भविष्य के घर: आधुनिक आर्किटेक्चर और वास्तु का अनोखा संगम
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जैसे-जैसे हम आधुनिक दौर में प्रवेश कर रहे हैं, शहरी जीवन की भागदौड़ और कांक्रीट के जंगलों के बीच 'मानसिक शांति' और 'सकारात्मक ऊर्जा' की खोज तेज हो गई है।
हाल ही के रियल एस्टेट रुझानों और आर्किटेक्चरल सर्वे से यह स्पष्ट हुआ है कि अब घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि 'वेलनेस हब' बनते जा रहे हैं, जहाँ प्राचीन वास्तुशास्त्र और आधुनिक सस्टेनेबल डिजाइन एक साथ हाथ मिला रहे हैं।
बढ़ रही है वास्तु की प्रासंगिकता
नेट-जीरो और वास्तु का मेल
आधुनिक 'ग्रीन बिल्डिंग' अवधारणा काफी हद तक वास्तु के सिद्धांतों से मेल खाती है। वास्तु में उत्तर और पूर्व दिशा में खिड़कियों पर जोर दिया जाता है, जो न केवल सकारात्मक ऊर्जा लाती हैं, बल्कि प्राकृतिक रोशनी को अधिकतम कर बिजली की खपत को 20-30% तक कम कर देती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और स्थानिक ऊर्जा
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि घर की बनावट का हमारे तनाव स्तर पर सीधा प्रभाव पड़ता है। वास्तु के अनुसार 'ब्रह्मस्थान' (घर का मध्य भाग) को खुला और खाली रखने से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है, जिसे आज के 'ओपन फ्लोर प्लान' में प्रमुखता दी जा रही है।
डिजिटल डिटॉक्स ज़ोन
2026 के नए वास्तु ट्रेंड्स में 'ईशान कोण' को ध्यान और अध्यात्म के साथ-साथ 'डिजिटल फ्री जोन' के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि घर के भीतर एक गैजेट-मुक्त कोना सुरक्षित रहे।
बाजार की मांग
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में 78% से अधिक खरीदार उन्हीं संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो वास्तु के अनुकूल हों। डेवलपर्स अब अपनी परियोजनाओं के शुरुआती ब्लूप्रिंट में ही वास्तु विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं ताकि भविष्य के घरों में स्वास्थ्य, समृद्धि और तकनीक का संतुलन बना रहे।
वास्तु के जानकारों का कहना है कि वास्तु केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के पांच तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के साथ तालमेल बिठाने का एक विज्ञान है।
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