मिड-डे मील योजना की निगरानी में हो रही घोर लापरवाही: कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । मिड-डे मील योजना की निगरानी में गंभीर लापरवाही रोकने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप व सख्त कार्रवाई की मांग के लिए प्रधानमंत्री को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ने पत्र लिखा है। इसमें मां...
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मिड-डे मील योजना की निगरानी में गंभीर लापरवाही रोकने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप व सख्त कार्रवाई की मांग के लिए प्रधानमंत्री को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ने पत्र लिखा है। इसमें मांग सहित निवेदन किया है कि मध्यप्रदेश में मिड-डे मील योजना की निगरानी को लेकर अत्यंत चिंताजनक स्थिति है, इसलिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
पूर्व विधायक एवं अभा कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल ने बताया कि अनेक समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार मप्र के हजारों सरकारी स्कूलों में से करीब 16945 का वर्षभर में एक बार भी निरीक्षण नहीं किया गया है, जिससे बच्चों को परोसे जाने वाले मध्याह भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और संचालन की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
इस अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उनका स्वास्थ्य व शिक्षा बेहतर करना है। इसी के अंतर्गत मप्र में निगरानी पर हर साल 795 करोड़ रुपए का खर्च एवं भोजन पर 1600 करोड़ रुपए का खर्च होता है, पर उक्त योजना में ही इस प्रकार की लापरवाही अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंतनीय है। कहना अनुचित नहीं होगा कि निरीक्षण के अभाव में यह योजना भ्रष्टाचार व अनियमितताओं का शिकार होती जा रही है, क्योंकि कोई देखने वाला ही नहीं है। इसका सीधा दुष्प्रभाव लाखों बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
राज्य सरकार से तुरंत रिपोर्ट तलब की जाए
पटेल ने इस गंभीर मामले में प्रधानमंत्री से निवेदन किया है कि राज्य सरकार से तुरंत रिपोर्ट तलब की जाए कि निरीक्षण न होने के पीछे क्या कारण रहे और कौन-कौन अधिकारी इस लापरवाही के लिए सीधे जिम्मेदार हैं, साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र निगरानी प्रणाली बनाई जाए, जिसमें केंद्र द्वारा गठित टीम समय-समय पर राज्यों का औचक निरीक्षण करे।
आग्रह है कि मध्यप्रदेश में जिन जिलों में निरीक्षण शून्य है वहां तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) को नियुक्त कर कार्रवाई की जाए। इसी तरह डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाए, ताकि हर निरीक्षण की जियो टेग रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध रहे, जिसे कोई बदल या छिपा न सके।
भोजन का नियमित पोषण स्तर परीक्षण कराया जाए
उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता की तृतीय पक्ष जांच अनिवार्य हो, विशेषकर उन जिलों में जहां पहले गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। किसी भी स्थिति में दोषी पाए जाने पर कॉन्ट्रेक्टर, संबंधित संस्था व जिम्मेदार अधिकारी सहित सभी पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी गड़बड़ी और खिलवाड़ करने का साहस न करे।
देश के नौनिहालों को परोसे जाने वाले भोजन का नियमित पोषण स्तर परीक्षण (ऑडिट) कराया जाए। इस मामले में आप तत्काल हस्तक्षेप कर मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में इस योजना की निगरानी प्रणाली को कठोर, पारदर्शी और परिणामकारी बनाने की दिशा में त्वरित कदम उठाने का कष्ट करें।
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