चार दशक में ‘हंस की चाल’ अब विवादों में घिरी
महिला से छेड़छाड़ के बाद बढ़ी जांच, अनियमित रजिस्ट्रेशन, फर्जी बीमा, अवैध परमिट व परिवहन विभाग की चुप्पी पर सवाल स्लीपर बसें न कानून में हैं, न सुरक्षा मानकों में स्लीपर बस का अवैध संचालन बस का रंग फि
Khulasa First
संवाददाता

महिला से छेड़छाड़ के बाद बढ़ी जांच, अनियमित रजिस्ट्रेशन, फर्जी बीमा, अवैध परमिट व परिवहन विभाग की चुप्पी पर सवाल
स्लीपर बसें न कानून में हैं, न सुरक्षा मानकों में
स्लीपर बस का अवैध संचालन
बस का रंग फिरोजी है
इंदौर आरटीओ द्वारा जब्त बस
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हंस ट्रेवल्स ने चार दशक में अपने धंधे में वाकई हंस की तरह चाल पकड़ी है। 1980 में कमर्शियल बिजनेस ट्रांसपोर्टेशन कंपनी शुरू की थी, जो अब प्राइवेट लिमिटेड है। मध्य प्रदेश और आसपास के 8 राज्यों में 70 से ज्यादा शहरों में 50+ रूट पर बसें संचालित कर रहे हैं, जिसका इंदौर हेडक्वार्टर है।
हाल ही में महिला से छेड़छाड़ के मामले में शहर का नाम बदनाम किया है। फिर भी हंस की चाल थमी नहीं, सड़कों पर अवैध बसों का संचालन जारी है। इसका विरोध हुआ तो परिवहन विभाग ने कार्रवाई की, नहीं तो अधिकारी चुप्पी साधकर बैठे हुए थे।
सूत्र कहते हैं हंस ट्रेवल्स के नाम से संचालित हो रही बसों में कालाधन लगाया गया है, जो सफेदपोश और हाकिमों की अवैध कमाई का है। इतना ही नहीं इस ट्रेवल्स की बसों में अवैध माल भी परिवहन किया जा रहा है। 6 नवंबर को हंस ट्रेवल्स की बस (एआर 11 डी 1919) में मुंबई से इंदौर आ रही युवती से छेड़छाड़ की घटना हुई थी, जिस पर सेंधवा पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इनमें बस के ड्राइवर-कंडक्टर को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी किशोर सिंह फरार है। वहीं पुलिस द्वारा बस भी जब्त कर ली गई।
खुलासा फर्स्ट ने जब संबंधित बस की जानकारी ली तो कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ। वाहन पंजीयन विवरण अनुसार बस (एआर 11 डी 1919) अरुणाचल प्रदेश के लोहित में रजिस्टर्ड है। जिसका मालिक हंस ट्रेवल्स आई प्राइवेट लिमिटेड है। इसे पर्चेस/डिलीवरी 31 मार्च 2025 को किया गया था।
रजिस्ट्रेशन 23 सितंबर 2025 को हुआ। वर्तमान पता सी/ओ क्रिमसो तैयांग चैखीम तैयांग तफरा गाम जिला लोहित, अरुणाचल प्रदेश दिया है, जबकि स्थायी पता 15/3, साउथ तुकोगंज, जिला इंदौर, मध्य प्रदेश है। बस मालिक का मोबाइल नंबर 98262-52888 मान्य नहीं बताया गया। वहीं लंबाई 11745 मिमी ही है।
बस का कलर काला बताया गया है, जबकि सेंधवा पुलिस द्वारा जब्त की गई बस फिरोजी रंग की है। बस का थर्ड पार्टी बीमा 25 सितंबर 2025 को द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से होना बताया गया है, जिसका पॉलिसी नंबर 450201250000002456 है, जो वेरिफाई नहीं हो रहा। बस पटेल मोटर्स इंडिया प्रालि से खरीदी गई।
इसका चेसिस नंबर MC2R6SRTOTC126173 और इंजिन नंबर VEDX5 201389 K6 P दिया गया है। इसकी स्लीपर क्षमता 36 दर्ज है। अब सवाल उठता है कि अरुणाचल प्रदेश की रजिस्टर्ड बस को कौन-सा राज्य परमिट दे रहा? क्योंकि बस मध्य प्रदेश के इंदौर और महाराष्ट्र के मुंबई शहर के बीच चल रही थी।
नियमानुसार जिस राज्य की सीमा में बस अधिक किलोमीटर तय करती है, उसी राज्य का परिवहन विभाग प्राधिकारी परमिट जारी कर सकता है। वहीं बस बॉडी बिल्डर किस राज्य व शहर का है। उदाहरण के लिए यदि बॉडी निर्माण इंदौर शहर में किया तो क्या अरुणाचल प्रदेश जिला लोहित के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी पुष्टि करने के लिए यहां आए थे?
वैसे भी परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार अन्य राज्यों में रजिस्टर्ड बसों को मप्र से संचालन जारी रखना है तो एक वर्ष बाद उस बस को ट्रांसफर और रजिस्टर्ड करना अनिवार्य है। फिर भी शहर से अन्य राज्यों से रजिस्टर्ड सैकड़ों बसों का संचालन किया जा रहा है, जिन्हें चेक कर रोकने की जिम्मेदारी इंदौर आरटीओ प्रदीप शर्मा की है, लेकिन वह सिर्फ कलेक्टर के निर्देश पर ही कार्रवाई करते हैं। वह भी छोटी-छोटी अनियमितता दर्शाकर चालानी कार्रवाई दर्शा देते हैं।
थाना प्रभारी बोले- अभी नहीं मिले बस के कागजात
बस में छेड़छाड़ की घटना की जांच सेंधवा पुलिस कर रही है। थाना प्रभारी ओमप्रकाश चौंगडे से बात करने पर उन्होंने बताया कि बस के ड्राइवर-कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी किशोर सिंह की तलाश जारी है। वहीं जब्त बस से संबंधी कागजात की जानकारी को लेकर सवाल करने पर उन्होंने कहा, इसके लिए मालिक को पत्र लिखा है, फिलहाल कागजात प्राप्त नहीं हुए हैं।
जब्त बसों को लेकर आरटीओ की साठगांठ!
हाल ही इंदौर आरटीओ में हंस ट्रेवल्स की बस में छेड़छाड़ का विरोध होने पर सिर्फ पांच बसों पर कार्रवाई की गई। इसमें दो बसें जब्त की गईं और तीन पर चालानी कार्रवाई कर छोड़ दिया गया, जिनके नंबर और फोटो की जानकारी मांगने पर भी नहीं दी गई।
जब आरटीओ जाकर तफ्तीश की तो वहां एमपी 09 एफए 5702 और डीडी 01 9760 नंबर की बसें खड़ी थीं, जिन्हें जब्त करना बताया गया। हालांकि उक्त बसों की हालत देखकर लगता है कि ये खराब होने के बाद लंबे समय से यार्ड में खड़ी थीं और चलने लायक नहीं हैं। इन्हें कार्यालय परिसर में खड़ी कराकर जब्त दर्शा दिया गया। यह चर्चा पूरे आरटीओ में मौजूद अधिकारी, बाबू और एजेंट कर रहे हैं, जिससे विभाग की साठगांठ का खुलासा होता है।
टैक्स चोरी का खेल भी…
बस का रजिस्ट्रेशन अन्य राज्य में करवाकर गाड़ी मालिक टैक्स की बचत कर लेता है। मान लिया जाए कि मध्य प्रदेश स्पेयर टैक्स 200 रुपए है और अरुणाचल प्रदेश में 120 रुपए, तो सीट की गणना अनुसार टैक्स जमा कराया जाता है। इस तरह जिस राज्य में बस संचालित हो रही है, वहां सरकार का टैक्स चोरी की जा रही है।
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