दूषित पानी कांड के बाद सरकार सख्त: रेसीडेंसी कोठी पर हुई हाई लेवल बैठक; नए बोरिंग पर लगी रोक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से सामने आई गंभीर घटना के बाद प्रशासन और राज्य सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। इसी कड़ी में सोमवार को रेसीडेंसी कोठी में उच्चस्तरीय बैठक की गई, जिसमें शहर की जल व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गहन मंथन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता ACS ने की। इसमें संभाग आयुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और शहर के सभी विधायक मौजूद रहे।
नर्मदा जल लाइन का 30% काम पूरा
बैठक के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि भगीरथपुरा की स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इंदौर में लगातार हो रही बोरिंग के कारण भूजल प्रदूषित हो रहा है, इसी वजह से अब शहर में नए बोरिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा।
मंत्री विजयवर्गीय ने जानकारी दी कि भगीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा जल लाइन का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें अब तक करीब 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। फिलहाल पाइपलाइन की टेस्टिंग की जा रही है और अगले 2 से 3 दिनों में शुद्ध नर्मदा जल की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
टैंकर से जारी रहेगी पानी की सप्लाई
उन्होंने स्पष्ट किया कि भगीरथपुरा क्षेत्र के अधिकांश बोरिंग का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। ऐसे में जब तक नर्मदा जल लाइन पूरी तरह चालू नहीं होती, तब तक प्रभावित इलाकों में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति जारी रहेगी, ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो।
अब सभी पानी की टंकियों की नियमित जांच
दूषित पानी कांड से सबक लेते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब इंदौर शहर की सभी पानी की टंकियों के जल की नियमित जांच कराई जाएगी।
सिस्टम को और मजबूत करने पर सहमति बनी
इसकी जिम्मेदारी नगर निगम और संबंधित विभागों को सौंपी गई है, जिससे पानी की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा सके। बैठक में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से चर्चा हुई और सिस्टम को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
नगर निगम में भर्ती
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नगर निगम में कर्मचारियों की कमी को जल्द दूर किया जाएगा। इसके लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं और तीन से चार महीने के भीतर भर्ती पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है।
जनता की सेहत से समझौता नहीं
बैठक के बाद साफ संकेत दिए गए हैं कि भविष्य में जनता की सेहत से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। पानी की गुणवत्ता में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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