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डीएचएल इंफ्राबुल्स के डायरेक्टरों पर ईओडब्ल्यू ने कसा शिकंजा: शासन के पास बंधक रखे प्लॉट बेचने वाले फंसे

करोड़ों के फर्जी सौदे का खुलासा खुलासा फर्स्ट, इंदौर । शहर में रियल एस्टेट की आड़ में करोड़ों का खेल खेलने वाले बिल्डरों की करतूत का एक बार फिर खुलासा हुआ है। शासन के स्वामित्व में बंधक रखे प्लॉट भी ब

Khulasa First

संवाददाता

12 दिसंबर 2025, 10:45 पूर्वाह्न
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डीएचएल इंफ्राबुल्स के डायरेक्टरों पर ईओडब्ल्यू ने कसा शिकंजा

करोड़ों के फर्जी सौदे का खुलासा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
शहर में रियल एस्टेट की आड़ में करोड़ों का खेल खेलने वाले बिल्डरों की करतूत का एक बार फिर खुलासा हुआ है। शासन के स्वामित्व में बंधक रखे प्लॉट भी बेच डालने वाली डीएचएल इंफ्राबुल्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टरों पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने कार्रवाई करते हुए जालसाजी व धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है।

शुरुआती जांच में ही यह खुलासा हुआ कि सरकारी आधिपत्य वाले भूखंडों को निजी लाभ के लिए बेचकर न केवल खरीदारों के साथ ठगी की गई, बल्कि सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान पहुंचाया। एजेंसी ने साफ कर दिया है कि जांच आगे बढ़ी तो आरोपी भी बढ़ेंगे और जिम्मेदार लोग कानून की जद में आएंगे।

एसपी रामेश्वर यादव ने बताया कि गोपनीय सूचना पर स्वत: संज्ञान लेकर जांच शुरू की गई। इसमें सामने आया कि डीएचएल इंफ्राबुल्स कंपनी के डायरेक्टर संतोष सिंह, संजीव जायसवाल और अनिरुद्ध देव ने कॉलोनी सेल इंदौर में शासन के पर बंधक रखे 249 प्लॉट में से कुछ प्लॉटों में बड़ा खेल किया है।

आइकॉनस लैंडमार्क-01 और 02 प्रोजेक्ट के ये प्लॉट नियमों के तहत बेचे नहीं जा सकते थे। बावजूद इसके कंपनी ने शासन से अनुमति लिए बिना 15 बंधक प्लॉट बेच डाले। प्लॉट्स की रजिस्ट्री भी खरीदारों के नाम कर दी, जबकि स्वामित्व सरकार का था। दस्तावेजों के मिलान में यह फर्जीवाड़ा पूरी तरह साबित हो गया, जिसके बाद धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया।

दस्तावेज खंगाल रही ईओडब्ल्यू, खरीदार भी आ सकते हैं रडार पर
फर्जी प्लॉट सौदों के खुलासे के बाद ईओडब्ल्यू की टीम अब खरीदारों के बयान ले रही है। संदिग्ध दस्तावेजों की जांच कर रही है और सरकारी नुकसान का हिसाब जुटा रही है। एजेंसी के सूत्रों के अनुसार जांच में कई और नाम सामने आने की पूरी संभावना है।

खरीदारों को भी यह साबित करना होगा कि उन्होंने जानबूझकर गलत सौदे में साथ नहीं दिया वरना उन पर भी कानून की आंच आ सकती है।

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