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20वीं मौत भी नहीं खोल पा रही जिम्मेदारों की नींद: भागीरथपुरा जल त्रासदी; मौत का तांडव जारी

Khulasa First

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संवाददाता

07 जनवरी 2026, 6:04 pm
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20वीं मौत भी नहीं खोल पा रही जिम्मेदारों की नींद

भागीरथपुरा पहुंचे कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त

दूषित पानी ने धो दी स्वच्छ इंदौर की छवि

त्रासदी के बाद भागीरथपुरा में सुधार युद्ध स्तर पर

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में दूषित पानी से फैल रही बीमारी जानलेवा बन चुकी है, इसके बावजूद शासन-प्रशासन हकीकत स्वीकारने को तैयार नहीं। मंगलवार को कुलकर्णी नगर में एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद आंकड़ा बढ़कर 20 तक पहुंच गया, लेकिन प्रशासन इस मौत को भी दूषित पानी से जोड़ने से बचता नजर आ रहा है। परिजनों का आरोप है मरीजों की बढ़ती संख्या और लगातार मौतें भी जिम्मेदारों की नींद नहीं खोल पा रही।

80 वर्षीय हरकुंवर ग्रैरईया कुलकर्णी नगर की निवासी थीं। भागीरथपुरा में बेटी के घर ठहरी हुई थीं। परिजनों के मुताबिक, यहीं उन्होंने दूषित पानी का सेवन किया, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। उल्टी-दस्त की गंभीर शिकायत के बाद इलाज भी कारगर नहीं रहा और 2 जनवरी को मौत हो गई।

परिजन साफ शब्दों में इसे डायरिया और दूषित पानी से हुई मौत बता रहे हैं। हरकुंवर की बेटी निर्मला ने बताया मां 20 दिसंबर से आई थीं और करीब दस दिन रहीं। 30 दिसंबर को अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो गए। डॉक्टर को दिखाया, दवाइयां दी गईं, लेकिन सुधार नहीं हुआ।

हालत बिगड़ने पर 1 जनवरी को कुलकर्णी नगर में भाई के घर भेजा, जहां अगले ही दिन उनकी तबीयत फिर गंभीर हुई और मौत हो गई। निर्मला का कहना है परिवार के चार अन्य सदस्य भी बीमार हैं, जिनमें से एक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।

एक ही परिवार के चार सदस्य जूझ रहे मौत से
80 वर्षीय हरकुंवर ग्रैरईया की मौत के बाद भी संकट टला नहीं है। बेटी निर्मला के अनुसार, परिवार के चार अन्य सदस्य अभी भी उल्टी-दस्त की गंभीर चपेट में हैं। भानजी पूजा को सीएचएल अस्पताल में भर्ती कराया है। 11 वर्षीय काव्या, खुद और बेटी महक भी बीमार हैं। पूरे परिवार पर बीमारी का साया है लेकिन प्रशासनिक तंत्र अब भी सिर्फ आंकड़ों और दलीलों में उलझा दिखाई दे रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है हालात सामान्य नहीं हुए हैं।

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से उपजी त्रासदी थमने का नाम नहीं ले रही है। नलों से बह रहा गंदा पानी अब सीधे लोगों की जान ले रहा है, लेकिन इसके बावजूद शासन-प्रशासन हकीकत स्वीकारने को तैयार नहीं है। दूषित पानी के कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है।

मंगलवार को तीन नई मौतों की जानकारी सामने आने के बाद हालात की भयावहता और स्पष्ट हो गई है। शहर में दूषित पानी से फैल रही बीमारी अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि जानलेवा आपदा बन चुकी है। इसके बावजूद प्रशासनिक तंत्र मौतों को अलग-अलग कारणों से जोड़कर असल सच्चाई से बचने की कोशिश करता नजर आ रहा है।

मंगलवार को कुलकर्णी नगर में एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद मौतों का आंकड़ा बढ़कर 20 तक पहुंच गया था, लेकिन प्रशासन ने इस मौत को भी दूषित पानी से जोड़ने से किनारा कर लिया। परिजनों के आरोप, अस्पतालों में भर्ती मरीजों की लंबी कतारें और लगातार सामने आ रही मौतें भी जिम्मेदार अफसरों की नींद नहीं खोल पा रही हैं।

पोस्टमार्टम क्यों नहीं: सबसे चौंकाने वाली और गंभीर बात यह है अब तक एक भी शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। पीएम न होने से मौत के वास्तविक कारणों पर हमेशा के लिए पर्दा डालने की आशंका गहरा रही है। सवाल साफ है, अगर मौतों की सच्चाई सामने आ गई, तो जिम्मेदारी तय होगी, और शायद इसी डर से प्रशासन सच्चाई से भाग रहा है।

दूषित पानी से फैली यह त्रासदी सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता और लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है। जब लोग एक-एक कर मर रहे हों और जिम्मेदार अब भी कारण मानने से इनकार करें, तो सवाल उठना लाजमी है आखिर जनता की जान की कीमत क्या सिर्फ आंकड़ों तक ही सीमित रह गई है?

47 वर्षीय रामकली की भी गई जान
इसी तरह रामकली पत्नी जगदीश (47 वर्ष) की मौत ने भी प्रशासन के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनके बेटे ने बताया कि 28 दिसंबर को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। परिजन उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।

परिजनों का कहना है कि रामकली को इससे पहले किसी भी तरह की गंभीर बीमारी नहीं थी। अचानक हुई तबीयत खराबी और मौत ने दूषित पानी की भूमिका को और मजबूत कर दिया है। भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में हालात ऐसे हैं कि हर घर में बीमार लोग मिल रहे हैं।

अस्पतालों में बेड भर चुके हैं, स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की भीड़ लगी है, लेकिन प्रशासन अब भी मौतों को “स्वाभाविक” या “अन्य कारणों” से जोड़कर अपनी जिम्मेदारी से बचने में लगा है। आज सवाल यह नहीं है कि मौतें हुई हैं या नहीं, सवाल यह है कि कितनी मौतों के बाद शासन-प्रशासन सच्चाई स्वीकार करेगा? क्या 20 जिंदगियां भी सिस्टम को झकझोरने के लिए काफी नहीं हैं? भागीरथपुरा में बहता दूषित पानी अब सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का सबसे बड़ा सबूत बन चुका है।

अस्पतालों पर बढ़ रहा दबाव
भागीरथपुरा और आसपास के हालात अब भी नियंत्रण से बाहर हैं। विभिन्न अस्पतालों में इस समय 99 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 16 की हालत गंभीर बताई जा रही है, सभी आईसीयू में हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है दो मरीजों की स्थिति बेहद नाजुक है। मरीजों को एमवाय से अरबिंदो और चाचा नेहरू अस्पताल रैफर करना शुरू कर दिया है।

दावा किया जा रहा है इन अस्पतालों में मरीजों को नि:शुल्क उपचार दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही। एक के बाद एक सामने आ रहे गंभीर मामले प्रशासन के तमाम दावों का खुलासा करने के लिए काफी हैं। दूषित पानी से उपजा यह संकट अब सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं रह गया है। मौत, बीमारी, अस्पतालों में भीड़ और घर-घर फैला डर साफ संकेत दे रहा है हालात गंभीर हैं।

इसके बावजूद जिम्मेदारों का इनकार और लापरवाही इस त्रासदी को और भयावह बना रही है। प्रशासन का रुख पूरी तरह से सवालों में है। अधिकारियों का कहना है जिसकी ‘हिस्ट्री’ भागीरथपुरा की मिलेगी, उसी मौत को दूषित पानी से जोड़कर देखा जाएगा। सवाल है क्या बीमारी इलाके की सीमा देखकर फैलती है?

पुराने और जर्जर टैंकरों को रंगाई-पुताई कर चमकाया
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इस गंभीर त्रासदी के बाद नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टैंकरों से जल वितरण कर रहा है। हालांकि, टैंकरों की खस्ता हालत, गंदगी और अस्वच्छता को लेकर जब मीडिया में सवाल उठे, तो एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया।

सूत्रों के अनुसार निगम ने पुराने और जर्जर टैंकरों की केवल रंग-पुताई कर नया दर्शाने की कोशिश की है। टैंकरों की वास्तविक स्थिति सुधारने या स्वच्छता मानकों को सुनिश्चित करने के बजाय ऊपरी सजावट के जरिए जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया है। जलजनित मौतों के बाद भी इस तरह की लापरवाही ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

आज सिर्फ टेस्टिंग के लिए होगा नर्मदा जलप्रदाय
कलेक्टर शिवम वर्मा एवं निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने सुबह भागीरथपुरा क्षेत्र की विभिन्न बस्ती एवं कॉलोनियों का निरीक्षण किया। वे लगभग रोज ही वहां जा रहे हैं। वर्मा एवं आयुक्त ने रेडवाल कॉलोनी, ईंट का भट्ठा, बगिया रोड एवं अन्य क्षेत्र मैं सीवरेज एवं नर्मदा के लीकेज सुधार का अवलोकन कर दिशा-निर्देश दिए।

रहवासियों से जलप्रदाय के संबंध में भी जानकारी ली। नागरिकों ने टैंकर द्वारा पर्याप्त जलप्रदाय पर संतोष व्यक्त किया। आयुक्त सिंघल ने बताया जोन-04 वार्ड 11 में घर-घर गली-गली जानकारी दी जा रही है आज 12.30 बजे नर्मदा पानी का सप्लाय सिर्फ टेस्टिंग के लिए किया जाएगा।

अनाउंसमेंट किया जा रहा है सप्लाय के दौरान घर के नले की टोटी को बंद रखें, पानी का उपयोग न करें। टैंकर का पानी भी उबालकर और छानकर के ही उपयोग करें। भागीरथपुरा टंकी से क्लोरीनेटेड जलप्रदाय की टेस्टिंग आज दोबारा की जाएगी।

निर्माल्य कुंड को बना दिया कचरा कुंड!
नगर निगम द्वारा पूजा सामग्री विसर्जन के लिए बनाए गए निर्माल्य कुंड कचरा कुंड बन गया है। चेतावनी बोर्ड होने के बावजूद पूजा सामग्री के अलावा प्लास्टिक, कपड़े, थर्माकोल और अन्य कचरा भी फेंका जा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा है। तस्वीरों में कुंड के भीतर फूल-मालाएं, मूर्तियों के अवशेष और प्लास्टिक कचरा साफ दिखाई दे रहा है। इससे पूजा सामग्री के वैज्ञानिक और सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

‘पॉलिथीन न डालें’ लिखा है बोर्ड पर
कुंड के बाहर नगर निगम का बोर्ड लगा है, जिस पर स्पष्ट लिखा है ‘पूजन सामग्री डालें, पॉलिथीन नहीं’ लेकिन न निगरानी है और न ही नियमित सफाई, जिससे नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

आंगनवाड़ी के बच्चों पर खतरा
निर्माल्य कुंड के पास ही शासकीय आंगनवाड़ी एवं शिक्षण केंद्र है। खुले कुंड में फैली गंदगी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कुंड की तत्काल सफाई कराई जाए, ढक्कन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कर नियमित मॉनिटरिंग की जाए। पूजा सामग्री के पृथक संग्रह और निस्तारण की व्यवस्था मजबूत की जाए। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो निर्माल्य कुंड पर्यावरण संरक्षण के बजाय स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।

हाई कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार, मुख्य सचिव तलब
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा है इस कांड से देश ही नहीं, विदेशों तक इंदौर की छवि को नुकसान पहुंचा है। कोर्ट ने टिप्पणी की देश का सबसे स्वच्छ शहर आज दूषित पानी के कारण चर्चा में है, जो प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।

स्वच्छ पेयजल नागरिकों का मौलिक अधिकार है। पूरे शहर में दूषित पानी की सप्लाई बेहद गंभीर मामला है। हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं 15 जनवरी को अगली सुनवाई में वर्चुअली उपस्थित होकर बताएं प्रदेश में पानी में मिलावट रोकने के लिए राज्य स्तर पर क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि कहीं और ऐसी घटना न हो।

पीड़ितों को राहत सर्वोच्च प्राथमिकता
कोर्ट ने प्रभावित इलाकों में सरकारी खर्च पर टैंकरों से सप्लाई व सुरक्षित पैक्ड पेयजल की तुरंत व्यवस्था, दूषित स्रोत बंद करने, हेल्थ कैंप लगाने, मेडिकल स्क्रीनिंग और अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

जांच और सुधार के सख्त निर्देश: नगर निगम को एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से पानी की जांच, सीवर और पानी की समानांतर लाइनों वाले क्षेत्रों में पाइपलाइन बदलने/मरम्मत, ऑनलाइन वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने और क्लोरीनेशन-कीटाणुशोधन प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इंदौर के लिए दीर्घकालीन जल सुरक्षा योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मौतों के आंकड़ों पर सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौत की संख्या पर सवाल उठाए। सरकारी पक्ष ने आठ मौतें बताईं, जबकि मीडिया रिपोर्ट और याचिकाकर्ताओं ने 17 मौतों का दावा किया। कोर्ट ने कहा कुछ लोगों की पानी पीने के कुछ घंटे बाद मौत की खबरें अत्यंत गंभीर हैं और इस पर स्पष्ट जवाब चाहिए।

पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी: याचिकाकर्ताओं ने बताया भागीरथपुरा में लाइन बदलने के टेंडर महीनों पहले हो चुके थे, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। 2017-18 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 60 में से 59 सैंपल फेल होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने साफ कहा पहले लक्ष्य पीड़ितों का उपचार है लेकिन जरूरत पड़ी तो दोषियों पर आपराधिक और सिविल जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया मामला एक शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है।

नर्मदा और ड्रेनेज-पेयजल लाइन अलग करने की कवायद शुरू
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से जनहानि के बाद प्रशासन और नगर निगम हरकत में हैं। नर्मदा का शुद्ध पानी उपलब्ध कराने तथा पेयजल और ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह अलग करने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। नगर निगम और तकनीकी टीमों की मौजूदगी में पाइपलाइन, नालियों और जलस्रोतों की व्यापक जांच की जा रही है।

11 संवेदनशील बिंदु चिह्नित

सूत्रों के अनुसार ऐसे करीब 11 स्थान चिह्नित किए गए, जहां नर्मदा लाइन में ड्रेनेज मिल रहा था। इन सभी बिंदुओं पर पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन हटाकर नई डाली जा रही है। ड्रेनेज और बोरिंग को भी दूर किया जा रहा है।

हटाई जा रही अवैध मिक्सिंग
जांच के दौरान सामने आया है कई जगह नर्मदा जल लाइन में बोरिंग का पानी अवैध रूप से मिलाया जा रहा था। इस व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। बोरिंग जल के लिए उपयोग में लाई जा रही पुरानी पाइपलाइनों को हटाकर नई बिछाई जा रही है।

सफाई अभियान, फिर भी कुछ गलियों में गंदगी
नगर निगम की सफाई टीमें भी क्षेत्र की गलियों में लगातार काम कर रही हैं। नालियों की सफाई, जमा गंदे पानी की निकासी और सड़कों की धुलाई की जा रही है, लेकिन कुछ संकरी गलियों और नालियों में अब भी गंदगी और दूषित पानी जमा है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

प्राचीन कुएं का खुलासा, जांच की मांग
फोटो और स्थानीय जानकारी के आधार पर क्षेत्र में एक प्राचीन कुएं के अस्तित्व का खुलासा हुआ है, जिसे वर्षों पहले कचरा और मिट्टी डालकर पाट दिया गया था। आशंका है ऐसे बंद और उपेक्षित जलस्रोत भी दूषित जल फैलने का कारण हो सकते हैं।

स्थायी समाधान तक सतत मॉनिटरिंग जरूरी: स्थानीय रहवासियों का कहना है केवल अस्थायी सुधार से काम नहीं चलेगा। पूरे क्षेत्र में पेयजल और ड्रेनेज नेटवर्क के तकनीकी ऑडिट, स्थायी समाधान और निरंतर निगरानी जरूरी है, ताकि दोबारा ऐसी त्रासदी न हो।

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