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‘मंगल’ को सब ‘कुशल मंगल’: लैंड पूलिंग एक्ट; किसान संघ के अल्टीमेटम से पहले फिर झुकी ‘मोहन सरकार’

किसानों के आंदोलन के पहले सरकार ने उज्जैन लैंड पूलिंग एक्ट लिया वापस, देर रात जारी की अधिसूचना आंदोलन के लिए शॉर्ट नोटिस पर किसानों ने उज्जैन कूच की फिर कर ली थी तैयारी डॉ. मोहन सरकार ने टीपीएस की चार...

Khulasa First

संवाददाता

17 दिसंबर 2025, 8:01 पूर्वाह्न
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‘मंगल’ को सब ‘कुशल मंगल’

किसानों के आंदोलन के पहले सरकार ने उज्जैन लैंड पूलिंग एक्ट लिया वापस, देर रात जारी की अधिसूचना

आंदोलन के लिए शॉर्ट नोटिस पर किसानों ने उज्जैन कूच की फिर कर ली थी तैयारी

डॉ. मोहन सरकार ने टीपीएस की चारों योजनाएं भी रद्द की, किसान संघ ने सीएम का आभार जताया

नितिन मोहन शर्मा  94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर
‘याचना नहीं, अब रण होगा-संग्राम महाभीषण होगा’। प्रदेश की मोहन सरकार के खिलाफ ये आक्रामक नारा किसानों के बीच काम करने वाले आरएसएस के एकमात्र सहयोगी संगठन किसान संघ की जुबां पर फिर आ गया था। संघ एक बार फिर सरकार से तकरार की राह पर बढ़ चला था।

उसका गुस्सा इस बार ज्यादा था। कारण था कथित वादाखिलाफी, जो सरकार ने संघ के साथ की। संघ से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना था कि आखिर सरकार को बारंबार कौन लोग भ्रमित कर रहे हैं, जो सरकार ही नहीं, संगठन की साख भी दांव पर लग गई। गुस्सा इसे लेकर खास था कि किसानों से स्थायी रूप से जमीन लेकर सिंहस्थ के आयोजन की योजना किसकी रुचि से तैयार हुई? संघ हलकों में इसके खुलासे की मांग भी जोर पकड़ गई थी।

किसानों के बीच इस बात का भी गुस्सा था कि जब आंदोलन की समाप्ति पर आम सहमति बन गई थी तो फिर ऐसे कौन-से अफसर हैं, जिन्होंने नियमों में हेरफेर के जरिये किसान संघ के आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रची? लिहाजा संघ ने एक बार फिर किसानों को शॉर्ट नोटिस पर उज्जैन कूच के संदेश भेजना शुरू कर दिए थे, लेकिन मंगल को अब सब ‘कुशल मंगल’ हो गया। खेतों में लगे भगवा ध्वज ‘भगवा सरकार’ की अधिसूचना के बाद समेट लिए गए।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर किसानों का फिर से गुस्सा होना सरकार ने थाम लिया है। प्रदेश सरकार ने आखिरकार मंगलवार को साफ कर दिया कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर लाई गई लैंड पूलिंग योजना अब बीते दिनों की बात हो गई है।

इस कानून को लेकर एमपी सरकार के नगरीय विकास व आवास विभाग ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर लैंड पूलिंग एक्ट की वापसी का न सिर्फ एेलान कर दिया, बल्कि टीपीएस की वे चारों योजनाएं भी रद्द कर दीं, जिसने जिले के किसानों को आंदोलन की राह पर बढ़ा दिया था। सरकार ने इस बार पिछली बार वाली गलती नहीं की। देर रात इस एक्ट के निरस्त होने व योजनाओं को रद्द करने की अधिसूचना भी जारी कर दी। भारतीय किसान संघ ने इसे लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया।

मसला तो एक पखवाड़ा पहले ही लगभग खत्म हो गया था, लेकिन किसान संघ व सरकार के बीच हुई सहमति के बाद एक आदेश ने किसानों की मुश्किलें कम करने के बजाय और बढ़ा दी थीं। लैंड पूलिंग एक्ट मामले में संशोधित बिल से एक बार फिर किसानों का गुस्सा बढ़ा और सरकार व भारतीय किसान संघ के बीच गतिरोध समाप्त होने के बजाय और गहरा गया।

एक बार फिर आंदोलन की घोषणा हो गई और इस बार मुख्यमंत्री के गृह जिले के विधायक ने भी आंदोलन का समर्थन कर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। इस बीच आरएसएस समर्थित किसान संघ की राष्ट्रीय बैठक में भी ये मुद्दा चर्चा में आ गया। कारण था किसान संघ के वे भगवा ध्वज व बैनर, जो जिले के किसानों के खेतों में लगा दिए गए थे।

आंदोलन की पुनः घोषणा के बाद मुख्यमंत्री ने तुरत-फुरत दिल्ली का फिर रुख किया। इस मसले पर उन्होंने एक बार फिर ‘पार्टी’ के ‘शाह’ के दरबार में दस्तक दी। ताजा दस्तक को सियासी गलियारों में भले ही संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से प्रचारित किया गया, लेकिन असल कहानी किसानों का गुस्सा ही था और इस मसले पर ‘शाह’ सरकार को पहले ही दो-टूक आगाह कर चुके थे, क्योंकि किसान संघ भी आंदोलन की शुरुआत से ही ‘शाह’ के संपर्क में था।

संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री ने योजना के ‘गुणा-भाग’ से अवगत कराने का काम किया था। लिहाजा दिल्ली से भोपाल लौटते ही इस पूरे मामले का पटाक्षेप कर दिया गया। हालांकि अभी भी इस मामले के जानकारों का कहना है कि लैंड पूलिंग एक्ट तो अभी भी जिंदा है। सिर्फ योजनाएं निरस्त की गई हैं।

आखिरकार सरकार ने अपनी ही ‘मातृसंस्था’ से टकराव टाला
नए आदेश में कहा गया है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा मध्य प्रदेश नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के अंतर्गत प्रस्तावित नगर विकास योजना 8, 9, 10 व 11 को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। इसे लेकर ही मुख्यमंत्री की घेराबंदी तेज हो गई थी और एक बार फिर सीएम अपने ही गृह जिले में मुश्किलों के बीच जा रहे थे।

अब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद किसान संघ ने न सिर्फ निर्णय का स्वागत किया, बल्कि संघ अध्यक्ष कमलसिंह आंजना ने सीएम का आभार भी जताया। मंगलवार देर रात प्रदेश सरकार ने योजना रद्द किए जाने के आदेश जारी कर दिए। पिछली बार आम सहमति के बाद भी आदेश जारी नहीं होने से मामला फिर आंदोलन की राह पर बढ़ चला था।

आदेश को लेकर प्रतिपक्ष कांग्रेस में सरकार की विधानसभा सत्र में घेराबंदी भी की थी। नगरीय प्रशासन मंत्री ने तब यह कहकर सीएम व सरकार का बचाव किया था कि सीएम का बोला गया ही आदेश है। मंगलवार को ये सत्य साबित हो गया और सीएम ने आदेश जारी कर समस्त संशय दूर कर दिए।

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