दिग्विजय सिंह ने हाईकोर्ट में खुद रखी दलील: राम मंदिर चंदा विवाद; फैसला सुरक्षित
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा संग्रह से जुड़े विवाद पर दायर जनहित याचिका में गुरुवार को इंदौर हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उन्होंने अपन
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा संग्रह से जुड़े विवाद पर दायर जनहित याचिका में गुरुवार को इंदौर हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।
उन्होंने अपने वकीलों की मौजूदगी में खुद अपनी दलीलें रखीं। सुनवाई शुरू होते ही दूसरे पक्ष के वकील मनीष गुप्ता ने कोर्ट से लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि दिग्विजय सिंह राजनीतिक व्यक्ति हैं, सुनवाई का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए हो सकता है।
इस पर दिग्विजय सिंह बोले कि मैं 45 साल से राजनीति में हूं। मैं यहां किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं आया हूं अगर आप चाहें तो लाइव स्ट्रीमिंग बंद करा सकते हैं। कोर्ट ने यह मानते हुए स्ट्रीमिंग बंद कर दी।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि दिग्विजय सिंह पर हाल ही में 12 एफआईआर हुई हैं, इसलिए उन्हें ऐसी याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। शासन ने यह भी कहा कि वे बिना तथ्य जांचे बयान दे रहे हैं।
सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि मॉब लिंचिंग पर एसपी स्तर तक जिम्मेदारी तय करने की बात है। धार्मिक रैलियों में शांति बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है।
कई घटनाओं में न तो जांच हुई, न कार्रवाई, अल्पसंख्यक वर्ग पर चंदा देने का दबाव डालने की शिकायतें सामने आईं। हम राम मंदिर निर्माण के पवित्र काम के समर्थक हैं, लेकिन चंदा स्वैच्छिक होना चाहिए।
करीब आधे घंटे सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले को हियर्ड एंड रिजर्व कर लिया यानी जल्द ही फैसला आएगा।
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