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स्वच्छता के ‘आठ सितारे’ और जहरीला पानी, अभी भी सिसक रहा भागीरथपुरा: मदद के हाथों के बीच सियासत

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 जनवरी 2026, 11:47 पूर्वाह्न
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स्वच्छता के ‘आठ सितारे’ और जहरीला पानी, अभी भी सिसक रहा भागीरथपुरा

हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दूषित अथवा गंदे पानी से काल के गाल में समाए लोगों की चिता की आग भले ही ठंडी हो गई हो, लेकिन भागीरथपुरा में अपनों को खो देने के बाद 20 परिवारों का शोक और गुस्सा अभी जिंदा है। सिसकियों के बीच सियासत की लपटें अभी भी उठ रही हैं।

आरोप-प्रत्यारोप और मदद के दौर के बीच व्यवस्था को सुधारने के ‘भगीरथ’ प्रयास किए जा रहे हैं। साधन-सुविधाएं जुटाने, हालात पटरी पर लाने के लिए जिम्मेदार कड़कड़ाती ठंड में दिन-रात एक किए जा रहे हैं। पीड़ितों, प्रभावितों को मुआवजे के साथ ही पुरजोर सहायता के लिए चारों ओर से हाथ उठ रहे हैं।

एक-दूसरे पर जिम्मेदारी ढोलने का उपक्रम
अब शहर के एकाधिक इलाकों में भी पानी की असली तस्वीर सामने आ रही है। मामला माननीय न्यायालय में भी है। इस बीच तुरत-फुरत किए गए सुधार कार्य की पोल भी खुल गई। खबरें बताती हैं कि इस तरह के हालात आज-कल में तो नहीं बने। लंबे समय से यह चल रहा था, लेकिन आंखों पर पड़ी स्वच्छता की पट्टी यह सब देख नहीं पाई। इस मामले की जिम्मेदारी तय करने के बजाय आरोप-प्रत्यारोपों की जहरीली बौछार हो रही है।

हुक्मरान इंदौर की प्रतिष्ठा, स्वच्छता की रैंकिंग और आंकड़ों की बाजीगरी में मशगूल
इलाकों में पेजयल की बदरंग तस्वीर: लोग सवाल उठा रहे हैं कि निगम में अधिकारियों का आमूलचूल परिवर्तन कर देने से क्या हालात बदल जाएंगे। दरअसल, भागीरथपुरा कांड के बाद असलियत सामने आ गई। कलई खुल गई और अब परत-दर-परत कई इलाकों में पेजयल की बदरंग तस्वीर हर दिन सामने आ रही है। क्या नहीं लगता कि जब इस शानदार शहर के हुक्मरान इंदौर की प्रतिष्ठा, स्वच्छता की रैंकिंग और आंकड़ों की बाजीगरी में मशगूल थे, तब भागीरथपुरा में नलों से लोगों के घरों में पानी नहीं, मौत पहुंच रही थी!

अब आसान नहीं होगा आगे का सफर: जाहिर है विश्व स्तर पर यह मामला उछल जाने के बाद अब बेबाक सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्वच्छता के दावे और तमगे भी झूठे हैं? 2016 से आरंभ हुआ देश में नंबर वन स्वच्छ शहर का अभियान भले ही जारी है, लेकिन अब लगता है कि आगे का सफर आसान नहीं है। बेशक यह घटना किसी त्रासदी से कम नहीं है कि देवी अहिल्या की जिस नगरी को देश का रोल मॉडल कहा जाता है, वहां के नागरिकों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो पाया।

जांच रिपोर्ट में हुए खुलासे: अलग-अलग जांच रिपोर्ट और निष्कर्ष में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। हालात अभी कैसे हैं इससे जाहिर होता है कि कई पीड़ित अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कुछ आईसीयू में संघर्ष कर रहे हैं। प्रदेश के मुखिया ने इस मसले पर कड़े तेवर दिखाते हुए सख्त कदम उठाकर संकेत दिए हैं कि अब ‘सबकुछ’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भागीरथपुरा बन रहा राजनीतिक संघर्ष का माध्यम: अब बेकसूर भागीरथपुरा राजनीतिक संघर्ष का माध्यम भी बनने वाला है। जहां समाजवादी पार्टी ने इस मसले पर मंत्री के आवास का घेराव करने की बात कही है, वहीं कांग्रेस ने भी महाप्रदर्शन का शंखनाद कर दिया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं के भी इस दौरान इंदौर आने की बात कही जा रही है। जाहिर है अगले कुछ दिन व्यवस्था संभालने वालों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होंगे।

जवाब-तलब पर आलोचना के तीर: बाकी सब चल रहा है तो संगठन भी सक्रिय हुआ। जब शीर्ष पदों पर बैठे लोगों से जवाब-तलब हुए तो इसके औचित्य पर विपक्ष की आलोचनों के तीर भी चलने लगे हैं। इस सब के बीच भी पानी को अपना दोस्त मानने से अभी भागीरथपुरावासी इंकार ही कर रहे हैं। जाहिर है इस विश्वास को बहाल करने में समय लगेगा। बुनियादी सेवाओं में हुई जानलेवा चूक की वजह से जो त्रासदी हुई, उसका घाव जल्दी तो नहीं भरने वाला।

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