सरकारी विभागों ने ही सरकार को लगाया करोड़ों का चूना: हुकुमचंद मिल रजिस्ट्री घोटाला; 26 करोड़ से अधिक की स्टाम्प ड्यूटी ‘गायब’, गृह निर्माण मंडल से वसूली का आदेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की बहुचर्चित हुकुमचंद मिल संपत्ति की रजिस्ट्री में बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। करोड़ों रुपए की स्टाम्प ड्यूटी कम जमा कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला अब आधिकारिक रूप से साबित हो गया है। वरिष्ठ जिला पंजीयक ने जांच में स्टाम्प शुल्क की भारी कमी पाई और गृह निर्माण मंडल को बकाया राशि जमा करने का आदेश जारी कर दिया है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि बेचने और खरीदने वाले दोनों ही सरकारी विभाग हैं।
218 करोड़ की रजिस्ट्री देनदारी 421 करोड़
23 मार्च 2025 को नगर निगम ने हुकुमचंद मिल की संपत्ति की रजिस्ट्री मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के पक्ष में की। रजिस्ट्री में संपत्ति का मूल्य मात्र 218 करोड़ रुपए दर्शाया गया। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि हाई कोर्ट द्वारा हुकुमचंद मिल की कुल देनदारियां 421 करोड़ रुपए मानी गई थीं। गृह निर्माण मंडल ने 421 करोड़ की देनदारियां चुकाईं, तो फिर रजिस्ट्री 218 करोड़ की कैसे कर दी गई?
स्टाम्प ड्यूटी कम जमा, अब भरना पड़ेगी पूरी राशि
वरिष्ठ जिला पंजीयक समरथमल राठौड़ ने मामले में प्रकरण दर्ज कर निगम और गृह निर्माण मंडल से जवाब तलब किया। दोनों विभागों के जवाब के परीक्षण के बाद यह पाया कि स्टाम्प शुल्क कम जमा किया गया था। अब आदेश जारी कर गृह निर्माण मंडल को बकाया स्टाम्प ड्यूटी जमा करने, 2% ब्याज तथा पेनल्टी चुकाने के निर्देश दिए गए हैं। अनुमान है कि 26 करोड़ रुपए से अधिक स्टाम्प ड्यूटी की चोरी हुई।
सरकारी विभाग ही बने ‘खेल’ के किरदार
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह कि बेचने वाला नगर निगम और खरीददार गृह निर्माण मंडल दोनों ही सरकारी संस्थाएं हैं। फिर सरकार को करोड़ों का नुकसान कैसे और क्यों होने दिया गया? क्या यह महज लापरवाही है या सुनियोजित वित्तीय अनियमितता?
प्रदेश के इतिहास का अनोखा मामला
राज्य के इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है, जब दो सरकारी विभागों के बीच हुई रजिस्ट्री में ही करोड़ों की स्टाम्प ड्यूटी कम जमा कराई गई। यदि शिकायतकर्ता अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी दस्तावेजों के साथ यह मुद्दा न उठाते, तो करोड़ों के इस घपले का शायद कभी खुलासा नहीं हो पाता।
तकनीकी त्रुटि या सुनियोजित षड्यंत्र? कांग्रेस नेता ने दस्तावेजों के साथ की शिकायत
इस पूरे मामले का खुलासा मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एवं अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने किया। उन्होंने लोकायुक्त पुलिस, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, महानिरीक्षक पंजीयन तथा वरिष्ठ जिला पंजीयक, श्रेणी-3 इंदौर को विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत के साथ हाई कोर्ट का आदेश, संपत्ति का विस्तृत ब्योरा, दस्तावेजी प्रमाण, स्थल चित्र और अन्य साक्ष्य भी संलग्न किए गए थे। जांच में शिकायत सही पाई गई।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
क्या यह मामला आर्थिक अपराध की श्रेणी में दर्ज होगा? और क्या सरकार अपने ही तंत्र के खिलाफ कठोर कदम उठाएगी? हुकुमचंद मिल की यह रजिस्ट्री अब केवल एक संपत्ति का लेन-देन नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बन चुकी है।
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