गुटखा माफिया किशोर वाधवानी हाजिर हो: गुटखे से काली कमाई; अखबार से सफेदी आज अदालत में होगी पेशी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गुटखा कारोबार की आड़ में कथित तौर पर करोड़ों रुपए की काली कमाई और उसे अखबार के फर्जी सर्कुलेशन व विज्ञापनों के जरिए सफेद करने वाले गुटखा माफिया किशोर वाधवानी की मुश्किलें अदालत में निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आए मनी लॉन्ड्रिंग के इस बहुचर्चित मामले में आज विशेष अदालत में अहम सुनवाई है।
बचाव पक्ष अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाया तो किशोर वाधवानी और उसके भतीजे नीतेश वाधवानी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय हो सकते हैं, जिससे ट्रायल का रास्ता साफ हो जाएगा।
पिछली सुनवाई में आरोपी किशोर वाधवानी अपने भतीजे नितेश वाधवानी के साथ पेश हुआ था। बताया जाता है कि चार्ज तय होने की प्रक्रिया शुरू होते ही दोनों ने अदालत में आवेदन देकर चार्ज तय करने से पहले बचाव में अंतिम दलीलें रखने का मौका मांगा था।
दोनों ने हाथ जोड़कर गुहार लगाई थी। अदालत ने आवेदन पर सुनवाई करते हुए बचाव पक्ष को एक और अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई आज तारीख में तय की थी। अब सुनवाई में बचाव पक्ष अपनी अंतिम दलीलें पेश करेगा।
इसके बाद अदालत तय करेगी की आरोपी किशोर और नीतेश वाधवानी के खिलाफ आरोप तय किए जाएं या नहीं।
दिसंबर 2025 में ईडी ने पेश किया था चालान
इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिसंबर 2025 में विशेष अदालत में चालान पेश किया था। इसमें किशोर वाधवानी, उसकी पत्नी पूनम वाधवानी, दबंग दुनिया प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के सीईओ पंकज मजेपुरिया को आरोपी बनाया है।
ईडी का आरोप है वाधवानी समूह ने गुटखा कारोबार से अर्जित कथित काले धन को वैध दिखाने के लिए अखबार और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया।
अखबार बना काले धन को सफेद करने का जरिया
जांच एजेंसी के मुताबिक वाधवानी समूह ने अपने अखबार दबंग दुनिया को कथित तौर पर वित्तीय माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया। अखबार की वास्तविक बिक्री बहुत कम थी, लेकिन कागजों में सर्कुलेशन कई गुना बढ़ाकर दिखाया गया। वास्तविक बिक्री लगभग 5 से 8 हजार प्रतियां प्रतिदिन बताई जाती है, वहीं दस्तावेजों में इसे 60 हजार से लेकर एक लाख प्रतियां प्रतिदिन तक दर्शाया गया।
एजेंसियों का दावा है इस फर्जी सर्कुलेशन के जरिए अन्य व्यवसायों से अर्जित काले धन को अखबार की बिक्री और विज्ञापन आय के रूप में वैध दिखाया गया। कई ऐसे विज्ञापन कागजों में दिखाए गए जो वास्तव में प्रकाशित ही नहीं हुए थे। विज्ञापनों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर करोड़ों की आय दर्शाने का भी आरोप लगाया गया है।
11.66 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का दावा: ईडी की जांच के अनुसार वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच दबंग दुनिया के माध्यम से करीब 11 करोड़ 66 लाख रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की गई। इस अवधि में अखबार की लगभग 2.80 करोड़ प्रतियां बिकने का दावा किया गया और प्रति कॉपी दो रुपए के हिसाब से बड़ी रकम की आय दिखाई गई।
जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे तंत्र के जरिए कथित तौर पर गुटखा कारोबार से कमाए गए काले धन को वैध आय के रूप में दर्शाने की कोशिश की गई।
2002 करोड़ की टैक्स डिमांड से खुला मामला: मामले का खुलासा तब हुआ जब सेंट्रल जीएसटी और एक्साइज कमिश्नरेट ने किशोर वाधवानी और उसके परिजनों के खिलाफ करीब 2002 करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड का नोटिस जारी किया।
इसे प्रदेश की सबसे बड़ी टैक्स कार्रवाई माना गया। इस पर जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के कई पहलू सामने आए, जिसके बाद मामला प्रवर्तन निदेशालय तक पहुंचा।
हाई कोर्ट से मिली जांच को हरी झंडी: स्पेशल कोर्ट में चल रही सुनवाई के समानांतर किशोर वाधवानी ने ईडी की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने फिलहाल ईडी के किसी अंतिम निर्णय पर रोक लगाते हुए जांच प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी है।
आज की सुनवाई पर टिकी नजरें: अब नजरें आज की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत आरोप तय करती है तो मामला ट्रायल के अगले चरण में प्रवेश करेगा, जहां गुटखा कारोबार, फर्जी सर्कुलेशन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों पर विस्तृत सुनवाई होगी।
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