खबर
टॉप न्यूज

जय रणजीत... जय-जय रणजीत: रणजीत बाबा की अगवानी में शहर के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में बिछ गए पलक-पांवड़े

अष्टमी महोत्सव हजारों दीपक से जगमग हुआ दरबार, आज रतजगा, कल ब्रह्ममुहूर्त में प्रभातफेरी, पहली बार पुलिस बैंड देगा सलामी, ड्रोन से होगा इत्र-गंगाजल का छिड़काव रथ में सवार हो भक्तों का हाल जानने निकलेंगे

Khulasa First

संवाददाता

11 दिसंबर 2025, 8:06 पूर्वाह्न
2 views
शेयर करें:
जय रणजीत... जय-जय रणजीत

अष्टमी महोत्सव हजारों दीपक से जगमग हुआ दरबार, आज रतजगा, कल ब्रह्ममुहूर्त में प्रभातफेरी, पहली बार पुलिस बैंड देगा सलामी, ड्रोन से होगा इत्र-गंगाजल का छिड़काव

रथ में सवार हो भक्तों का हाल जानने निकलेंगे रणजीत हनुमान सरकार, 500 भक्त खींचेंगे रथ

कल सुबह 5 बजे मंदिर से होगी शुरुआत, 4.5 किमी घूमेंगे बाबा, भजन मंडलियां होंगी, बग्घियों में होंगे साधु-संत

यात्रा मार्ग पर बना अयोध्या राम मंदिर की प्रतिकृति का भव्य मंच, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी

सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त, 4 जोन में बांटा मार्ग, हाईराइज बिल्डिंग से निगरानी, मेटल डिटेक्टर संग 50 गलियों में बैरिकेडिंग

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर
जी हां, रणजीत हनुमानजी मंदिर का वार्षिक उत्सव ‘रणजीत अष्टमी’ के आगमन में अब महज एक रात का अंतर है। गुरुवार-शुक्रवार की ये दरमियानी रात भी रतजगे में ही बीतेगी। नींद आंखों से कोसों दूर होगी और पलकें उसी मार्ग पर टकटकी लगाए रहेंगी, जिन राहों से बाबा का रथ गुजरेगा।

महूनाका चौराहा से लेकर हवा बंगला क्षेत्र व द्रविड़ नगर-उषा नगर से अन्नपूर्णा मंदिर के पूरे इलाके में जैसे भक्तों ने पलक-पांवड़े बिछा दिए हैं। नजारा दीपावली के त्योहार जैसा है।

एक दिन पूर्व, यानी बुधवार की रात ही रणजीत बाबा का आंगन हजारो-हजार दीपकों से जगमगा रहा था। मंदिर प्रबंधन ने 50 हजार दीप प्रज्ज्वलित करने की बात कही थी, लेकिन इतने ही दीपक घर-घर से रोशन होकर बाबा की देहरी तक आ गए। हर तरफ दीपोत्सव का उजियारा पसरा था।

इस उजियारे में एक तरफ भजनों की स्वरलहरियों की गूंज थी तो दूजी तरफ सांस्कृतिक व पारंपरिक प्रस्तुतियां हो रही थीं। ध्वज पूजन व आरोहण के साथ उत्सव की शुरुआत तो मंगलवार से ही हो गई थी। आज हजारों अभिमंत्रित रक्षा सूत्रों का वितरण होगा।

मंदिर के मुख्य पुजारी दीपेश व्यास की स्थिति तो ऐसी थी, जैसे किसी घर के ब्याह में मुख्य जजमान की रहती है। वे और उनके बड़े भाई व परिवार के अन्य सदस्य वैसी ही भागदौड़ में जुटे हैं, जैसे घर में बेटी का ब्याह मंडा हुआ हो। सरकारी बंदोबस्त के मामले में ये ही हाल कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के हैं, वे भी समूचे उत्सव की तैयारियों व बारीकियों पर नजरें गड़ाए हुए हैं।

मंदिर के नियमित भक्तों की तो पूछिए ही मत, भक्त मंडल के सदस्यों की। अनीश जैन, कपिल जैन जैसे सैकड़ों भक्त प्रभातफेरी की व्यवस्थाओं व निमंत्रण में ऐसे जुटे हैं, जैसे ये उनके ही घर का आयोजन हो।

इसके अलावा यात्रा मार्ग से जुड़े घर-परिवारों में भी बिन बोले, बिन न्योते तैयारी हो रही है। यात्रा का स्वागत कैसे हो, भक्तों को क्या प्रसादी पवाएं, सज-सज्जा कैसी हो... बस, ये ही चिंता घर-घर पसरी हुई है। स्वागत मंचों की तो पूछिए ही मत कि कितनी संख्या में ये अस्तित्व में आएंगे। मंच के मामले में तयशुदा आंकड़े व अनुमति हर बार की तरह परे रहना है, क्योंकि हर घर का अपना मंच होगा। चाहे फिर वह डाइनिंग व टी-टेबल के रूप में ही क्यों न हो।

पहली बार पुलिस बैंड, ड्रोन से इत्र का छिड़काव
महाकाल बाबा की सवारी की तर्ज पर पहली बार पुलिस बैंड भी प्रभातफेरी में रणजीत सरकार को सलामी देगा। यात्रा मार्ग पर गंगाजल का ही नहीं, इत्र का भी छिड़काव होगा और ये काम ड्रोन से होगा। प्रभातफेरी की सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त पुलिस ने किए हैं। 4 जोन में 4 किमी से ज्यादा मार्ग को बांटा गया है।

50 गलियों में बैरिकेडिंग होगी। मेटल डिटेक्टर भी लगेंगे। यात्रा मार्ग की तमाम हाईराइज बिल्डिंग से तो निगरानी होगी ही, दर्जनों वॉच टॉवर भी बनाए गए हैं। बाबा का मुख्य रथ भी पुलिस की सुरक्षा व निगरानी में होगा। इस रथ को 500 भक्त खींचेंगे। यात्रा सुबह 5 बजे से शुरू होगी। इसमें भजन मंडलियां होंगी व बग्घियों में साधु-संत सवार रहेंगे।

सांसद शंकर लालवानी की सेवा संकल्प टीम ने अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति जैसा बड़ा मंच भी बनाया है। ड्रोन से इत्र व गंगाजल का छिड़काव सांसद की टीम के जिम्मे रहेगा। प्रभातफेरी में शहर के तमाम जनप्रतिनिधियों की हाजिरी भी बतौर भक्त लगेगी। न कोई अतिथि, न मुख्य अतिथि। सब बाबा रणजीत सरकार के भक्त।

हनुमंत सरकार का देवालय आस्था का ऐसा केंद्र हो जाए कि देवालय का सालाना उत्सव जन-जन का उत्सव हो जाए। ऐसा कहीं देखने-सुनने में अब तक तो नहीं आया, लेकिन रणजीत बाबा का धाम और उनकी वार्षिक प्रभातफेरी ऐसा ही आस्था का उत्सव हो गई है।

भरोसा न हो तो पुराने इंदौर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में आकर देखिए। दीपावली-सा नजारा है। हजारों दीपकों की जगमगाहट के बीच इलाका रोशन है। सबके बाबा भक्तों का हाल जानने देवालय से निकलकर भक्तों के घर-द्वार तक जो आ रहे हैं।

बस, अब चंद घंटे ही तो शेष हैं। शुक्रवार की अलसुबह, यानी ब्रह्ममुहूर्त से ही समूचे इंदौर में जय रणजीत, जय-जय रणजीत का जयघोष गूंजेगा।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!