन्होंने कहा पहले नायब तहसीलदार और तहसीलदारों की हड़ताल के कारण काम पूरी तरह रुका रहा। अब एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर फिर से कार्य प्रभावित है।
मुख्यमंत्री से सवाल, इंदौर में बैठक क्यों नहीं
द्विवेदी ने सवाल उठाया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभारी मंत्री होने के नाते इंदौर में बैठक क्यों नहीं की। घटते राजस्व के कारणों की जानकारी चाहते अधिकारियों से क्यों नहीं ली गई।
96 प्रतिशत नामांतरण आवेदन खारिज, लाखों प्रकरण पेंडिंग
उन्होंने कहा नामांतरण आवेदन ऑनलाइन होने के बाद भी 96 प्रतिशत आवेदन खारिज हो रहे हैं, लाखों नामांतरण प्रकरण पेंडिंग हैं। नामांतरण के बाद अमल क्यों नहीं हो रहा, बंटांकन और सीमांकन क्यों नहीं किए जा रहे। नामांतरण नहीं होने से रेवेन्यू रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं हो पा रहा है, जिससे विक्रेता रजिस्ट्री नहीं करवा पा रहे हैं।
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