‘धार' पर सरकार: नमाज या वाग्देवी जयकार; सुप्रीम कोर्ट में आज तय होगा भोजशाला में वसंत पंचमी पर नमाज होगी या नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

हिंदू समाज का वसंत पंचमी पर दिनभर अखंड पूजन-अर्चन का संकल्प
मुस्लिम समुदाय भी नमाज के लिए प्रतिबद्ध, सांकेतिक नमाज के जरिये नरमी के भी संकेत
वसंत पंचमी के पहले धार शहर व भोजशाला स्थान छावनी में तब्दील, मातृशक्ति ने निकाली कलश यात्रा
दिग्विजय सिंह हुए मुखर- एएसआई का पालन करें, दोपहर 1 से 3 बजे तक का समय नमाज के लिए छोड़ें
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वसंत पंचमी पर एक बार फिर राजा भोज की नगरी धार में मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ‘धार' पर है। इसके पहले भी 2003, 2016 व 2023 में सरकार ऐसे ही ‘धार' पर सवार हुई थी। ठीक वैसी ही परिस्थिति पुनः बन गई है। कारण बना है हिंदू समाज का सबसे बड़ा उत्सव-पर्व वसंत पंचमी।
ज्ञान की देवी भगवती मां सरस्वती की साधना, पूजन-अर्चन व आराधना से जुड़ा ये पर्व धार के लिए, शेष भारत से अलग महत्व रखता है। कारण है भोजशाला। ये भोजशाला वाग्देवी वीणावादिनी का प्राकट्य स्थल है और यहां सरस्वती पूजन की सनातनी परंपरा रही है।
वाग्देवी का विग्रह तो सात समंदर पार है, लेकिन अब इसी भोजशाला में कमाल मौला की एक इबादतगाह विद्यमान है। इस इबादतगाह में हर शुक्रवार नमाज भी होती है। वसंत पंचमी एक बार फिर इस बरस शुक्रवार को आ गई।
बस, इस जुमे ने ही मोहन सरकार को ‘धार' पर खड़ा कर दिया है। सरकार के सामने धर्मसंकट है कि वह शुक्रवार को हिंदू-मुसलमान के बीच कैसे सामंजस्य बैठाए? ताकि पूजन भी हो और नमाज भी मुकम्मल हो।
धार की भोजशाला व उसमें पढ़ी जाने वाली नमाज को लेकर हिंदू समाज यूं तो दशकों से उद्वेलित है, लेकिन वर्ष 1998-99 से वह सड़क पर आंदोलित भी है। उमा भारती सरकार के समय से तो भोजशाला में नमाज धार शहर की नाक का सवाल हो गई है।
शहर का बहुसंख्यक समाज इस मुद्दे पर एक नहीं अनेक बार अपनी एकजुटता का संदेश भोपाल से लेकर दिल्ली तक दे चुका है। दलगत राजनीति से परे जाकर कई बार धार ने अपने एकमत से सरकार ही नहीं, देश के आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया व माननीय न्यायालय को भी अवगत कराया, लेकिन ये हिंदू समाज के लिए दुर्भाग्य का विषय ही है कि मध्य प्रदेश में 2003 से एकछत्र भाजपा की सत्ता होने के बावजूद भोजशाला का मसला विवाद का कारण बना हुआ है।
यहां तक कि सरकार में वसंत पंचमी पर भोजशाला में नमाज भी अता करवाई है। इसके लिए राजधर्म का पालन करती सरकार को हर बार धार में कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है और भोज नगरी सांप्रदायिक तनाव का साक्षी बनी।
धार में इस बार भी हालात तनावपूर्ण हैं। उमा भारती, शिवराज सिंह के बाद इस बार डॉ. मोहन यादव की कड़ी परीक्षा का कल दिन है। धार का बहुसंख्यक समुदाय ने भोजशाला के अंदर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक अखंड पूजन का संकल्प लिया है।
शहर में प्रतिदिन इसी संकल्प को लेकर रैलियां, प्रभातफेरी व मार्च निकल रहे हैं। बच्चों से लेकर महिलाएं तक के बड़े जुलूस सड़कों पर ललकार रहे हैं। बुधवार को भी मातृशक्ति की एक विशाल कलश यात्रा शहर की सड़कों पर निकली।
दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय भी नमाज को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर कर चुका है, लेकिन इस बार उसके रुख में नरमी के संकेत हैं। देश-काल की परिस्थितियों के मद्देनजर पहली बार मुसलमानों ने सरस्वती पूजन के दिन सांकेतिक नमाज की बात कही है।
यानी कम से कम संख्या में नमाज पढ़े जाने की बात कर मुस्लिम समुदाय प्रशासन से सहयोग की बात कर रहा है। हालांकि समाज का एक बड़ा तबका इस सांकेतिक नमाज को लेकर भी समुदाय के झंडाबरदार लोगों से रुष्ट है।
सबकी नजर कोर्ट पर, फैसला आता है या केंद्र के हवाले होगा मसला
धार का ये मसला एक बार फिर कोर्ट के पाले में है। आज, यानी गुरुवार को ये मामला देश की सर्वोच्च अदालत में है। आज ये तय हो जाएगा कि कल, वसंत पंचमी पर भोजशाला में नमाज होगी या नहीं? या फिर कोर्ट ये मसला केंद्र सरकार या आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के पाले में कर दे?
सबकी नजर आज सुप्रीम कोर्ट की तरफ लगी हुई हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की तरफ से इस मामले में याचिका दायर की गई है, जिसमें कई तर्क के जरिये कोर्ट से कहा गया है कि वसंत पंचमी के दिन भोजशाला पर हिंदू समाज का अधिकार कानूनन भी है और नमाज कहीं अन्यत्र भी पढ़ी जा सकती है।
याचिका में कहा गया है कि शुक्रवार को वसंत पंचमी पर नमाज पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, क्योंकि भोजशाला में राजा परमार के समय का सरस्वती मंदिर है। याचिका में धार में लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने की भी मांग की गई है, ताकि शहर में सांप्रदायिक तनाव न फैले। जिला प्रशासन ने भी शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और धार में हर दूसरे दिन सुरक्षा बलों का फ्लैग मार्च निकल रहा है।
संकटमोचक विजयवर्गीय तो शोक भवन में... अब क्या होगा?
भोजशाला मामले में जब-जब राज्य की सरकार ‘धार' पर सवार हुई, तब-तब कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय संकटमोचक बनकर सामने आए हैं। उमा भारती के समय भी ऐसे ही हालात निर्मित हुए थे। जुमा और वसंत पंचमी साथ आ गए थे।
शिवराज सरकार के समय भी दो बार ऐसा हुआ। हर बार विजयवर्गीय ने बीच का रास्ता निकाला। हालांकि इस कदम से बहुसंख्यक समाज की नाराजगी का शिकार भी होना पड़ा, लेकिन वे सरकार का ‘राजधर्म' कायम करने में कामयाब हुए।
इस बार भी वे ही कसौटी पर थे। वे धार जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। लिहाजा इस शुक्रवार को नमाज व पूजन में समन्वय उन्हीं के जिम्मे था, लेकिन सरकार की आशाओं पर ‘तुषारापात' हो गया। मंत्री के पारिवारिक सदस्य केके गोयल की पत्नी का निधन हो गया।
नतीजतन विजयवर्गीय ने स्वयं को इससे दूर कर लिया। एक पत्र भी जारी कर विजयवर्गीय ने स्पष्ट कर दिया है। अब मोहन सरकार पर नजर है कि वह इस ‘धारदार' मसले पर किस पर भरोसा करती है। सरकार भी कोर्ट की ओर देख रही है कि अगर वहां से कोई दो-टूक आदेश हो जाए तो राहत रहे।
उधर, आदतन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी मुखर हो गए। उन्होंने मोहन सरकार से शुक्रवार को नियमानुसार दोपहर 1 से 3 बजे तक का समय नमाज के लिए देने पर जोर दिया है।
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