राजवाड़ा के सौंदर्य को नुकसान पहुंचा रहा अतिक्रमण: ऐतिहासिक धरोहर के पीछे पक्की दुकानों के कारण सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजवाड़ा के पास अतिक्रमण इस ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके पीछे की ओर बनी पक्की दुकानों से जहां इस भव्य इमारत का सौंदर्य प्रभावित हो रहा है, वहीं सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन सबका असर पर्यटन पर पड़ रहा है।
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पिछले वर्षों में जहां छोटे फुटपाथी और अस्थायी दुकानदारों को हटाया गया, वहीं राजवाड़ा से सटी स्थायी दुकानों का अतिक्रमण अब भी जस का तस है। कई बार यहां से अतिक्रमण हटाने के दावे किए गए, लेकिन फिर भी कार्रवाई न होने से व्यापारी नगर निगम, पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन पर अंगुली उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि सड़क और फुटपाथ हटाने की कार्रवाई के दौरान इन दुकानों से जुड़े संगठनों ने विरोध प्रदर्शन और आंदोलन भी किए, लेकिन दुकानें राजवाड़ा के पीछे की ओर फैलकर धरोहर को बदरंग कर रही हैं। पुरातत्व नियमों के मुताबिक किसी भी संरक्षित स्मारक के आसपास निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध है, लेकिन राजवाड़ा पर इसका पालन नहीं हो रहा।
कई दुकानदारों द्वारा पक्के निर्माण कर लोहे के पाइप पर कपड़ों का डिस्प्ले, साइन बोर्ड और लोहे के चकरे लगाकर इस ऐतिहासिक इमारत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यहां आने वाले बाहरी लोग ये स्थिति देख व्यथित हो जाते हैं।
निगम अफसर नहीं करते ठोस कार्रवाई
व्यापारियों का कहना है नगर निगम के अधिकारी इन अतिक्रमण को हटाने का दावा तो करते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं करते। क्या किसी दबाव के चलते इन दुकानदारों पर कार्रवाई नहीं हो रही?
शहर के जागरूक नागरिकों का भी कहना है कि राजवाड़ा की ऐतिहासिक इमारत को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसकी पहचान खोने का अंदेशा है।
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