मौलाना मौज दरगाह पर हनुमान चालीसा का पाठ: उज्जैन में साम्प्रदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में साम्प्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की है। शिप्रा नदी के रामघाट के समीप प्रसिद्ध मौलाना मौज दरगाह पर शुक्रवार को बम-बम भोला बाबा के चमत्कार
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में साम्प्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की है। शिप्रा नदी के रामघाट के समीप प्रसिद्ध मौलाना मौज दरगाह पर शुक्रवार को बम-बम भोला बाबा के चमत्कार के रूप में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ आयोजित किया गया। इस आयोजन में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ शामिल हुए, जहां कव्वाली और भजन का अनोखा समन्वय देखने को मिला।
यह आयोजन धार्मिक सद्भाव को मजबूत करने का प्रतीक बना, जो कुछ तत्वों को पसंद न आने के बावजूद शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। आयोजन की शुरुआत दोपहर करीब 2 बजे हुई, जब स्थानीय हिंदू भक्तों ने दरगाह परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ शुरू किया। मुस्लिम समाज के सदस्यों ने भी इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो बाबा मौलाना मौज की मजार पर उनकी आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण माना जा रहा है।
दरगाह के मुख्य संरक्षक हाजी अब्दुल रहमान ने बताया बाबा का चमत्कार यही है कि यहां सभी धर्मों के लोग एक परिवार की तरह आते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए हमने भजन और कव्वाली का मिश्रण किया, जो एकता का संदेश देता है। पाठ के दौरान जय बम बम भोला और जय हनुमान के नारे गूंजते रहे, और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।
मजार एकता की प्रतीक
मौलाना मौज दरगाह उज्जैन की शिप्रा नदी तट पर स्थित एक प्राचीन स्थल है, जहां बाबा मौलाना की मजार पर सदियों से हिंदू-मुस्लिम एकता की परंपरा चली आ रही है। बाबा का आशीर्वाद सभी धर्मों के लिए समान है और यहां चमत्कारिक घटनाएं आम हैं। इस बार का आयोजन विशेष रूप से इसलिए चर्चित हुआ, क्योंकि कुछ असामाजिक तत्वों ने इसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन श्रद्धालुओं की एकजुटता से यह सफल रहा। आयोजन का संयोजन स्थानीय हिंदू संगठन शिव भक्त मंडल और मुस्लिम समिति दरगाह कमेटी ने मिलकर किया।
भक्ति धर्म की सीमाओं से परे है
शिव भक्त मंडल के अध्यक्ष पंडित रामेश्वर शर्मा ने कहा बाबा का चमत्कार हमें सिखाता है कि भक्ति धर्म की सीमाओं से परे है। हमने हनुमान चालीसा के 11 पाठ पूरे किए, जिसमें मुस्लिम भाई भी शामिल हुए। यह वाकया उज्जैन की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करता है। वहीं, मुस्लिम समुदाय की महिला सदस्य फातिमा बी ने अपनी भावनाएं साझा कीं, हमारे बाबा सभी के बाबा हैं। हनुमान चालीसा सुनकर मन को शांति मिली और यह एकता का प्रतीक है।
एकता के बीच चुनौतियां
हालांकि आयोजन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ तत्वों ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर विवादास्पद बयान दिए, जो हिंदू-मुस्लिम एकता को पसंद नहीं करते। पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इसकी सराहना करते हुए कहा, उज्जैन सदैव शांति का प्रतीक रहा है। ऐसे आयोजन सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं, और प्रशासन इसका समर्थन करता है।
आयोजन के अंत में सभी ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाई और प्रसाद वितरण किया। यह घटना न केवल उज्जैन बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है, जहां धार्मिक एकता के ऐसे उदाहरण दुर्लभ हैं। भविष्य में ऐसे और आयोजन होने की उम्मीद है, जो समाज को जोड़ो का काम करेंगे।
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