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अंग्रेजी व्यवसाय, हिंदी प्रेम और संवेदना की भाषा: लिट चौक महोत्सव; विचार, पत्रकारिता, कला और जीवन दर्शन का संगम

खुलासा फर्स्ट, इंदौर। इंदौर के लिट चौक मंच पर आयोजित बहु-सत्रीय आयोजन ने विचार, पत्रकारिता, सिनेमा, साहित्य, निवेश और जीवन दर्शन को एक सूत्र में पिरोया। कल दिनभर चले इस बौद्धिक उत्सव में वरिष्ठ पत्रका...

Khulasa First

संवाददाता

22 दिसंबर 2025, 10:56 पूर्वाह्न
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अंग्रेजी व्यवसाय, हिंदी प्रेम और संवेदना की भाषा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर के लिट चौक मंच पर आयोजित बहु-सत्रीय आयोजन ने विचार, पत्रकारिता, सिनेमा, साहित्य, निवेश और जीवन दर्शन को एक सूत्र में पिरोया। कल दिनभर चले इस बौद्धिक उत्सव में वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, कलाकार, अभिनेता, वित्त विशेषज्ञ और नीति-निर्माता एक साथ आए और समाज को दिशा देने वाले विमर्श प्रस्तुत किए।

इसमें प्रथम सत्र में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अनंत विजय के साथ सत्र की शुरुआत मनोरंजन और विचार के अंतर्संबंध से हुई। उन्होंने कहा कि मनोरंजन में विचार अनिवार्य हैं, क्योंकि विचारहीन जीवन व्यर्थ हो जाता है, हालांकि विचारधारा थोपना आवश्यक नहीं। सिनेमा पर चर्चा करते हुए उन्होंने धुरंधर, आर्टिकल 370, बारामुला और दहेज जैसी फिल्मों का उल्लेख किया और बताया कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भविष्य को दिशा देने का माध्यम भी है।

भारतीय सभ्यता, इतिहास और ज्ञान परंपरा पर बात करना प्रोपेगंडा नहीं
पत्रकारिता के संदर्भ में उन्होंने निष्पक्षता के बजाय तटस्थता पर जोर दिया और स्पष्ट किया कि भारतीय सभ्यता, इतिहास और ज्ञान परंपरा पर बात करना प्रोपेगंडा नहीं है। IC814 जैसे विषयों के बहाने उन्होंने समकालीन कंटेंट और Gen-Z पर चर्चा की, जिसे उन्होंने समझदार और जागरूक पीढ़ी बताया। भाषा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजी व्यवसाय, हिंदी प्रेम और संवेदना की भाषा है। प्रश्नोत्तर में लेखक विश्वास व्यास जी ने इंदौर और लिट चौक की आत्मा पर प्रकाश डाला।

पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, जीवन प्रक्रिया है
द्वितीय सत्र में टाइम्स नाऊ नवभारत के सीनियर कंसल्टिंग एडिटर सुमित अवस्थी ने जय श्री महाकाल के अभिवादन के साथ सत्र आरंभ किया। उन्होंने न्यूज रूम को पत्रकार का मंदिर बताते हुए दबावों के बीच सत्य के साथ खड़े रहने की बात कही। अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कर्णिक ने कहा कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, जीवन प्रक्रिया है। उन्होंने पत्रकार और इन्फ्लूएंसर के अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि विचारधारा यदि देश-विरोधी हो तो पत्रकार को उसका त्याग करना चाहिए। श्रुति अग्रवाल के प्रश्नों ने सत्र को और विचारोत्तेजक बनाया।

अनुशासन, संयम और दीर्घकालिक सोच पर बल दिया
तृतीय सत्र में सेंस एंड सिंपलसिटी के फाउंडर सुनील सुब्रह्मण्यम ने निवेश में अनुशासन, संयम और दीर्घकालिक सोच पर बल दिया। उन्होंने रोलिंग रिटर्न्स एनालिसिस, लिखित लक्ष्य और सलाहकार की भूमिका पर प्रकाश डाला। सीए असीम त्रिवेदी ने वित्तीय शिक्षा ‘ब्रो ट्रस्ट मी’ संस्कृति और निवेश में सीख से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए।

प्रेम का अर्थ है दूसरे का भला सोचना
चतुर्थ सत्र में रेडियो स्टोरीटेलर पंकज जीना के साथ सत्र संवेदनाओं की यात्रा बन गया। उन्होंने पहाड़, बनारस और आवाज के रिश्ते पर भावुक बातें साझा की। उनके अनुसार कहानी लंबे फॉर्मेट में फलती है और प्रेम का अर्थ है दूसरे का भला सोचना। उन्होंने युवाओं को बुजुर्गों से मिलने, पढ़ने, यात्रा करने और भीड़ से अलग अपनी राह खोजने की सलाह दी।

महिला पात्रों, भाषा, बदलाव और आत्मविश्वास पर की बात
पंचम सत्र में मॉडरेटर अंकिता जैन के साथ अभिनेत्री सुनीता राजवार और लता सभरवाल ने सिनेमा में महिला पात्रों, भाषा, बदलाव और आत्मविश्वास पर खुलकर बात की। सुनीता राजवार ने टीमवर्क, नीयत और संदेश को प्राथमिक बताया। लता सभरवाल ने प्रक्रिया पर भरोसा, भीतर से बदलाव और मूल्यों के पालन पर जोर दिया।

परिस्थितियों के अनुसार भाव नियंत्रण कलाकार की पहचान
छठे सत्र में गोपाल दत्त और नवीन चौधरी ने थिएटर की प्रयोगशाला सरीखी भूमिका, एनएसडी प्रशिक्षण, कॉमेडी की गंभीरता और अभिनय में अनुभव की अहमियत पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी से जुड़ाव और परिस्थितियों के अनुसार भाव नियंत्रण कलाकार की पहचान है।

बेस्टसेलर की चिंता न करें
सातवें सत्र में नीलोत्पल ने कहा कि लिखते समय बेस्टसेलर की चिंता नहीं करना चाहिए। साधारण शब्दों में असाधारण विचार लिखना साहित्यकार का धर्म है। उन्होंने इतिहास, अर्थशास्त्र, विज्ञान और भूगोल पढ़ने को लेखन का ईंधन बताया और धैर्य व तैयारी पर बल दिया।

मनुष्य का जीवन अमरता का प्रतीक
लिट चौक के मंच पर आयोजित सत्र–8 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जीवन, संस्कृति, युवाओं और शासन से जुड़े विषयों पर प्रेरक विचार रखे। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में वे स्वयं ही अपने अभिनय की स्क्रिप्ट लिखते हैं और उसी के अनुरूप जीवन जीते भी हैं। इस क्रम में उन्होंने कुटुंब प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि वे इसके सिद्धांतों का स्वयं पालन करते हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैंने मिट्टी वाली पहलवानी की है और पहलवानी के भी अनेक प्रकार होते हैं, जो अनुशासन और धैर्य सिखाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच परिवर्तन को अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और कहा कि मनुष्य का जीवन अमरता का प्रतीक है, क्योंकि उसकी परंपराएं और वंश आगे बढ़ते रहते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकृति हम पर निर्भर नहीं, बल्कि हम प्रकृति पर निर्भर हैं। अपने पुत्र के सामूहिक विवाह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी प्रेरणा उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली और इसमें पुत्र की सहमति सबसे महत्वपूर्ण रही।

श्रीकृष्ण के जीवन से कर्मयोग सीखें युवा
युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाजाद और भगत सिंह के विचारों से प्रेरणा लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने श्रीकृष्ण के जीवन से कर्मयोग सीखने की बात कही। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश के युवा केवल रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें।

अंत में उन्होंने रंगमंच और फिल्म के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए 2 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी और होटलों में 30 प्रतिशत अनुदान की घोषणा का उल्लेख किया। प्रश्नकर्ता अनंत विजय रहे, जबकि मंच से मनोज का भी अभिनंदन किया गया।

थिएटर से सिनेमा तक की यात्रा साझा की
नौवें सत्र में अभिनेता बृजेंद्र काला ने पान सिंह तोमर और हासिल जैसे अनुभव साझा किए। उन्होंने इरफान खान के अनुशासन, ब्रेक की आवश्यकता और थिएटर से सिनेमा तक की यात्रा पर ईमानदारी से बातें रखीं। यह सत्र सिनेमा के प्रति गहरे जुड़ाव का जीवंत उदाहरण बना।

लिट चौक का यह आयोजन विचार, संवेदना और अनुभव का उत्सव रहा। जहां पत्रकारिता की दुविधाएं, कला का अनुशासन, निवेश की समझ और जीवन का प्रेम एक साथ झलका। यह मंच संवाद की उस परंपरा को आगे बढ़ाता दिखा जो समाज को जागरूक और सृजनशील बनाती है।

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