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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से’ दिल को अधिक खतरा’: ठंड के मौसम में दिल की सेहत का रखें विशेष ध्यान

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । ठंड का मौसम शुरू होते ही तापमान तेजी से गिरने लगता है, जिसका सीधा असर हार्ट पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में पहले से हार्ट के मरीजों, बुजुर्गों, डायबिटिक पेशंेट्स और हाई बीपी वाले लो

Khulasa First

संवाददाता

05 दिसंबर 2025, 11:49 पूर्वाह्न
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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से’ दिल को अधिक खतरा’

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
ठंड का मौसम शुरू होते ही तापमान तेजी से गिरने लगता है, जिसका सीधा असर हार्ट पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में पहले से हार्ट के मरीजों, बुजुर्गों, डायबिटिक पेशंेट्स और हाई बीपी वाले लोगों में हार्ट अटैक का खतरा अधिक हो जाता है, इसलिए ठंड के मौसम में दिल की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

तापमान गिरने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ठंड के मौसम में हार्ट से जुड़े छोटे-छोटे लक्षण भी दिखें तो उन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सबसे आम लक्षण है छाती में दर्द या भारीपन, जो बाएं हाथ, कंधे या पीठ तक फैल सकता है। इसके अलावा सांस फूलना, हल्का चक्कर आना, अत्यधिक थकान और पसीना आना भी खतरे के संकेत हैं।

इसलिए सर्दियों में आता है हार्ट अटैक
कुछ लोगों में जबड़े या गर्दन में दर्द भी दिखाई देता है। ठंड में कई बार लोग इन लक्षणों को गैस, कमजोरी या सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है अगर चलने, सीढ़ियां चढ़ने या ठंडे मौसम में बाहर जाते समय छाती में दर्द बढ़ता महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर पहचान और इलाज से हार्ट अटैक के गंभीर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सर्दी का सीजन शुरू हो चुका है और सर्दी के मौसम में हार्ट के मरीजों के लिए ठंड काफी नुकसानदायक साबित होती है। यही कारण है कि सर्दियों में हार्ट अटैक के आंकड़े बढ़ जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है सर्दियों में ही हार्ट अटैक के मरीज क्यों बढ़ते हैं और इसे रोका भी जा सकता है या नहीं। सबसे पहली बात आती है हार्ट अटैक क्यों होता है?

डॉ राजन बताते हैं कि सर्दियों में ठंड के कारण शरीर में बहने वाला रक्त गाढ़ा हो जाता है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से रक्त शरीर में अच्छे से फ्लो नहीं हो पाता, जिसके कारण हार्ट को पंप करने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है, जिस कारण से हार्ट अटैक हो जाता है, इसलिए, बड़े बुजुर्गों के लिए सर्दी खतरनाक बताई जाती है. सुबह शाम की ठंड से उनको दूर रहना चाहिए यहां तक की मॉर्निंग वॉक पर भी जाने से बचें।

ठंड में हार्ट अटैक के मामले बढ़ने के 4 बड़े कारण
खून की नसों का सिकुड़ना : डॉ. राजीव जैन बताते हैं कि ठंड के कारण हमारी नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। यह हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालता है और हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।

ब्लड का गाढ़ा होना : ठंड में शरीर का तापमान कम होने पर ब्लड थोड़ा गाढ़ा हो जाता है, ऐसे में ब्लड क्लॉट बनने की संभावना बढ़ती है, जो हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकता है।

ऑक्सीजन की कमी : ठंड में हार्ट शरीर को गर्म रखने के लिए ज्यादा मेहनत करता है, जिससे हार्ट की ऑक्सीजन मांग बढ़ जाती है और कमजोर हार्ट वाले लोगों में खतरा अधिक हो जाता है।

अचानक मेहनत या एक्सरसाइज : ठंड में बिना वॉर्म-अप के भारी काम या व्यायाम करना दिल पर अचानक दबाव बढ़ा देता है, जिससे हार्ट की धड़कन अनियमित हो सकती है और अटैक की स्थिति बन सकती है।

व्यायाम की कमी
सर्दियों में, लोग अक्सर व्यायाम करने से बचते हैं, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। सर्दी शुरू होते ही शरीर में आलस आना लगता है कि जो काफी खतरनाक है। इस आलस में लोग सैर करना, मॉर्निंग वॉक करना या फिर एक्सरसाइज करना छोड़ देते हैं। खून का फ्लो ठीक नहीं होता जो हार्ट अटैक का कारण बन जाता है।

सर्दियों में हार्ट अटैक से बचने के उपाय
डॉक्टर राजन ने सर्दियों में हार्ट अटैक से बचने के उपाय बताए हैं। उनके अनुसार अगर आप निम्नलिखित बातों का ध्यान रखते हैं तो आसानी से जाड़े का आनंद ले सकते हैं और ह्रदय आघात या स्ट्रोक से अपनी सुरक्षा कर सकते हैं:
नियमित व्यायाम : नियमित रूप से टहलें, लेकिन अत्यधिक ठंड में बाहर न जाएं। ऐसी स्थिति में घर के अंदर ही टहलें।

समय पर दवा : अपनी दवाइयां समय पर लें।

स्वास्थ्य मापदंडों की निगरानी : अपने सभी स्वास्थ्य मापदंडों (पैरामीटर्स) को नियंत्रण में रखें।

ब्लड प्रेशर और शुगर का नियंत्रण : अपने रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखें।

सर्दियों में ह्रदय की देखभाल के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करना आवश्यक है। डॉ. राजन के अनुसार जाड़े का मौसम ह्रदय रोगियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन उचित सावधानी और देखभाल के साथ, इस सुहावने मौसम का सुरक्षित रूप से आनंद लिया जा सकता है।

अस्वस्थ आहार लेना भी एक वजह
सर्दियों में लोग अक्सर अधिक वसायुक्त और उच्च कैलोरी वाले आहार का सेवन करते हैं, जिससे उनके हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं सर्दियों में, लोग अक्सर अधिक तनाव और चिंता का अनुभव करते हैं, जिससे उनके हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

सुबह हार्ट अटैक ज्यादा क्यों होते हैं?
अगर आपने कभी सोचा हो कि आखिर 5–10 बजे सुबह के बीच हार्ट अटैक के केस क्यों अचानक बढ़ जाते हैं तो इसका जवाब हमारे शरीर के बायोलॉजिकल घड़ी के अंदर छिपा है। कई बड़े अध्ययनों, जैसे सर्कुलेशन, जरनल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने यह दिखाया है कि सुबह का समय दिल के लिए सबसे संवेदनशील होता है। कार्डियोलॉजी के वैश्विक और भारतीय दोनों डेटा को मिलाकर देखें तो जवाब बहुत स्पष्ट है कि आखिर सुबह के समय हार्ट अटैक अधिक होने का कारण क्या है...

कार्टिसोल और एर्डनालाइन अचानक बढ़ जाते हैं
जैसे ही सुबह जागने का समय आता है, शरीर में कार्टिसोल 30–50% तक बढ़ जाता है। साथ ही एर्डनालाइन भी स्पाइक करता है। ये दोनों हार्मोन दिल की धड़कन तेज करते हैं। ब्लड प्रेशर अचानक ऊपर ले जाते हैं और रक्त की नलियों पर दबाव बढ़ाते हैं। इस अचानक हुए बदलाव से दिल पर स्ट्रेन अचानक बढ़ जाता है और जोखिम बढ़ता है कि किसी भी ब्लॉक्ड आर्टरी में क्लॉट फट जाए और अटैक हो जाए।

ब्लड प्लेटलेट्स सुबह सबसे ज्यादा चिपचिपे होते हैं
सिर्फ हार्मोन ही नहीं बल्कि सुबह प्लेटलेट एग्रीगेशन सबसे ज़्यादा होता है। जेएसीसी 2018 के अनुसार सुबह प्लेटलेट्स की चिपचिपाहट 30% तक बढ़ जाती है। इससे ब्लड क्लॉट बनने का रिस्क बहुत बढ़ जाता है अगर आर्टरी पहले से संकरी हो, बस थोड़ी सी चिपचिपाहट भी अटैक ट्रिगर कर सकती है।

ब्लड प्रेशर मॉर्निंग सर्ज दिखाता है
इसे कार्डियोलॉजी में मॉर्निंग बल्ड प्रेशन सर्ज कहा जाता है। यह शुगर रात की तुलना में 20–25 mmHg तक बढ़ सकता है। हाई बीपी वाले लोगों में यह बढ़ोतरी और भी तेज़ होती है। बीपी में यह उछाल दिल की आर्टरीज़ पर जोर।

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