पांच नए मरीज, चार अब भी वेंटिलेटर पर: भागीरथपुरा में थमी नहीं महामारी; हरकत में आया प्रशासन
KHULASA FIRST
संवाददाता

तीन दिन में 16 हजार से अधिक रहवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण
गलियों में नहीं पहुंच रहे टैंकर
ग्रामीणों ने जताया खुलासा फर्स्ट का आभार
भागीरथपुरा में उपचार की नई किरण, अभियान स्वास्थ्यवर्द्धन
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैले हैजे का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कल एक बार फिर पांच नए मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जिनमें उल्टी-दस्त की गंभीर शिकायतें दर्ज की गईं। भले ही इन मरीजों को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन हालात बता रहे हैं बीमारी की चेन टूटी नहीं है।
सबसे चिंताजनक स्थिति उन चार मरीजों की है, जो करीब दस दिन से वेंटिलेटर पर हैं। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत में अब तक कोई खास सुधार नहीं हो पाया है। ये आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि मामला एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा का रूप ले चुका है।
16 हजार से ज्यादा लोगों की जांच
कल स्वास्थ्य विभाग की 187 सदस्यीय टीम ने घर-घर सर्वे किया और महिलाओं और बच्चों की विशेष जांच की। रक्तचाप, शुगर और एनीमिया जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग की गई। तीन दिन में कुल 16,208 नागरिकों की जांच की जा चुकी है।
इनमें से 278 में उच्च रक्तचाप और 161 में मधुमेह की समस्या सामने आई, जिनमें से अधिकांश को पहले अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें हेल्थ कार्ड देकर जांच और इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा।
ओपीडी में 109 मरीज, 5 डायरिया पीड़ित
अधिकारियों के अनुसार कल ओपीडी में 109 मरीज पहुंचे, जिनमें से पांच डायरिया की शिकायत लेकर आए थे। आशा कार्यकर्ताओं ने सख्त हिदायत दी कि पानी उबालकर ही पीएं और जिनका इलाज चल रहा है वे दवाइयों का कोर्स पूरा करें।
33 मरीज भर्ती, 8 आईसीयू में
शासकीय और निजी अस्पतालों में 33 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से आठ आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है अभियान स्वास्थ्यवर्धन के अंतर्गत उपचार, परामर्श और जांच लगातार जारी है। रहवासियों का कहना है हेल्थ कार्ड के जरिए स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों की जानकारी मिल रही है, साथ ही बताया जा रहा है कैसी जीवनशैली अपनाकर स्वयं, परिवार और समाज को स्वस्थ रखा जा सकता है।
एक बोरिंग, एक लाख की आबादी और दूषित पानी
पूरे आंबाचंदन की जलापूर्ति एक ही बोरिंग के भरोसे थी। वह भी इतना गंदा और दूषित था कि किसी का मन नहीं करता था उसका पानी पिएं या रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल करे। बावजूद ग्रामीण विवश थे। स्थिति तब और भयावह हो गई, जब पाटीदार मोहल्ले के सचिन पाटीदार ने बोरिंग वाले प्लॉट पर कब्जा कर लिया और वहां अपने जानवरों का मलमूत्र जमा करना शुरू कर दिया। इससे पानी और ज्यादा प्रदूषित हो गया, लेकिन ग्रामीण चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए।
शिकायतें होती रहीं, कार्रवाई नहीं हुई
ग्रामीणों ने कई बार सरपंच, सचिव से शिकायत की लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। पाटीदार समाज के इस गांव में कुछ कथित रंगबाज और छुटभैये नेताओं की शह पर ग्रामीणों को पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित किया जाता रहा। हालात यह हो गए थे कि लोग बीमार पड़ रहे थे, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा।
खुलासा फर्स्ट बना ग्रामीणों की आवाज
ग्रामीणों का कहना है खुलासा फर्स्ट यह मुद्दा नहीं उठाता, तो शायद आज भी वे गंदा पानी पीने को मजबूर होते। एक स्वर में कहा हम गांव के लोग हैं, हमारी आवाज कोई नहीं सुनता। लेकिन खुलासा फर्स्ट ने हमें सुना, जगह दी और हमारी पीड़ा को प्रशासन तक पहुंचाया।
अब उम्मीद कर रहे हैं कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान निकले। यह खबर अब सिर्फ पानी नहीं, उस भरोसे की है, जो ग्रामीणों ने खुलासा फर्स्ट पर जताया है कि जब सब चुप हो जाते हैं, तब खुलासा फर्स्ट बोलता है।
मुआवजे को लेकर भागीरथपुरा के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?
भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले में अभी तक 23 लोग जान गंवा चुके हैं और कई अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। दूषित जल से मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा तो सरकार हरकत में आई और मुआवजे की घोषणा कर पीड़ितों के घावों पर मल्हम लगाने की कोशिश की, लेकिन भागीरथपुरा में हो रही मौतों को सरकार ने काफी हलके में लिया और सिर्फ 2 लाख रुपए का मुआवजा मृतकों के परिजन को दिया जा रहा है। इससे अब इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस मुश्किल वक्त में इंदौर के साथ मुआवजे को लेकर सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
पिछले 5 साल के आंकड़ों पर यदि हम गौर करें तो प्रदेश में कहीं भी कोई हादसा हुआ तो सरकार ने मृतकों के परिजन को कम से कम 4 लाख की आर्थिक राशि प्रदान की है। 8 नवंबर 2021 को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 4 नवजात की मौत के मामले में 4 लाख रुपए, 24 फरवरी 2023 को सीधी बस हादसे में 10 लाख, 30 मार्च 2023 को इंदौर में बावड़ी की छत गिरने पर 5 लाख, 9 मई 2023 खरगोन बस हादसे में 4 लाख, 27 सितंबर 2023 गुना बस हादसे मे 4 लाख, 6 फरवरी 2024 पटाखा फैक्ट्री हरदा हादसे में 4 लाख, 4 अगस्त 2024 सागर में मंदिर की दीवार गिरने के हादसे में 4 लाख, 30 अगस्त 2025 को एमवाय अस्पताल इंदौर में दो नवजात की चूहों के कुतरने से मौत पर 5 लाख और 15 सितंबर 2025 को इंदौर में ही बड़ा गणपति चौराहा पर ट्रक हादसे में 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मृतकों के परिजन को दी गई।
लेकिन भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से इतनी मौतें होने के बावजूद मृतकों के परिजन को आर्थिक सहायता के नाम पर केवल 2 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। ऐसे संवेदनशील मामले में मुआवजे की राशि को लेकर लोग सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं।
कलेक्टर के निर्देशन में 187 सदस्यीय टीम घर-घर जाकर ले रही लोगों की कुशलक्षेम
भागीरथपुरा में अभियान स्वास्थ्यवर्द्धन के जरिये उम्मीद और उपचार की एक नई किरण दिखाई दे रही है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की 187 सदस्यीय टीम ने मंगलवार को पूरे क्षेत्र में मोर्चा संभाला।
टीम के सदस्य घर-घर पहुंचकर न केवल रहवासियों की सेहत का हाल जान रहे, बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ रक्तचाप, शुगर और एनीमिया जैसी गंभीर जांचें भी मौके पर ही सुनिश्चित की जा रही हैं।
पिछले तीन दिन में 16,208 नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। 278 व्यक्तियों में उच्च रक्तचाप और 161 में मधुमेह की पहचान कर उन्हें तत्काल हेल्थ कार्ड प्रदान किए गए, ताकि वे समय रहते उचित परामर्श और उपचार प्राप्त कर सकें।
प्रशासन ने भागीरथपुरा में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ओपीडी सेवाओं के साथ 24 घंटे चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित की और आपात स्थिति के लिए दो एम्बुलेंस मुस्तैद रखी गई हैं। मंगलवार को ओपीडी में आए 109 मरीजों में से 5 डायरिया के पाए गए, जिन्हें स्थानीय स्तर पर ही उपचार दिया गया और किसी को भी रैफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। इस अभियान की सबसे खास बात हेल्थ कार्ड का वितरण है, जिसने नागरिकों को अपने स्वास्थ्य सूचकांकों के प्रति न केवल जागरूक किया, बल्कि उनमें सुरक्षा का भाव भी जगाया है।
घर-घर जाकर लोगों को कर रहे जागरूक
आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को पानी उबालकर पीने और दवाओं का कोर्स पूरा करने जैसी महत्वपूर्ण जीवनशैली संबंधी समझाइश दे रही हैं। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में कुल 33 मरीज उपचाराधीन हैं, जिनमें से आईसीयू में भर्ती 8 मरीजों की स्थिति पर विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा निरंतर निगरानी रखी जा रही है। इस सघन अभियान ने न केवल बीमारियों की पहचान की, बल्कि पूरे समुदाय को एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर अग्रसर करने का एक मजबूत आधार भी तैयार किया है।
जल सुनवाई में शिकायत: बेतरतीब खुदाई से गहराया संकट
नगर निगम अफसरों की लापरवाही से भागीरथपुरा में ड्रेनेजयुक्त पानी सप्लाय होने से अब तक 23 लोगों की मौत हो गई है जबकि सैकड़ों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। जानलेवा बीमारी फैलने पर निगम ने पाइपलाइन की जगह टैंकरो से पानी सप्लाय शुरु किया।
लेकिन अब नई पाइपलाइन के लिए सडक़ें बेतरतीब खोद दी गईं। इससे टैंकरों का घर-घर पहुंचना भी बंद हो गया। मौजूदा में पूरे भागीरथपुरा में जलसंकट गहरा गया है।
नगर निगम की अफसरशाही के चलते विकास के नाम पर कार्य बिना प्लानिग के ही शुरु कर दिए जाते है। खामियाजा शहरवासियो को भुगतना पड़ता है। ऐसी ही बिना प्लानिग की कार्ययोजना भागीरथपुरा में भी शुरु हो गई है। टैंकरो से सप्लाई शुरु हुई तो लोग पानी भरने के लिए परेशान हुए लेकिन जैसे-तैसे हालात से समझौता किया।
लेकिन अब हालात बदतर हो रहे हैं। रहवासियों का कहना है शुरुआत में टैंकरों से दो-चार बाल्टी पानी मिल जाता था लेकिन अब तो टैंकर ही घर तक नहीं पहुंच पा रहे है। पूरे क्षेत्र में नई ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाने के लिए सडक़ें खोद दी गई है।
समाधान बना परेशानी
भागीरथपुरा के रहवासियों का कहना है पाइपलाइन बदलने और सडक़ खुदाई के कारण जल संकट बढ़ गया है। टैंकर समय पर नहीं आ रहे हैं। इधर, निगम अधिकारियों ने बताया ज्यादातर गलियों में नई पाइपलाइन बिछ चुकी है और टेस्टिंग के बाद सडक़ को समतल किया जाएगा।
इस कार्य में समय लगेगा। जब तक सडक़े समतल नहीं होती टैंकर नहीं पहुंच सकेंगे। तब तक रहवासी पानी कहां से लेगे इसकी निगम अफसरो ने कोई प्लानिग नहीं की है। बिना प्लानिग के ही सडक़े खोदकर पूरे क्षेत्र में पानी का संकट बढ़ा दिया।
मंगलवार को पानी की टंकी पर हुई जल सुनवाई में टैंकर नहीं पहुंचने की शिकायतें दर्ज हुई। मंगलवार को निगम अफसर एक जगह नई लाइन की टेस्टिंग के लिए गए थे, लेकिन दूसरी गली में चल रही खुदाई के कारण उसे टालना पड़ा।
मरीजों की जांच जारी: सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी ने बताया घर-घर खून, ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच की जा रही है। अभी भी नए मरीज सामने आ रहे हैं। कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से आठ आईसीयू में। पूरे क्षेत्र में संक्रमण से हैजा और डायरिया जैसी बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
शहरभर से आई गंदे पानी की 309 शिकायतें
शहरवासियों की समस्या जानने के लिए निगम ने जल सुनवाई शुरु की है। मंगलवार को करीब 309 शिकायतकर्ताओं ने गंदे पानी, कम प्रेशर की शिकायतें दर्ज कराई है। इस तरह एक ही दिन में निगम के पास पानी की शिकायतों का ढ़ेर लग गया।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार शहर में संचालित स्वच्छ जल अभियान के तहत नागरिकों की जलप्रदाय से संबंधित समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए सभी 85 वार्डों में पेयजल टंकियों पर मंगलवार को जल सुनवाई की गई।
नागरिकों ने 309 से अधिक जलप्रदाय संबंधी शिकायतें दर्ज कराई। इनमें गंदा पानी, आपूर्ति में अनियमितता, कम दबाव से जलप्रदाय, लीकेज, पाइपलाइन मरम्मत, समय पर पानी नहीं मिलना आदि शामिल है।
यहां हुई सुनवाई: सुनवाई के लिए उपयंत्री मौजूद रहे। जिंसी, किला मैदान, बाणगंगा लक्ष्मीबाई स्टेशन, स्कीम नंबर 155, छत्रीबाग, मच्छी बाजार कडाव घाट, जयरामपुर, राज मोहल्ला, गांधी हॉल, सदर बाजार, भागीरथपुरा, महाराणा प्रताप नगर, संगम नगर, सुखलिया, नंदा नगर, खजराना, अन्नपूर्णा, बॉम्बे हॉस्पिटल, समर पार्क सहित अन्य टंकियों पर जल सुनवाई की गई।
आयुक्त के निर्देश: बताया जाता है कि जल सुनवाई में प्राप्त सभी आवेदनों को मौके पर ही संकलित कर संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को त्वरित निराकरण के लिए प्रेषित किया गया।
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए है शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समय-सीमा में निराकरण किया जाए।
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