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मेट्रो के ट्रैक पर गरीब के आशियाने: विकास की चमक या आंसुओं का सैलाब; कीमत चुका रहे 16 गरीब परिवार, रहवासियों के बीच दहशत का माहौल

KHULASA FIRST

संवाददाता

20 जनवरी 2026, 1:12 अपराह्न
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मेट्रो के ट्रैक पर गरीब के आशियाने

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्वच्छता में सिरमौर इंदौर अब मेट्रो के सफर के लिए तैयार हो रहा है, लेकिन बड़ा गणपति क्षेत्र के पीलियाखाल में इस विकास की कीमत 16 गरीब परिवार अपने आशियाने और आजीविका से चुका रहे हैं।

जेल भेजने की चेतावनी वाले नोटिस
मल्हारगंज तहसीलदार द्वारा जारी किए गए जेल भेजने की चेतावनी वाले नोटिसों ने इन रहवासियों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

पट्टों पर अपना घरौंदा खड़ा किया था
यह वही लोग हैं जिन्होंने दशकों पहले राजीव गांधी योजना के तहत मिले पट्टों पर अपना घरौंदा खड़ा किया था, लेकिन आज मेट्रो स्टेशन की राह में यही घर अचानक प्रशासन की फाइलों में अतिक्रमण और अवैध बन गए हैं।

1 करोड़ 29 लाख रुपये का बजट
प्रशासनिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि इन परिवारों के लिए 1 करोड़ 29 लाख रुपये का बजट नगर निगम को दिया जा चुका है और ताप्ती परिसर में फ्लैट आवंटित हैं।

रहवासियों का आरोप
धरातल पर सच्चाई इसके उलट है। रहवासियों का आरोप है कि उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है। पार्षद मनोज मिश्रा के आश्वासनों की चादर अब छोटी पड़ने लगी है, क्योंकि 23 जनवरी की समय सीमा के साथ आए 'जेल वाले नोटिस' ने उनकी रातों की नींद छीन ली है।

तंग गलियों में रहने वाली ये महिलाएं
पीलियाखाल की तंग गलियों में रहने वाली ये महिलाएं आसपास के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन धोकर अपने परिवार का पेट पालती हैं। उनके लिए घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का केंद्र भी हैं।

जमीन की कीमत बाजार में करोड़ों
रहवासियों का तर्क वाजिब है जिस जमीन की कीमत बाजार में करोड़ों में है, उसके बदले शहर से दूर 7 लाख रुपये का फ्लैट थमाना उनके साथ क्रूर मजाक है। वे मांग कर रहे हैं कि यदि उन्हें हटाया ही जाना है, तो गाइडलाइन के अनुसार उचित मुआवजा या उसी मूल्य का विस्थापन सुनिश्चित किया जाए।

जबरन बेदखल किया गया तो जान दे देंगे
संवेदनाएं तब तार-तार हो गईं जब रहवासी किरण यादव ने सिसकते हुए यहाँ तक कह दिया कि यदि उन्हें जबरन बेदखल किया गया, तो वे परिवार सहित जान दे देंगी।

यह केवल एक धमकी नहीं, बल्कि उस लाचारी की पराकाष्ठा है जहाँ एक नागरिक अपने ही प्रशासन से डरने लगा है।

बर्बादी और चीखों की बुनियाद पर मेट्रो
सवाल यह उठता है कि क्या इंदौर की मेट्रो का गौरव इन 16 परिवारों की बर्बादी और चीखों की बुनियाद पर खड़ा होगा?

पट्टों की क्या अहमियत रह गई
विकास की इस दौड़ में उन पट्टों की क्या अहमियत रह गई है जिन्हें कभी सरकार ने ही सुरक्षा की गारंटी के तौर पर सौंपा था? प्रशासन की यह 'जेल भेजने वाली' कार्यप्रणाली लोकतंत्र की मूल भावना पर भी गहरा प्रहार करती है।

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