खबर
टॉप न्यूज

कम पानी पीने से कैंसर, मोटापा, डायबिटीज और हो सकती है खून की कमी

फोकस करना, मूड स्विंग और थकान होना, भूख भी हो सकती है प्रभावित खुलासा फर्स्ट…इंदौर । पानी कम पीने के कारण ब्लड वॉल्यूम कम होगा, जिससे ब्रेन तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे फोकस

Khulasa First

संवाददाता

30 नवंबर 2025, 10:10 पूर्वाह्न
2 views
शेयर करें:
कम पानी पीने से कैंसर, मोटापा, डायबिटीज और हो सकती है खून की कमी

फोकस करना, मूड स्विंग और थकान होना, भूख भी हो सकती है प्रभावित

खुलासा फर्स्ट…इंदौर
पानी कम पीने के कारण ब्लड वॉल्यूम कम होगा, जिससे ब्रेन तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे फोकस करना, मूड स्विंग और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पानी कम पीने से आपके मसल्स को मिलने वाली एनर्जी में कमी होने लगेगी, जिससे काम करने में थकावट या एनर्जी की कमी हो सकती है।

पानी का डाइजेशन में काफी महत्वपूर्ण काम होता है। यदि आप पानी कम पीएंगे तो डाइजेशन धीमा हो जाएगा, जिससे कब्ज और अपच की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा भूख भी प्रभावित हो सकती है। यदि कोई सर्दियों में लगातार कम पानी पीता है तो समय के साथ उसके शरीर में स्ट्रेस बढ़ सकता है, जिसे कि पेशाब गाढ़ा होना, किडनी फिल्टरेशन रेट कम होना, तापमान नियंत्रण में कमी आदि. इससे आगे चलकर गंभीर बीमारी हो सकती है।

दिल को करना पड़ता है ज्यादा काम...जब शरीर को पानी कम मिलता है तो खून का गाढ़ापन बढ़ जाता है। खून को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल की धड़कन तेज लग सकती है या घबराहट महसूस हो सकती है।

दिमाग 70% से ज्यादा पानी से बना होता है। पानी की कमी होने पर दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इससे अक्सर ये समस्याएं दिखती हैं:
किडनी पर दबाव और इन्फेक्शन का जोखिम... कम पानी में किडनी शरीर के टॉक्सिन्स को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती। इससे दो बड़ी दिक्कतें पैदा होती हैं यूटीआई का खतरा बढ़ना और किडनी स्टोन बनने की संभावना। बता दें किडनी को सही तरह से काम करने के लिए पर्याप्त पानी बेहद जरूरी होता है।

कब्ज और भारीपन महसूस होना... हमारी आंतें तभी सुचारू रूप से काम करती हैं जब शरीर में पर्याप्त पानी हो। आधा लीटर पानी पूरे दिन के पाचन के लिए काफी नहीं होता, जिसके कारण- कब्ज, पेट में भारीपन, खाना पचने में देरी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर सोडियम-पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलित हो जाते हैं। नतीजा मांसपेशियों में खिंचाव, कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी तक आ जाना।

हीट एग्जॉशन का खतरा... शरीर पसीने के जरिए तापमान को नियंत्रित करता है, लेकिन जब पानी कम होगा तो शरीर पसीना बनने से रोक देता है और इससे गर्मी में हीट एग्जॉशन का खतरा बढ़ जाता है। पानी दिल, दिमाग, किडनी, पाचन और मांसपेशियों- सब पर असर डालता है। सही पानी की मात्रा सिर्फ प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि शरीर के हर सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी है।

यूटीआई इन्फेक्शन की वजह बनता है...यूरिनरी ट्रैक्ट हेल्थ और इंफेक्शन से बचने के लिए भी शरीर में पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। जब व्यक्ति पानी कम पीता है तो यूरीन एसिडिक हो जाता है। इससे ब्लैडर और यूरेथ्रा में इरिटेशन होती है और यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन यानी यूटीआई की समस्या बढ़ जाती है। ज्यादा से ज्यादा पानी पीने से यूरिन के जरिए शरीर से जहरीला तत्व बाहर निकलता है और यूटीआई का जोखिम कम हो जाता है।

श रीर को हेल्दी और फिट रखने के लिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है। शरीर में पानी की कमी के कारण कई गंभीर समस्याओं का खतरा रहता है। पानी की कमी के कारण न सिर्फ आपकी शारीरिक क्षमता कमजोर होती है, बल्कि इसकी वजह से कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने से लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को ठीक रखने के लिए पानी की पर्याप्त मात्रा जरूरी है। पानी की कमी शरीर के आंतरिक अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण किडनी का स्वास्थ्य भी बुरी तरह से प्रभावित होता है।

बढ़ जाता है गंभीर बीमारियों का खतरा
सामान्य व्यक्ति के शरीर का लगभग 70 प्रतिशत तक हिस्सा पानी से बना होता है। शरीर को ऊर्जा देने से लेकर इसकी कार्यक्षमता ठीक रखने तक पानी का जरूरी योगदान होता है। पानी की कमी के कारण कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कैंसर, मोटापा, डायबिटीज समेत शरीर में खून की कमी जैसी समस्याएं भी पानी कम पीने के कारण हो सकती हैं।

डॉ. उमेश मेहता ने बताया कि किडनी का काम शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को फिल्टर कर पेशाब के साथ बाहर निकालना होता है। ऐसे में पानी कम पीने पर किडनी में विषाक्त पदार्थों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसकी वजह से किडनी की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ता है, इसलिए ही किडनी को हेल्दी रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है।

रोजाना 4 से 5 लीटर पानी जरूर पीएं
किडनी को हेल्दी रखने के लिए नियमित रूप से संतुलित मात्रा में पानी पीना चाहिए। कुछ लोग निश्चित मात्रा से अधिक मात्रा में पानी पीने लगते हैं, ऐसा करना भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं कम या अधिक मात्रा में पानी पीने से शरीर पर खराब प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए रोजाना 4 से 5 लीटर और कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। इसके अलावा पानी की मात्रा व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, कामकाज के आधार पर अलग-अलग भी हो सकती है।

किडनी के फिल्टरेशन पावर पर असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब कोई बहुत कम या 500 मिली से कम पानी पीता है तो किडनी  को कम पानी के लिए भी काम करना पड़ता है, जिससे आपकी यूरिन गाड़ी होती है, इससे पानी की कम मात्रा निकलती है और शरीर से अधिक अपशिष्ट पदार्थ बाहर नहीं निकाल पाता, जिससे किडनी को नुकसान हो सकता है।

सर्दियां आते ही तापमान गिरने के साथ हमारी प्यास भी कम होने लगती है। दरअसल ठंड के कारण लोग दिनभर पानी कम पीते हैं, कई बार तो आधा लीटर से भी कम। वहीं विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह आदत धीरे-धीरे शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। पानी की कमी न सिर्फ किडनी पर दबाव बढ़ाती है, बल्कि दिमाग और पाचन जैसे कई महत्वपूर्ण सिस्टम पर भी असर डालती है।

किडनी की सेहत पर पड़ता है ये असर
किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होना।

फैट बढ़ने का खतरा।

किडनी में विषाक्त पदार्थ इकट्‌ठा होने का खतरा।

किडनी में पथरी बनने का खतरा।

किडनी इन्फेक्शन और किडनी फेलियर का खतरा।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!