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300 कर्मचारियों के खातों में डाल बैठा दोगुना वेतन: गलती से भोपाल नगर निगम कर्मचारियों पर हुआ दरियादिल

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 जनवरी 2026, 8:40 पूर्वाह्न
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300 कर्मचारियों के खातों में डाल बैठा दोगुना वेतन

अब निगम प्रशासन रकम वापसी के लिए कर्मचारियों पर बना रहा दबाव

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट…भोपाल
आर्थिक संकट का हवाला देकर भुगतान टालने वाला भोपाल नगर निगम एक बार फिर अपनी गंभीर लापरवाही के चलते कटघरे में है। निगम के चार जोन के स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न शाखाओं के करीब 300 कर्मचारियों के बैंक खातों में दिसंबर का ‘दोगुना’ वेतन ट्रांसफर कर दिया गया।

कर्मचारियों ने इसे एरियर सहित वेतन भुगतान समझकर उपयोग भी कर लिया, लेकिन अब गलती का खुलासा होने के बाद निगम प्रशासन कर्मचारियों से रकम वापस लेने के लिए दबाव बना रहा है।

जानकारी के अनुसार नई कलेक्टर दरें लागू होने के बाद 1 मई 2024 से 28 फरवरी 2025 तक का एरियर देने की प्रक्रिया नगर निगम में चल रही थी। इसी सिलसिले में वित्त विभाग ने 21 जोन और सभी शाखाओं से कर्मचारियों की उपस्थिति का विवरण मांगा था।

इसी बीच अचानक कर्मचारियों के खातों में दोगुना राशि पहुंची, जिससे उन्हें यह लगा कि एरियर सहित वेतन का भुगतान किया गया है। कई कर्मचारियों ने इस राशि का उपयोग पारिवारिक जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, शादी-विवाह की तैयारियों और घरेलू खर्चों में कर लिया।

लेकिन बाद में जब निगम की वित्त (अकाउंट) शाखा की गलती का खुलासा हुआ तो अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने 17 जनवरी को विभाग प्रमुखों को फोन कर कर्मचारियों की सूची वाट्सएप पर भेजी और तत्काल वसूली के निर्देश दे दिए।

घाटे का रोना, फिर दोगुना भुगतान कैसे?
नगर निगम हमेशा आर्थिक बदहाली का हवाला देता रहा है। हालात यह हैं कि करीब 500 ठेकेदारों का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। ठेकेदार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं और उन्हें हर बार यही जवाब मिलता है कि निगम के पास फिलहाल फंड नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निगम घाटे में चल रहा है, तो इतनी बड़ी राशि का दोगुना भुगतान कैसे हो गया।

डीजल-पेट्रोल कोटे में भारी कटौती
आर्थिक संकट का हवाला देकर निगम ने वाहनों के डीजल-पेट्रोल कोटे में भारी कटौती कर दी। बोलेरो, सूमो, जीप और पिकअप वाहनों का ईंधन कोटा 250 लीटर से घटाकर 120 लीटर कर दिया गया। इसी तरह इंडिगो कारों का कोटा 180 से घटाकर 120 लीटर और छोटी गाड़ियों का 100 से घटाकर 80 लीटर कर दिया गया। इसके अलावा भारी वाहनों के

लिए लॉगबुक की सख्त जांच, इंडेंट बुक ऑडिट और अतिरिक्त ईंधन के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।

काम पूरा, वेतन अधूरा
राजधानी भोपाल में नगर निगम के करीब 15 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। स्वच्छता विभाग के कई कर्मचारियों को नवंबर और दिसंबर में केवल 15 दिन का वेतन ही मिल पाया। फेस रीडिंग और मोबाइल आधारित उपस्थिति प्रणाली के चलते कई कर्मचारियों की हाजिरी दर्ज नहीं हो सकी। कई कर्मचारियों के पास एंड्रॉयड मोबाइल तक नहीं है, जिसके कारण उन्हें वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

गलती से गई राशि वापस ली
इस पूरे मामले में निगम आयुक्त संस्कृति जैन का कहना है यह मामला पुराना है। निगम के जिन कर्मचारियों के खातों में बैंक की गलती से दोगुना वेतन ट्रांसफर हुआ था, वह राशि वापस ले ली गई है।

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