शिक्षा उपकर वसूला: नहीं दी सुविधाएं-हाईकोर्ट ने निगम से मांगा हिसाब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जनता से शिक्षा उपकर के रूप में टैक्स वसूलने के बावजूद नगर निगम के अधीन संचालित 184 सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
सुनवाई के दौरान निगम कोई ठोस जवाब पेश नहीं कर सका। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगली तारीख तक विस्तृत और तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत किया जाए अन्यथा निगमायुक्त को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।
प्रशासनिक जज विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने निगम से पूछा है कि अब तक शिक्षा उपकर के रूप में कुल कितनी राशि वसूली गई और वह किन-किन मदों में खर्च की गई, साथ ही यह भी पूछा कि जब उपकर वसूला जा रहा है तो सभी स्कूलों में सुविधाघर, पीने का पानी, बेहतर क्लासरूम, खेल मैदान और अन्य मूलभूत सुविधाएं क्यों उपलब्ध नहीं कराई गईं।
याचिका में गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष विजयवर्गीय ने दलील दी कि नगर निगम शिक्षा उपकर के नाम पर जनता से राशि तो ले रहा है, लेकिन स्कूलों पर उसका उपयोग नहीं हो रहा। कई स्कूलों की इमारतें बनी हैं, लेकिन उनमें बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
याचिका में उल्लेख किया गया है कि कई स्कूलों में बेंच, ब्लैकबोर्ड, पानी की टंकी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं सामाजिक क्लबों और संगठनों के दान से कराई जा रही हैं। जबकि उपकर की राशि से खेल मैदान, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, पर्याप्त बेंच और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की व्यवस्था की जानी चाहिए। कई स्कूलों में न तो लाइब्रेरी है और न ही लैब की सुविधा।
25 स्कूलों की जांच, 10 का निरीक्षण पूरा
हाईकोर्ट ने तीन वकीलों की कमेटी गठित कर 25 स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। कमेटी अब तक 10 स्कूलों का निरीक्षण कर चुकी है। कोर्ट ने शेष 15 स्कूलों का निरीक्षण कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई में निगम को उपकर की पूरी वित्तीय जानकारी और स्कूलों की स्थिति पर स्पष्ट जवाब देना होगा।
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