सात रेंज में मिले 93 तेंदुओं के साक्ष्य: धार जिले के सवा लाख हेक्टेयर वनक्षेत्र में 750 वन्यप्राणियों का अस्तित्व
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, धार।
जिले के सात वन रेंज में वन्यजीव गणना में 750 से अधिक वन्यजीवों की मौजूदगी मिली है। सात रेंज में डेढ़ माह में चार चरणों में पारंपरिक मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों की गणना की गई। लगभग 200कर्मचारियों ने जमीनीस्तर पर सर्वे किया।
7 परिक्षेत्रों की 78 बीटों में वन कर्मचारियों को लगाया गया था। सातों रेंज में सबसे अधिक तेंदुए की सक्रियता पाई गई। मांडू, बाग, सरदारपुर, कुक्षी, धार, धामनोद, टांडा रेंज की बीटों में तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार यह क्षेत्र अब भी बड़े वन क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण जगल है। कर्मचारियों ने पैदल भ्रमणकर जंगल नापा।
पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सुखद संकेत
अधिकांश जंगल अतिक्रमण के साए में है। विभाग के रिकॉर्ड में सवा लाख हेक्टेयर वनक्षेत्र है। अखिल भारतीय बाघ आंकलन 25-26 के चार चरण के तहत धार वन मंडल में डीएफओ विजयनंथम टीआर के मार्गदर्शन में चले सर्वे के प्रारंभिक आंकड़े जिले के पारिस्थितिक तंत्र के लिए सुखद संकेत हैं।
जमीनी स्तर पर पड़ताल
वन विभाग ने क्रमबद्ध तरीके से चार चरणों में गणना की, जिसमें प्रथम चरण में 18 से 24 दिसंबर धार, धामनोद और मांडव, दूसरे चरण में 5 से 12 जनवरी सरदारपुर और टांडा व तृतीय चरण 18 से 24 जनवरी में बाग और कुक्षी रेंज शामिल थे। कुल 7 परिक्षेत्रों की 78 बीटों में 196 से अधिक वनकर्मियों ने दिन-रात एक कर वन्यजीवों के पदचिन्हों, मचानों से प्रत्यक्ष दर्शन और डिजिटल एप्स के माध्यम से डेटा जुटाया।
मांसाहारी जीवों का दबदबा
सर्वे में सबसे उत्साहजनक आंकड़े तेंदुओं को लेकर आए हैं। 93 तेंदुओं के साक्ष्य मिले हैं। 2022 की गणना में करीब 150 तेंदुओं की पुष्टि हुई थी। नर्मदा पट्टी के कुक्षी, बाग और मनावर धामनोद क्षेत्रों में तेंदुओं की सक्रियता और शावकों के साथ उनकी मौजूदगी ने इस संख्या के बढ़ने की प्रबल संभावना जगा दी है।
267 अन्य मांसाहारी जीवों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिनमें लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी, जंगली बिल्ली और बिज्जू शामिल हैं। गणना में 149 नीलगाय, 50 मोर, 23 बंदर और 19 खरगोशों के साक्ष्य भी मिले हैं।
डिजिटल तकनीक और मचान का सहारा
पुरानी परंपराओं और आधुनिक तकनीक के संगम से हुई गणना में वनकर्मियों ने मोबाइल एप्स का भरपूर उपयोग किया। दुर्गम क्षेत्रों में मचान बनाकर वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी। सवा लाख हेक्टेयर क्षेत्र की इस निगरानी का उद्देश्य न केवल संख्या जानना था, बल्कि यह भी समझना भी कि वन्यजीवों के रहने योग्य वातावरण में क्या सुधार की आवश्यकता है।
फेज-1 में जमीनी सर्वे-बाघ, तेंदू, शिकार प्रजातियों और आवास की स्थिति का आकलन। फेज-2 में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस वन क्षेत्र, कॉरिडोर और विखंडन का मानचित्रण। फेज-3 में कैमरा ट्रैपिंग कैमरा ट्रैप के जरिए कैप्चर-रिकैप्चर विश्लेषण।
फेज-4 में राष्ट्रीय सांख्यिकीय विश्लेषण सभी राज्यों के आंकड़ों का समेकन कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की गई। पहले वन्यजीवों की आवाजाही, शिकार की उपलब्धता और आवास की स्थिति की तस्वीर सामने आई।
विष्ठा और पगमार्क सैंपल लिए
वन अधिकारियों ने बताया वन्य जीनों के पगमार्क, उनकी विष्ठा (मल-मूत्र) के सैंपल लिए गए, जिन्हें जांच के लिए देहरादून की लैब में भेजा गया है। वहीं देखा गया कि वन्य प्राणियों के लिए वन्य क्षेत्रों में और क्या करने की जरूरत है।
मांसाहारी और शाकाहारी जीव मिले
25 जनवरी तक चली गणना के दौरान मांसाहारी जीवों में तेंदुआ, सिहार, लकड़बग्गा, जंगली बिल्ली मिले थे। वहीं शाकाहारी जीवों में लोमड़ी, खरगोस, नीलगाय मिले। वन्य जीवों के पगमार्क देखते हुए महिला कर्मचारी की गणना में भाग लेकर कार्य किया।- विजयानंथम टीआर डीएफओ धार
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