खबर
टॉप न्यूज

भगवान कहीं भागें नहीं जा रहे: साल के अंत में ही क्यों उमड़ता है अपने ईष्ट देव के प्रति लाड़

' थर्टी फर्स्ट ' के फेर में देश के देवस्थानों पर उमड़ रही जानलेवा भीड़, अनहोनी की आशंका से सहमी देवनगरियां अयोध्या, मथुरा, काशी से महाकाल-ओंकारजी तक भक्तों का सैलाब, जिला प्रशासन के फूले हाथ-पांव भीड़ को

Khulasa First

संवाददाता

30 दिसंबर 2025, 7:53 पूर्वाह्न
15 views
शेयर करें:
भगवान कहीं भागें नहीं जा रहे

' थर्टी फर्स्ट ' के फेर में देश के देवस्थानों पर उमड़ रही जानलेवा भीड़, अनहोनी की आशंका से सहमी देवनगरियां

अयोध्या, मथुरा, काशी से महाकाल-ओंकारजी तक भक्तों का सैलाब, जिला प्रशासन के फूले हाथ-पांव

भीड़ को रोकने के लिए मंदिरों के प्रबंधकों से लेकर पंडे-पुजारी तक कर रहे अपील, अभी न आएं दर्शन करने

साल के अंत पर भगवान की शरण के बढ़ते ' शगल ' से इंदौर भी डरा, खजराना गणेश मंदिर 11 बजे ही बंद होगा

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर
क्या भगवान कहीं भागे जा रहे हैं? आपके ईष्ट देव क्या अपने गर्भगृह व मूल स्थान से विदा हो रहे हैं? साल के अंत में अगर आप दर्शन-पूजन न करेंगे तो देवता रुष्ट हो जाएंगे? साल के अंत में ही अपने-अपने भगवान का पूजन-अर्चन करने का कोई खास विधान है? किसी शास्त्र में लिखा है कि 'थर्टी फर्स्ट' देवता के सान्निध्य व सामीप्य में ही मनाया जाए?

वह भी तब दर्शन तो दूर, देव की एक झलक तक मिलना दुश्वार हो? बावजूद इसके क्यों 'भेड़' जैसे चले जा रही है भीड़ देव नगरी में? ये जानते-बूझते हुए भी कि वहां पांव रखने की जगह नहीं, फ़िर भी बाल बच्चों संग घर से रवाना हुए जा रहे हैं। दृश्य-श्रव्य माध्यम बेतहाशा भीड़ और उससे उपज रही भारी अव्यवस्था को निरंतर दिखा-सुना रही है।

बावजूद इसके भक्त भीड़ बनने पर आमादा क्यों हैं? अब तो संबंधित मंदिरों से अपील जारी हो रही है कि जहां हो, वहीं रुक जाएं। अभी दर्शन को न आएं। बावजूद इसके ऐसे कैसे भक्त और भक्ति कि बढ़ते कदम थम ही नहीं रहे? क्या आपके भगवान कहीं भागे जा रहे हैं?

ये हाल साल के अंत में देशभर का हो गया है, जिसे देखो चला जा रहा है भगवान की शरण में। ये जाने बिन कि वहां हाल क्या है?, रहने-ठहरने के बंदोबस्त हैं भी कि ध्वस्त हो गए? सुरक्षा व्यवस्था है भी कि तार-तार हो गई? फ़िर भी उठाया मुंह और लोग चले जा रहे, बढ़े जा रहे हैं वैष्णोदेवी मंदिरर, मथुरा-वृंदावन, काशी महादेव, राजा राम नरेश की नगरी अयोध्या, राजा महाकाल की नगरी उज्जैन, राजा मांधाता की नगरी ओंकारेश्वर सहित उन तमाम देवस्थानों पर, जो इन दिनों दर्शन से ज़्यादा पर्यटन का हिस्सा हो गए हैं। साल के अंत के दिन इसके लिए मुफीद माने जा रहे हैं। इसके कारण देश की तमाम इन धर्म नगरी के हाल बेहाल हो चले हैं।

संबंधित शहरों के जिला प्रशासन के हाथ-पांव फुले हुए हैं कि भीड़ कैसे संभालें? सुरक्षा के तमाम बंदोबस्त ध्वस्त होते जा रहे हैं। ठहरने, रुकने के स्थान बचे नहीं। कड़कड़ाती ठंड में लोग खुले में रात बिताने को मजबूर हैं। इस आशय के नित्य प्रतिदिन समाचार सामने आ रहे हैं, लेकिन साल के अंत में उमड़ने वाली भक्ति है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही। मथुरा में बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं से न आने का आग्रह कर रहा है। काशी नरेश के बनारस में भीड़ से हाल इस कदर खराब हुए हैं कि शहर का एक बड़ा हिस्सा नो व्हीकल जोन करने के बाद भी हालात संभल नहीं रहे।

ये ही सूरते हाल अयोध्या से लेकर अपने मध्यप्रदेश के उज्जैन व ओंकारेश्वर तक हैं। ओंकारेश्वर मंदिर प्रबंधन ने तो कलेक्टर से वीआईपी दर्शन व लाइन तक पर रोक की सिफारिश कर दी है। वहीं उज्जैन में भी भस्म आरती की रसीद कटना बंद कर दी गई है। यहां अभी से 2 लाख से ज़्यादा श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया है। इंदौर भी इससे अछूता नहीं। यहां के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर के पट रात 11 बजे ही बंद कर दिए जाएंगे ताकि नए साल में शहर के पूर्वी हिस्से के हाल बेहाल न हों।

अपने वाहन से सफर के चलन ने देवस्थानों पर भीड़ बढ़ाने में ज्यादा काम किया है। ट्रेन व रिजर्वेशन की मोहताजी से दूर चार पहिया पर सवार वर्ग सब कुछ जानते बूझते भी धर्म नगरी में चले जा रहे हैं, घुसे जा रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चों व महिलाओं के साथ इन स्थानों पर ज़्यादा भीड़ तथाकथित पढ़े-लिखे तबके की ज्यादा नजर आ रही है। आम हिंदुस्तानी के लिए ' थर्टी फर्स्ट ' कोई त्योहार नहीं। लिहाजा वह साल की विदाई के इस ' भक्तिमय जश्न ' से आमतौर पर आज भी दूर है। वह घर पर ही घंटे-घड़ियाल बजाकर अंग्रेजी नए साल की इस नई-नई शुरू हुई रस्म को पूरी कर रहा है।

साल के अंत में बढ़ती ' भगवान की तलाश ' में अब हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि सभी धर्मस्थलों से ‘न्यू ईयर श्रद्धालुओं’ से न आने की अपील की जा रही हैं। जिला प्रशासन व सरकार अब इस काम में संबंधित मंदिरों के पंडे-पुजारियों से भी अपील जारी करवा रही है। सोशल मीडिया के ज़रिए ये अपील हो रही है कि आप कम से कम 10 जनवरी तक न आएं, लेकिन धार्मिक पर्यटन के शौकीन इस अपील से जानबूझकर बेखबर बना हुआ है। स्वयं के संसाधनों के दम व दंभ में ये वर्ग संबंधित धार्मिक शहरों की व्यवस्था का दम निकाले जा रहे हैं।

धार्मिक पर्यटन के बढ़ते शगल ने देशभर की धर्म नगरियों का दम फुला दिया है। ईयर एंडिंग पर श्रद्धालुओं की ऐसी भीड़ उमड़ रही है कि देवता भी सांस नहीं ले पा रहे हैं। साल के अंत में भगवान की तलाश में भक्त संबंधित देवता के शहर में मारे-मारे फिरने के बावजूद थम नहीं रहे है।

‘थर्टी फर्स्ट भक्ति ‘ भी ऐसी उमड़ रही है कि भक्त सपरिवार, बाल-बच्चों ' की जान जोखिम में डालने से भी नहीं चूक रहे। जगह नहीं, अब न आएं जैसी अपील भी अनसुनी कर लोग अपने अपने ईष्ट की नगरी में 'घुसे' चले जा रहे हैं। न रहने के ठिकाने हैं, न खाने-पीने, ओढ़ने-बिछाने के बंदोबस्त। सुरक्षा व्यवस्था भी तार-तार।

हर वक्त अनहोनी की आशंका मंडरा रही है, लेकिन पर्यटन भक्त थम नहीं रहे। जैसे भगवान बस दिसंबर 2025 के अंत व 2026 के पहले हफ्ते में ही दर्शन देंगे, फिर उठकर चल देंगे। न्यू ईयर भक्ति ऐसी सिर चढ़कर बोल रही है कि भगवान के पट भी वक्त से पहले बंद करना पड़ रहे हैं। अपने इंदौर का प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर इसका उदाहरण है। बप्पा 31 दिसंबर की रात 11 बजे ही सुला दिए जाएंगे।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!