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चेंबर में सिर कटी लाश: पुलिस गिरफ्त में हत्याकांड के आरोपी अर्जुन केवट और अरविंद केवट

Khulasa First

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संवाददाता

30 जनवरी 2026, 4:19 pm
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चेंबर में सिर कटी लाश

दूसरा आरोपी गिरफ्तार और हत्या की वजह का खुलासा

रविश राजेंद्र सिंह परिहार 79870-55743 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
10 मई 2013 की दोपहर हीरानगर थाने का माहौल रोज की तरह सामान्य था। फाइलों में उलझी पुलिस, फरियादियों की आवाजाही और ड्यूटी पर तैनात जवान। तभी अचानक थाने के बाहर शोर मचने लगा। रोती-बिलखती एक महिला, साथ में उसके दो बच्चे करीब 10 से 12 साल की उम्र, थाने में दाखिल हुई।

बच्चों की आंखों में डर था और महिला के चेहरे पर ऐसी घबराहट, जैसे किसी अनहोनी की आहट उसे अंदर तक झकझोर रही हो। उस वक्त हीरानगर थाने के प्रभारी जीआर गोलियां अपने कैबिन में बैठे थे। शोर सुनकर वे बाहर आए और महिला को शांत कराया।

महिला ने कांपती आवाज में कहा मेरे पति विष्णु केवट कल से घर नहीं आए हैं। यहीं से शुरू हुआ विष्णु केवट की गुमशुदगी का मामला, जो पांच महीने तक इंदौर पुलिस, प्रशासन और आम लोगों के लिए रहस्य और डर का पर्याय बना रहा।

किस्सा अपराध का...
विष्णु केवट निवासी भानगढ़ प्रॉपर्टी के छोटे-मोटे काम से जुड़ा था। उसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी। शुरुआती तौर पर पुलिस ने पत्नी की शिकायत पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की। पत्नी संजूबाई ने पुलिस को बताया कि पति घर से चौराहे तक का कहकर निकले थे।

टीआई ने बीट जवानों को इलाके में लगाया, रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ हुई, लेकिन विष्णु का कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच 4–5 दिन बाद हीरानगर थाना प्रभारी गोलिया का तबादला हो गया। उनकी जगह हीरानगर थाने की कमान संभाली संजय वर्मा ने।

विष्णु की पत्नी लगभग रोज थाने आने लगी । रोजाना 3 से 4 घंटे बैठी रहती थी। कभी आंखों में उम्मीद, कभी अनहोनी का डर। टीआई ने उसका डर भांपा तो उसने साफ शब्दों में कहा मुझे लगता है, मेरे पति के साथ कुछ गलत हुआ है। टीआई संजय वर्मा को भी यह मामला साधारण गुमशुदगी नहीं लगा।

20 लाख रुपए फिरौती देगी तभी विष्णु को छोड़ेंगे

मामले में पुलिस ने जांच तेज की। शहर और थाना क्षेत्र में जगह-जगह विष्णु के पोस्टर लगाए गए विष्णु केवट लापता है…। इस तलाश में पुलिस के साथ विष्णु की पत्नी और उसका दोस्त अर्जुन केवट सहित अन्य रिश्तेदार पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खोज में लगे रहते थे, लेकिन उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा।

विष्णु के लापता होने को दूसरा सप्ताह बीतने वाला था। तभी एक दिन विष्णु की पत्नी के मोबाइल पर विष्णु के मोबाइल नंबर से कॉल आया, पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लगा कि शायद विष्णु खुद फोन कर रहा है, लेकिन जैसे ही उसने कॉल रिसीव किया, खुशी डर में बदल गई।

फोन पर एक अजनबी, तोतली आवाज आई की तेरे पति विष्णु केवट का अपहरण हो गया है। 20 लाख रुपए फिरौती देगी तभी उसे छोड़ेंगे कहकर कॉलर ने कॉल कट कर दिया। पत्नी ने तत्काल घटना की जानकारी टीआई संजय वर्मा को दी। 25 मई 2013 को टीआई संजय वर्मा ने अपहरण का प्रकरण दर्ज किया।

देवास, उज्जैन, तक पुलिस की दौड़.... एसटीडी से करता गुमराह
इसके बाद कॉलर ने पुलिस और परिवार को लगातार गुमराह किया। कभी देवास, कभी उज्जैन, कभी रतलाम, कभी फतेहाबाद। हर बार विष्णु की पत्नी तो कभी विष्णु का दोस्त अर्जुन केवट रकम लेकर जाते। हर बार पुलिस खाली हाथ लौटती। करीब एक महीना बीत गया न विष्णु मिला, न कॉलर।

फिर कुछ दिन बाद विष्णु के मोबाइल से कॉल आना बंद हो गया। मोबाइल पूरी तरह स्विच ऑफ हो गया। इसके बाद कॉलर अलग-अलग एसटीडी (पीसीओ) से फोन करने लगा। पुलिस ने हर उस पीसीओ की जांच की, जिससे कॉल आया। लेकिन हर बार कॉलर बच निकलता।

पहली लोकेशन
जांच अधिकारी बनाए गए वरसिंह खड़िया भी टीम में शामिल हुए तत्कालीन कान्स्टेबल राजेंद्र रघुवंशी और प्रवीण सिंह ने विष्णु के मोबाइल नंबर की लोकेशन निकाली। पहली लोकेशन टिगरिया बादशाह, बाणगंगा क्षेत्र की निकली टीम मौके पर पहुंची, लेकिन वहां न तो विष्णु मिला और न ही कॉल करने वाला व्यक्ति।

पुलिस खाली हाथ लौट आई। इसके बाद फिरौती कॉल्स का सिलसिला शुरू हो गया। कभी हर एक-दो दिन में, कभी एक हफ्ते बाद। कॉलर हर बार विष्णु के मोबाइल से फोन करता और 20 लाख की मांग दोहराता। पुलिस हर बार तकनीकी जानकारी के आधार पर लोकेशन निकालती, लेकिन कॉलर हर बार बच निकलता।

वजह साफ थी लोकेशन आने में वक्त लगता और कॉलर उतनी देर में जगह बदल लेता। कभी कॉलर देवास में होने का कहकर वहां आने का कहता तो लोकेशन अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र की आती। एक दिन कॉलर ने रकम लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन लाने को कहा।

पुलिस ने रणनीति बनाई और विष्णु की पत्नी को बैग में रकम रखकर स्टेशन भेजा गया। कॉलर के निर्देश थे स्टेशन पहुंचते ही इस बोगी में चढ़ना और चलती ट्रेन से बैग फेंक देना। पत्नी ने वैसा ही किया। टीम बैग पर नजर रखे रही 8–10 घंटे बीत गए, लेकिन कोई बैग उठाने नहीं आया।

देवास, उज्जैन, तक पुलिस की दौड़.... एसटीडी से करता गुमराह
इसके बाद कॉलर ने पुलिस और परिवार को लगातार गुमराह किया। कभी देवास, कभी उज्जैन, कभी रतलाम, कभी फतेहाबाद। हर बार विष्णु की पत्नी तो कभी विष्णु का दोस्त अर्जुन केवट रकम लेकर जाते। हर बार पुलिस खाली हाथ लौटती। करीब एक महीना बीत गया न विष्णु मिला, न कॉलर।

फिर कुछ दिन बाद विष्णु के मोबाइल से कॉल आना बंद हो गया। मोबाइल पूरी तरह स्विच ऑफ हो गया। इसके बाद कॉलर अलग-अलग एसटीडी (पीसीओ) से फोन करने लगा। पुलिस ने हर उस पीसीओ की जांच की, जिससे कॉल आया। लेकिन हर बार कॉलर बच निकलता।

आईजी से लेकर एसपी तक की नजर
यह मामला जल्द ही इंदौर की चर्चित खबर बन गया। अखबारों की सुर्खियों में रोज विष्णु केवट का नाम आने लगा। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक विपिन माहेश्वरी खुद रोज केस की प्रगति लेने लगे।

क्राइम ब्रांच सहित करीब 25 जवानों की टीम बनाई गई। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ओपी त्रिपाठी ने केस के खुलासे पर 25 हजार रुपए के इनाम की घोषणा की, लेकिन 5 महीने बीत गए न कॉलर पकड़ा गया, न विष्णु का कोई सुराग मिला।

बारिश वाली शाम और निर्णायक कॉल
सितंबर 2013 के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर कॉलर ने विष्णु केवट की पत्नी को फोन किया। कॉलर बोला शाम तक फोन करूंगा, जहां कहूं वहां रकम लेकर आ जाना। विष्णु की पत्नी ने तुरंत टीआई संजय वर्मा को सूचना दी।

उसे टीआई के कैबिन में बैठाया गया, ताकि कॉल आते ही कार्रवाई हो सके। इस बार पुलिस ने विष्णु की पत्नी को इस बारे में किसी को भी जानकारी देने से मना करते हुए थाने आने की जानकारी किसी को भी न देने का कहते हुए कॉलर को झांसे में लेने को कहा।

विष्णु केवट की पत्नी संजूबाई घर पर व रिश्तेदारों को बिना बताए थाने पहुंची, जिसकी जानकारी किसी को भी नहीं थी। शाम को जैसे ही फोन विष्णु की पत्नी के पास आया, टीआई ने कॉलर द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एसटीडी (पीसीओ) का नंबर पेपर में नोट किया और संजू बाई को कहा उसे बातों में उलझाए रखना।

इस दौरान कॉन्स्टेबल राजेंद्र रघुवंशी व प्रवीण सिंह ने पेपर उठाया और थाने से बाहर निकल गए।टीआई संजय वर्मा से नंबर मिलते ही कांस्टेबल राजेन्द्र सिंह रघुवंशी और प्रवीण सिंह ने अपने टेक्निकल इन्फोरमर को नंबर ट्रेस करने को कहा, जैसे ही लोकेशन मिली दोनों तेज बारिश में बाइक से खातीपुरा के लिए निकले, लेकिन रास्ते में उनकी बाइक खराब हो गई।

कॉलर के फिर से भाग जाने का खतरा था। बारिश में दोनों ने राहगीरों को रोका, लेकिन कोई रुकने को तैयार नहीं था। बड़ी मुश्किल से एक बाइक वाले को रोका, जिसके बाद खातीपुरा पहुंचकर दोनों जवानों ने एसटीडी बूथ खोजना शुरू किया। तभी एक बूथ में एक युवक फोन पर बात करता दिखा।

दोनों अंदर घुसे, फोन छीना उधर से आवाज आई विष्णु की पत्नी की। कॉलर कन्फर्म हो चुका था। युवक को बाहर निकाला गया और अगले ही पल दोनों जवान सन्न रह गए। वह युवक कोई और नहीं, बल्कि विष्णु का दोस्त अर्जुन केवट था, जिसके बाद उसकी खातिरदारी की गई और अर्जुन को हीरानगर थाने लाया गया।

टीआई संजय वर्मा भी यह देखकर चौंक गए। पहले अर्जुन ने इनकार किया, फिर कहानी गढ़ी की विष्णु अपनी प्रेमिका के साथ गुजरात के सूरत शहर भाग गया है। उसी ने मुझसे फिरौती के कॉल करवाए। वर्तमान में उसका मोबाइल बंद है। जिस कारण उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिसके बाद पुलिस उसे लेकर सूरत पहुंची। कई दिनों तक तलाश हुई, लेकिन विष्णु वहां नहीं मिला। इस दौरान अर्जुन केवट की जमकर खातिरदारी हुई।

इनकी मेहनत से हुआ खुलासा
पुलिस को शक हुआ कि अर्जुन केवट के लिए 7 से 8 फीट ऊंचे चेंबर में शव अकेले फेंकना मुश्किल था। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया और सच उगल दिया कि हत्या में उसका भाई अरविंद केवट भी शामिल था।

जिसके बाद पुलिस ने अरविंद को अभिरक्षा में लिया। पूछताछ में सामने आया कि अर्जुन के एक महिला से अवैध संबंध थे, जो टिगरिया बादशाह में सब्जी बेचती थी। उसी ने विष्णु को उससे मिलवाया था। धीरे-धीरे महिला का झुकाव विष्णु की ओर बढ़ गया।

यहीं से अर्जुन में ईर्ष्या और रंजिश ने जन्म लिया और उसने 9 मई 2013 को अरविंद और अर्जुन ने खातीपुरा की एक कॉलगर्ल को भानगढ़ रोड के गोदाम में बुलाया, फिर विष्णु को भी वहीं बुलाया गया। जैसे ही विष्णु महिला के साथ संबंध बनाने लगा, अर्जुन ने पीछे से बक्के से उसके गले पर वार कर दिया।

एक ही वार में विष्णु केवट का गला कटकर लटक गया। खून से लथपथ कॉलगर्ल डर गई। उसे धमकाकर चुप करा दिया गया। जिसके बाद शव को चेंबर में फेंक दिया गया। इस दौरान अर्जुन ने विष्णु का मोबाइल बंद कर अपने पास रख लिया था, जिससे उसने फिरौती मांगी थी।

मामले में 2 अक्टूबर 2013 को हीरानगर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए विष्णु केवट का मोबाइल जब्त कर लिया, जो अर्जुन केवट ने तंगी के कारण परदेशीपुरा क्षेत्र में बेच दिया था। पुलिस ने गवाह एकत्रित कर आरोपियों की गिरफ्तारी कर उन्हें जेल भेज दिया, बाद में अदालत ने दोनों भाइयों को दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई।

निवाला तोड़ते हुए टूट गया अर्जुन बोला मैंने की हत्या
टीआई संजय वर्मा के नेतृत्व में सूरत पहुंची टीम इंदौर के लिए निकली। सूरत से लौटते वक्त टीम उज्जैन के पास रुकी। भूख लगी तो एक होटल पर खाना मंगवाया गया। टीआई, एसआई, कांस्टेबल और अर्जुन एक ही टेबल पर बैठे। अरविंद ने रोटी तोड़ी, सब्जी लगाई और अचानक फूट-फूटकर रोने लगा।

उसने कहा साहब, आप लोग अधिकारी होकर मुझे साथ बैठाकर खाना खिला रहे हो…मैं अब और झूठ नहीं बोलूंगा। फिर जो उसने कहा, उसने सबको हिला दिया अर्जुन बोला मैंने ही विष्णु केवट की हत्या की है और उसका शव चेंबर में फेंक दिया।

चेंबर का रहस्य और कंकाल की बरामदगी
पुलिस टीम तुरंत इंदौर लौटी और अर्जुन के बताए स्थान भानगढ़ रोड पर फायर ब्रिगेड और निगम अमले को बुलाया। पहले चेंबर में कुछ नहीं मिला, जिसके बाद टीआई का माथा ठनका और उन्होंने अर्जुन की खातिरदारी कर दी, लेकिन अर्जुन बोला साहब मैंने मारकर यही फेंका है, जिसके बाद जांच तेज हुई और दूसरे, तीसरे… कई चेंबर चेक किए गए, लेकिन सभी खाली मिले।

आगे गैस भरी थी, इसलिए उतरना मुश्किल था। लगातार तलाश के बाद 7वां चेंबर खोला गया। अंदर गाद का ढेर था। टीम चेंबर में उतरी। तभी विष्णु के मौसा ने कहा-देखो, कोई हंसने की आवाज आ रही है… यह सुनते ही माहौल सन्न हो गया।

आरक्षक प्रवीण सिंह ने टॉर्च जलाकर देखा तो गाद के पीछे पानी में एक सड़ा-गला शव तैरता मिला। शव को चादर की मदद से बाहर निकाला गया तो सिर गायब था। यह देख सभी घबरा गए । शव बुरी तरह गल चुका था। कंकाल पर कपड़े बचे थे, कुछ जगह मांस के अवशेष।

पुलिस ने तत्काल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर शव की शिनाख्त के लिए डीएनए टेस्ट कराया गया। विष्णु के बेटे के सैंपल से मिलान कराया गया। रिपोर्ट आई शव विष्णु केवट का ही था। हालांकि विष्णु का सिर ढूंढने की काफी कोशिश की गई, लेकिन बरामद नहीं हुआ।

वो हत्यारा जिसने पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाया
हत्यारा खुद पुलिस के साथ मिलकर हत्यारे को ढूंढ रहा था, जिसकी वजह से पुलिस की हर गतिविधि पर उसकी नजर थी। जिसके कारण वह पुलिस के किसी जाल में नहीं फंस रहा था, लेकिन पुलिस ने हर चाल नाकाम होने पर विष्णु की पत्नी को अकेले आने और किसी को भी कॉलर के बारे में न बताने का कहा, जिसके बाद इस जघन्य हत्याकांड की कड़ी पुलिस के हाथ लगी और खुलासा हो गया।

हत्या का खुलासा करने पर इन सभी को 25 हजार रुपए का नकद इनाम दिया गया।

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