एफआईआर पर फिर से एफआईआर: एक देश, दो कानून? ‘शुभ-लाभ’ के नाम पर अंदरखाने का घोटाला!
महिला थाने का खेल… खुलासा फर्स्ट…इंदौर । महिला थाने में जो खेल वर्षों से खेला जा रहा है, उससे न तो फरियादी अनजान हैं और न ही आरोपी। सभी जानते हैं कि बंद चैनल गेट के भीतर कौन-सी फाइल कैसे घूमती है और क
Khulasa First
संवाददाता

महिला थाने का खेल…
खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
महिला थाने में जो खेल वर्षों से खेला जा रहा है, उससे न तो फरियादी अनजान हैं और न ही आरोपी। सभी जानते हैं कि बंद चैनल गेट के भीतर कौन-सी फाइल कैसे घूमती है और किसके इशारे पर किसका पक्ष पलट दिया जाता है। पहले कोई भी आसानी से थाने में अपनी शिकायत लेकर पहुंच जाता था, लेकिन अब महिला थाने का नाम लेकर स्टाफ जिस तरह अंदरूनी सौदेबाजी और संदिग्ध खेल में मशगूल है, उसकी मिसाल पूरे शहर में नहीं मिलती। महिलाओं के लिए बने कानूनों का संरक्षण देने की आड़ में यहां जो खेल खेले जा रहे हैं उन पर जितना कहा या लिखा जाए, कम होगा।
लुटेरी दुल्हन गिरोह पर मामला दर्ज, फिर भी फरियादी पर केस
लुटेरी दुल्हन गिरोह का खुलासा होते ही गिरोह से जुड़े कई लोग बौखला उठे और फोन पर धमकियां दी जाने लगीं। रिपोर्ट प्रकाशित होते ही खुद को दुल्हन शिवानी की बहन बताने वाली उषा ने खुलासा फर्स्ट के रिपोर्टर को धमकाया, वहीं दलाल प्रदीप जैन के रिश्तेदार ने भी महिला एफआईआर के नाम पर दबाव बनाने की कोशिश की। पूरे मामले में दलाल प्रदीप के खाते में 50 हजार रुपए का ट्रांजेक्शन भी मिला, जिसे शादी के बाद ‘दलाली’ के रूप में बताया गया।
असली खेल तब शुरू हुआ, जब विवाद बढ़ते ही शिवानी की पहचान, उसकी वास्तविक पृष्ठभूमि और उसका गिरोह सामने आने लगा। आरोप है कि उषा और विजय नामक व्यक्ति खुद को दुल्हन का परिवार बताकर पहले फरियादी तरुण जैन को झूठी जानकारी देते हैं, लड़की को जैन समाज की बताकर शादी करवाते हैं और शादी के बाद 12 लाख नकद व सोने-चांदी के आभूषण झपट लेते हैं। जब सच्चाई का खुलासा हुआ तो वही लोग तरुण से 10 लाख रुपए अतिरिक्त मांग रहे हैं। इस पूरे खेल की सबसे घिनौनी कड़ी है महिला थाना इंदौर का हस्तक्षेप। आरोप है कि महिला थाने में लुटेरी दुल्हन से साठगांठ कर फरियादी पर ही प्रकरण दर्ज कर दिया गया।
अगले अंक में…
लुटेरी दुल्हन गिरोह में तांत्रिक की एंट्री का सनसनीखेज खुलासा
बैंगलुरु पुलिस ढूंढ़ रही, लेकिन आरोपी इंदौर के महिला थाने के ‘संपर्क में’
बैंगलुरु (मांड्या) पुलिस ने 6 जनवरी 2025 को शिवानी राठौर (24), शोभा राठौर (65), विकास राठौर (30) और दलाल प्रदीप जैन (50) पर आधिकारिक रूप से प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। फरियादी तरुण जैन द्वारा दिए गए ज्वेलरी बिल, लेन-देन, दस्तावेज और बयान के आधार पर पुलिस आरोपियों की तलाश में इंदौर आई, लेकिन निपानिया स्थित 308-A गोयल एवेन्यू का पूरा घर खाली मिला। सभी आरोपी फरार हो गए। हैरानी की बात यह कि जब बैंगलुरु पुलिस इंदौर आकर आरोपियों की गिरफ्तारी का प्रयास करती है, तो आरोपी हवा हो जाते हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद वही शिवानी राठौर महिला थाने में शिकायत दर्ज करवाती है और मामला तत्काल दर्ज भी हो जाता है!
19 मई 2025 को महिला थाना इंदौर ने बिना किसी क्रॉस चेक के बिना दूसरे राज्य की एफआईआर का संज्ञान लिए तुरंत केस दर्ज कर फरियादी को इंदौर बुलाया, फिर गिरफ्तारी की धमकी देकर मोटी रकम लेकर मामला ‘कैसे निपटाना है’, इसकी कथित गाइडलाइन भी दी गई। यह अपने आप में कानून की पूरी मशीनरी पर सवाल खड़ा करती है। क्या सचमुच एक देश के दो राज्यों में दो कानून चल रहे हैं? या फिर ‘शुभ-लाभ’ का खेल कानून पर भारी पड़ रहा है?
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