शिवराज से ज्यादा सख्त हैं डॉ. मोहन यादव: भागीरथपुरा कांड में तुरंत और कड़ा एक्शन दिखाकर बनाई सख्त छवि; 36 मौतों पर शिवराज ने कोई कार्रवाई नहीं की थी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा कांड के आईने में एक बात अच्छी तरह साफ हो गई कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने पूर्ववर्ती शिवराजसिंह चौहान के मुकाबले अधिक सख्त और कुशल प्रशासक हैं जो तुरंत दंड देते हैं। इंदौर आकर पीड़ितों से मिलने के बाद भोपाल पहुंचते ही उन्होंने एक्शन शुरू कर अधिकारियों को हटा दिया।
जबकि इंदौर के पटेल नगर में करीब ढाई साल पूर्व हुए हादसे में 36 लोगों की मौत हो गई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके थे। बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में 30 मार्च 2023 (रामनवमी) के दिन मंदिर के नीचे बनी बावड़ी (स्टेपवेल) के ऊपर बनी छत ढह गई, जिससे कई श्रद्धालु बावड़ी में गिर गए।
इस हादसे में 36 लोगों की मौत हो गई थी। स्थिति ये थी कि बचाव कार्य में सेना की टीमों को लगाना पड़ा था। तब उम्मीद थी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कोई ठोस कार्रवाई करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टे जब वे खुद घटनास्थल पहुंचे तो रहवासियों के विरोध का सामना करना पड़ा था, लेकिन भागीरथपुरा मे 30 दिसम्बर को मामला सामने आते ही न केवल इंदौर जिला प्रशासन एक्टिव हो गया, बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तुरंत भोपाल से टीम भेजी और भागीरथपुरा में व्यवस्था शुरू करवाई।
यहीं नहीं, वे लगातार अपडेट लेते रहे। बाद में खुद भागीरथपुरा पहुंचे, फिर अस्पताल पहुंचे और लोगों को भरोसा दिया कि सरकार उनके साथ है और इलाज निशुल्क होगा। मुख्यमंत्री का अंदाज भरोसेमंद नेता जैसा रहा और वे लोगों में ये भरोसा जगाने में सफल रहे कि सरकार दूषित पानी से हुई मौतों के प्रति गंभीर है।
उन्होंने ताबड़तोड़ मुआवजे का भी ऐलान किया। इसके बाद भी मुख्यमंत्री चुप न बैठे, उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे समेत अन्य अधिकारियों को यहां भेजा और लोगों की समस्याएं दूर करवाई। इसके बाद उन्होंने जिम्मेदार निचले अधिकारियों को तो हटाया ही, एक को सस्पैंड किया और फिर बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिराई।
निगमायुक्त जो कि 4 माह पूर्व ही आए थे और उनके नेतृत्व में निगम ने 23 दिसंबर को लगी लोक अदालत में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व पाया था, दिलीप कुमार यादव भी उनके निशाने पर रहे और ट्रांसफर कर दिया गया।
अपर आयुक्तों को भी इंदौर से बाहर का रास्ता दिखाया गया। भागीरथपुरा मामले में जो कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की, वो काबिले तारीफ है और जनता ऐसी ही अपेक्षा करती है कि उनका नेता गलती पर इतना ही सख्त हो।
यदि तुलना की जाए तो शिवराजसिंह चौहान ने 36 मौतों के मामले में अधिकारियों को बचाया था लेकिन डॉ. मोहन यादव ने ऐसा नहीं किया। वो सख्त प्रशासक के रूप में नजर आए। देखा जाए तो उनकी कार्रवाई एक मिसाल बन गई है।
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