खबर
Top News

कितने महीने में थोक महंगाई कहां तक पहुंची: कौन सी वस्तुएं हो गई महंगी

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 फ़रवरी 2026, 8:15 पूर्वाह्न
208 views
शेयर करें:
कितने महीने में थोक महंगाई कहां तक पहुंची

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
जनवरी में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 1.81% हो गई है। दिसंबर में यह 0.83% पर थी। यह 10 महीनों में सबसे उच्च स्तर है। इससे पहले मार्च 2025 में थोक महंगाई 2.05% थी। वाणिज्य मंत्रालय ने 16 फरवरी को जनवरी के थोक महंगाई आंकड़े जारी किए।

रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुएं और खाने-पीने की चीजों में महंगाई तेज हुई है। प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई 0.21% से बढ़कर 2.21% हो गई है। फूड इंडेक्स की दर माइनस 0.43% से बढ़कर 1.55% रही। वहीं ईंधन और पावर की थोक महंगाई दर माइनस 2.31% से घटकर माइनस 4.01% हो गई। मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई 1.82% से बढ़कर 2.86% हो गई।

थोक महंगाई तीन मुख्य हिस्सों में बंटी है। प्राइमरी आर्टिकल्स का वेटेज 22.62% है, इसमें अनाज, गेहूं, सब्जियां, ऑयल सीड, मिनरल्स और क्रूड पेट्रोलियम शामिल हैं। फ्यूल और पावर का वेटेज 13.15% है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है।

खुदरा महंगाई (CPI) भी जनवरी में बढ़कर 2.75% पर पहुंच गई, जबकि दिसंबर में यह 1.33% थी। यह आठ महीनों में सबसे अधिक है। पिछले साल मई में खुदरा महंगाई 2.82% थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि थोक महंगाई लंबे समय तक बढ़ने से उत्पादक क्षेत्रों पर दबाव बढ़ता है। अगर WPI लगातार उच्च रहे तो निर्माता लागत उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए इसे नियंत्रित कर सकती है। उदाहरण के लिए, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी घटाई गई थी।

महंगाई को मापने के लिए दो प्रमुख इंडेक्स होते हैं। खुदरा महंगाई (CPI) आम ग्राहकों के नजरिए से तय होती है, जबकि थोक महंगाई (WPI) उन कीमतों को दर्शाती है जो कारोबारी एक-दूसरे से वसूलते हैं। थोक महंगाई में मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल्स 22.62% और फ्यूल-पावर 13.15% होती है। वहीं रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट्स का वेटेज 45.86%, हाउसिंग 10.07% और ईंधन सहित अन्य आइटम शामिल हैं।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!