सेशन कोर्ट में फर्जी फैसला कांड पर जोरदार बहस: रावत, वर्मा को जेल या बेल पर फैसला कल
खुलासा फर्स्ट…इंदौर ब्राह्मण बेटियों पर असभ्य बयान देने वाले आईएएस संतोष वर्मा के पक्ष में फर्जी फैसला देने के आरोप में फंसे तत्कालीन स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत की अग्रिम जमानत अर्जी पर बुधवार को सेश
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट…इंदौर
ब्राह्मण बेटियों पर असभ्य बयान देने वाले आईएएस संतोष वर्मा के पक्ष में फर्जी फैसला देने के आरोप में फंसे तत्कालीन स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत की अग्रिम जमानत अर्जी पर बुधवार को सेशन कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। एसीपी विनोद दीक्षित की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। जमानत पर अंतिम निर्णय शुक्रवार को सुनाया जाएगा।
एसीपी विनोद दीक्षित ने कोर्ट में रावत और आईएएस संतोष वर्मा के बीच मिलीभगत का आरोप दोहराया। उन्होंने बताया जिस फैसले के आधार पर वर्मा ने आईएएस अवॉर्ड हासिल किया, वह रावत की कोर्ट में सुबह 4 से 7 बजे के बीच टाइप हुआ था। रावत की मोबाइल टावर लोकेशन उसी समय जिला कोर्ट परिसर की पाई गई। एसीपी ने यह भी याद दिलाया कि फर्जी आदेश के खुलासे के बाद विजेंद्र रावत ने ही 2021 में एमजी रोड थाने में संतोष वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में परत-दर-परत सच सामने आ रहा है।
फैसला छुट्टी के दिन टाइप हुआ, मेरे कोर्ट का नहीं
रावत की ओर से पूर्व न्यायाधीश विष्णुकुमार सोनी ने पक्ष रखते हुए कहा विवादित आदेश पर भले ही 6 अक्टूबर 2020 की तारीख है लेकिन उस दिन रावत छुट्टी पर थे। उनका कहना है फैसला पूरी तरह फर्जी है,यह रावत की कोर्ट से नहीं हुआ। उन्हें फंसाया जा रहा है।
कंप्यूटर हार्ड डिस्क ने किया खुलासा
लोक अभियोजक अभिजीतसिंह राठौर ने कोर्ट को बताया विवादित आदेश की तारीख 6 अक्टूबर है मगर यह फैसले 5 और 7 अक्टूबर को टाइप किए गए थे। रावत की कोर्ट के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क जांच में यह तथ्य स्पष्ट हुआ। दोनों दिन टाइपिंग का समय तड़के 4 से 7 बजे के बीच सामने आया।रावत की ओर से कहा गया उनकी पत्नी का निधन हो चुका है, दो बच्चे हैं, कहीं भागने वाले नहीं हैं इसलिए अग्रिम जमानत दी जाए। इस तर्क और अभियोजन पक्ष की आपत्तियों को सुनकर सत्र न्यायाधीश प्रकाश कसेर ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
एक और सीनियर जज पर भी शक की सूई
इस मामले में एक अन्य वरिष्ठ जज भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है संतोष वर्मा की दोस्ती पहले इसी जज से हुई, उसी माध्यम से वर्मा की मुलाकात रावत से कराई गई। दोनों जजों की पत्नियां गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं, इलाज के सिलसिले से शुरू हुई जान–पहचान बाद में फैसले तक पहुंच गई। कल साफ होगा रावत को गिरफ्तारी से राहत मिलेगी या नहीं।
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