सबसे पहले रेस्क्यू मजदूरों ने शुरू किया: श्रेय की होड़ नहीं; तीसरे दिन खत्म हुआ बचाव अभियान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
30 अप्रैल की शाम तेज हवा और लहरों के बीच जब क्रूज डूबने लगा, उस वक्त मौके पर कोई रेस्क्यू टीम मौजूद नहीं थी। सबसे पहले पास में काम कर रहे मजदूरों और मैदानी कर्मचारियों ने हालात संभाले। इन्होंने बिना देर किए डेम में छलांग लगाई और डूबते
लोगों को निकालना शुरू किया।
इस शुरुआती कोशिश ने 28 लोगों की जान बचा ली। 22 मैदानी कर्मियों ने ऑपरेशन में हिस्सा लिया। हादसे की जगह से 300 मीटर दूर जल निगम के इंटेकवेल पर मजदूर थे। क्रूज को डगमगाते देख इन कर्मियों ने दूसरी तरफ खड़ी नाव को बुलाया।
उससे एक-एक कर पर्यटकों को पकड़कर किनारे तक पहुंचाना शुरू किया। इनमें जल निगम के सागर गुप्ता, बृंदकुमार यादव, अरविंद यादव, राजेश सहनी, रमजान, इब्राहिम और नमन समेत एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारी शामिल थे। बाद में फिशरीज और पर्यटन विभाग के कर्मचारी भी जुड़ते गए और यह टीम तीन दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी रही।
शाम करीब 7 बजे एसडीआरएफ की टीम पहुंची, तब तक ये मजदूर कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल चुके थे। इसके बाद भी उन्होंने रेस्क्यू टीमों के साथ मिलकर काम जारी रखा। खास बात यह इनमें से किसी ने अपने योगदान का श्रेय लेने की कोशिश नहीं की।
प्रशासन के रिकॉर्ड में इनकी भूमिका का विस्तृत उल्लेख नहीं है, जबकि ग्राउंड पर यही सबसे पहले और आखिर तक सक्रिय रहे। 42 डिग्री की तेज धूप में लगातार काम करने वाले इन कर्मियों से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात कर उनके साहस की सराहना की।
इलाज से पहले ही 4700 का बिल थमाया
चश्मदीद वाराणसी की सविता वर्मा ने अस्पताल व्यवस्था पर सवाल उठाए। सविता के अनुसार, अस्पताल में प्राथमिक इलाज भी सीमित रहा। उन्होंने बताया, एक व्यक्ति को चार टांके लगाए गए, कुछ को इंजेक्शन दिए गए, लेकिन न तो विस्तृत इलाज हुआ और न ही दवाइयां दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि इलाज से पहले ही ₹4700 का बिल थमा दिया गया।
बैन क्रूज चलवाने वाले अधिकारी पर हो कार्रवाई: युकां
युवा कांग्रेस ने राज्य सरकार, प्रशासन और क्रूज ऑपरेटर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि येलो अलर्ट जारी होने के बावजूद क्रूज को चलाने की अनुमति देना बड़ी लापरवाही है। घनघोरिया ने बताया क्रूज लगभग 20 साल पुराना और एनजीटी द्वारा प्रतिबंधित था।
इसके बावजूद यह क्रूज किसके आदेश पर संचालित था। युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया हादसे के समय मौके पर पर्याप्त सुरक्षा संसाधन जैसे लाइफ जैकेट या लाइफ बोट की उचित व्यवस्था नहीं थी। होते तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। आम जनता पर हेलमेट जैसे नियमों को लेकर सख्ती बरती जाती है, लेकिन ऐसी बड़ी घटनाओं में सुरक्षा व्यवस्थाओं को नजरअंदाज किया जाता है। '
इससे पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगता है। युवा कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई करने और पर्यटन मंत्री से इस्तीफा लेने की मांग की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच, पीड़ित परिवारों को कम से कम एक करोड़ रुपए मुआवजे और प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
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