पूर्व प्रधानमंत्री का निधन: 80 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
खुलासा फर्स्ट, ढाका। पहली महिला प्रधानमंत्री का मंगलवार सुबह करीब 6 बजे निधन हो गया। वे 80 वर्ष की थीं और पिछले 20 दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। बता दें कि, खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, ढाका।
पहली महिला प्रधानमंत्री का मंगलवार सुबह करीब 6 बजे निधन हो गया। वे 80 वर्ष की थीं और पिछले 20 दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। बता दें कि, खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख थी।
परिवार और पार्टी सूत्रों ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की है। उनके जाने से बांग्लादेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।
लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहीं थीं
खालिदा जिया बीते कई वर्षों से सीने के संक्रमण, लीवर और किडनी संबंधी बीमारियों, डायबिटीज, गठिया और आंखों की गंभीर समस्याओं से पीड़ित थीं। स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी।
दो बार संभाला प्रधानमंत्री पद
खालिदा जिया ने बांग्लादेश की राजनीति में एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई। वे 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। वे देश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जियाउर रहमान की पत्नी थीं।
मुक्ति संग्राम से जुड़ा दर्दनाक दौर
उनका राजनीतिक जीवन संघर्षों से भरा रहा। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना ने उन्हें नजरबंद कर लिया था। वे जुलाई से दिसंबर 1971 तक कैद में रहीं। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की हार के बाद उन्हें रिहाई मिली।
टकराव और आंदोलनों से भरी राजनीति
प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनका राजनीतिक सफर विवादों और संघर्षों से घिरा रहा। साल 2015 में ढाका में मेयर चुनाव प्रचार के दौरान उनके काफिले पर गोलीबारी और पत्थरबाजी की घटना हुई थी, हालांकि वे उस हमले में सुरक्षित बच गई थीं।
भारत को लेकर सख्त रुख
खालिदा जिया का भारत के प्रति रुख अक्सर आलोचनात्मक और टकरावपूर्ण रहा। उनका कहना था कि बांग्लादेश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है।
प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने
भारत को बांग्लादेश की जमीन से होकर पूर्वोत्तर राज्यों तक जाने के रास्ते देने का विरोध किया 1972 की भारत-बांग्लादेश मैत्री संधि को आगे बढ़ाने पर भी आपत्ति जताई थी।
उनका मानना था कि इन कदमों से बांग्लादेश की स्वतंत्र नीति कमजोर हो सकती है। वर्ष 2018 की एक रैली में उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश को कभी भी “भारत का राज्य” नहीं बनने दिया जाएगा।
एक युग का अंत
खालिदा जिया का निधन न सिर्फ BNP बल्कि पूरे बांग्लादेश की राजनीति के लिए एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
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