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पूर्व बीजेपी विधायक की बढ़ी मुश्किलें: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर लगाई रोक; पीड़िता बोली- फांसी दिलाऊंगी

खुलासा फर्स्ट, उन्नाव। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व बीजेपी विधायक को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की जमानत को फिलहाल स्थगित करते हुए

Khulasa First

संवाददाता

29 दिसंबर 2025, 9:55 पूर्वाह्न
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पूर्व बीजेपी विधायक की बढ़ी मुश्किलें

खुलासा फर्स्ट, उन्नाव।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व बीजेपी विधायक को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की जमानत को फिलहाल स्थगित करते हुए नोटिस जारी किया है और मामले में जवाब मांगा है। अब इस केस की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

CBI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 23 दिसंबर को दी गई जमानत के खिलाफ CBI ने तीन दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सोमवार को इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई की। करीब 40 मिनट तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।

CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि हाईकोर्ट के जिन जजों ने सजा निलंबन का आदेश दिया, वे देश के बेहतरीन न्यायाधीशों में गिने जाते हैं, लेकिन गलती किसी से भी हो सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आमतौर पर बिना आरोपी को सुने जमानत पर रोक नहीं लगाई जाती, लेकिन इस मामले की परिस्थितियां अलग हैं क्योंकि आरोपी अन्य मामलों में पहले से दोषी ठहराया जा चुका है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 23 दिसंबर के आदेश पर रोक लगा दी।

सरकार की ओर से कड़ी दलील
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह धारा 376 और POCSO एक्ट से जुड़ा है। इन धाराओं में न्यूनतम सजा 20 साल की कैद है, जो आजीवन कारावास तक जा सकती है। ऐसे मामलों में जमानत पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

कोर्ट के सामने उठे 2 बड़े कानूनी सवाल
POCSO कानून के तहत एक पुलिस कॉन्स्टेबल को लोक सेवक माना जाए, लेकिन किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि जैसे विधायक या सांसद को इस दायरे से बाहर कर दिया जाए। अदालत को यह असमानता परेशान कर रही है।'

जस्टिस जेके माहेश्वरी ने सवाल उठाया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह साफतौर पर कहा भी है या नहीं कि आरोपी धारा 376(2)(i) के तहत दोषी है या नहीं। इस पर वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कहा कि किसी कानून में दूसरे कानून से परिभाषा उधार लेकर लागू नहीं की जा सकती।

पीड़िता हुई भावुक
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही पीड़िता भावुक हो गई और फूट-फूटकर रोने लगी। इस दौरान एक्टिविस्ट योगिता भैयाना और अन्य महिलाओं ने उसे संभाला। बाद में पीड़िता ने कहा— “मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। 

मुझे सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद है। मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगी। जब तक हमारे परिवार को पूरा इंसाफ नहीं मिलेगा, मैं पीछे नहीं हटूंगी।”

आगे क्या होगा
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में विस्तृत सुनवाई करेगा और जमानत पर अंतिम फैसला चार हफ्तों बाद सुनाया जाएगा।

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