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गंभीर नदी अब जीवनदायिनी नहीं रही, ग्रामीणों के लिए बन रही जहर: सरपंच समस्या पर आंखें मूंदे बैठे

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 जनवरी 2026, 8:26 पूर्वाह्न
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गंभीर नदी अब जीवनदायिनी नहीं रही, ग्रामीणों के लिए बन रही जहर

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
धार रोड स्थित कलारिया गांव से गुजरने वाली गंभीर नदी अब जीवनदायिनी नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए जहर बनती जा रही है। नदी में लगातार गंदा और रासायनिक पानी छोड़े जाने से ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, लेकिन ग्राम पंचायत कलारिया और सरपंच इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो नदी में प्रदूषण रोकने की कोई पहल की गई और न ही हालात सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए गए।

ग्रामीणों के अनुसार नदी के पानी में केमिकल युक्त सफेद झाग साफ दिखाई दे रहा है और उससे तेज व असहनीय दुर्गंध उठ रही है। हालात ऐसे हैं कि मजबूरी में ग्रामीण इसी दूषित पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई, पशुओं को पिलाने और घरेलू कामों में कर रहे हैं।

इसका सीधा असर लोगों की सेहत और आजीविका पर पड़ रहा है। नदी में लगातार मछलियों की मौत हो रही है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन भी बढ़ता जा रहा है।

घाट के रखरखाव में पूरी तरह रहे विफल
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत कलारिया घाट के रखरखाव में पूरी तरह विफल रही है। रखरखाव के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि श्रद्धालुओं और आम जनता से स्वच्छता शुल्क और अन्य टैक्स लगातार वसूले जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि यह पूरा तंत्र भाई-भाई की लूट जैसा बन गया है, जहां जनहित के बजाय निजी लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब करोड़ों रुपए की लागत से घाट का निर्माण हुआ तो फिर उसकी हालत इतनी खराब क्यों है? नदी में छोड़े जा रहे गंदे और रासायनिक पानी पर अब तक रोक क्यों नहीं लगाई गई?

दूषित पानी से कपड़े धोने को मजबूर हैं महिलाएं
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि वे इसी दूषित पानी से कपड़े धोने को मजबूर हैं, जिसके चलते त्वचा संक्रमण, एलर्जी और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वहीं किसान इसी पानी से खेतों से सिंचाई कर रहे हैं, जिससे फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और पशुओं की सेहत पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

ग्राम पंचायत की भूमिका पर भी गंभीर सवाल
इसी बीच ग्राम पंचायत की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छता के नाम पर जनता से रसीद काटकर टैक्स की वसूली तो लगातार की जा रही है, लेकिन जमीन पर हालात बद से बदतर हैं।

क्षेत्रीय विधायक द्वारा करीब 2 करोड़ 35 लाख रुपए की लागत से बनवाया गया गंभीर नदी घाट आज बदहाली का शिकार नजर आ रहा है। घाट की हालत जर्जर है, चारों ओर गंदगी फैली हुई है और साफ-सफाई की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।

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