धर्मेंद्र: मेरे दिल में बसा एक ‘ही-मैन’
मुकेश मुवाल वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर । बचपन में जब पहली बार बड़े पर्दे पर किसी हीरो को देखा था, तब शायद समझ नहीं थी कि सिनेमा दिल पर कैसी अमिट छाप छोड़ जाता है। फिल्मों का बहुत ज्यादा शौक क
Khulasa First
संवाददाता

मुकेश मुवाल वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बचपन में जब पहली बार बड़े पर्दे पर किसी हीरो को देखा था, तब शायद समझ नहीं थी कि सिनेमा दिल पर कैसी अमिट छाप छोड़ जाता है। फिल्मों का बहुत ज्यादा शौक कभी रहा नहीं, लेकिन जितनी भी देखीं, उनमें सिर्फ एक ही चेहरा दिल पर राज कर गया और वो था धर्मेंद्र।
ब्लैक एंड व्हाइट स्क्रीन से लेकर रंगीन दौर तक, धर्मेंद्र की हर फिल्म ने मुझे उसी मासूम उत्साह से भर दिया, जैसे पहली बार देख रहा हूं। उनकी रौबदार आवाज, ही-मैन वाली दबंग शख्सियत, माचो अंदाज और जिंदादिल मुस्कान। सब कुछ ऐसा कि वो सिर्फ स्टार नहीं, अपने जैसे इंसान लगते थे। कई बार उनकी मिमिक्री की, अंदाज अपनाने की कोशिश की पर वो बात कहां!
पत्रकारिता में आने के बाद बड़े सितारों से मिलना आसान था, पर मन में बस एक ही अरमान था सिर्फ धर्मेंद्र से मुलाकात।
...और वो दिन आखिरकार आया।
फिल्म ‘यमला पगला दीवाना’ के प्रमोशन पर जब धर्मेंद्र इंदौर पहुंचे, तो मेरे भीतर का बच्चा अचानक जाग उठा। मैं ऑफिस से मीटिंग खत्म कर हमेशा की तरह एमवाय अस्पताल की पोस्ट मार्टम रूम रिपोर्टिंग पर जाने वाला था, कि तभी खबर मिली और बिना एक पल गंवाए में सीधे विजय नगर थाना क्षेत्र के एबी रोड स्थित उस मॉल पहुंच गया, जहां धर्मेंद्र जिम्नेशियम के ओपनिंग पर आए थे।
भीड़ इतनी थी कि कदम रखना मुश्किल, पर दिल की धड़कनें रास्ता बनाती रहीं। प्रेस कार्ड दिखाकर अंदर पहुंचा तो सामने वो शख्स खड़े थे, जिनकी फिल्मों के साथ मेरी यादें बड़ी हुई हैं। धर्मेंद्र मेरे सामने थे, लाइव, मुस्कुराते, बिल्कुल वैसा ही कद-काठी और करिश्मा जैसा परदे पर दिखता है। भीड़ के बावजूद मुझे उनसे बात करने, हाथ मिलाने और एक पल को महसूस करने का मौका मिला।
उनकी हथेलियों की गर्माहट उतनी ही मजबूत और भारी थी, जैसी मेरे पिता की है। यही एहसास मेरे लिए सबसे बड़ी याद बन गया। जब मैंने तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई, धर्मेंद्र ने बिना झिझक हामी भर दी। सौभाग्य से कैमरा पकडऩे वाला व्यक्ति मेरा मित्र निकला और उसने मेरे जीवन का सबसे अनमोल क्षण फ्रेम में कैद कर लिया।
यह वही तस्वीर है, जिसे मैंने पहले भी धर्मेंद्र के जन्मदिन पर साझा की थी, लेकिन आज इसका पूरा किस्सा आपके साथ साझा कर रहा हूं, क्योंकि कुछ पल सिर्फ तस्वीर नहीं होते वे दिल की धड़कनों में दर्ज हो जाते हैं। कल मेरे ही-मेन धर्मेंद्र ने लंबी बीमारी के बाद हम सब को अलविदा कह दिया उनके जाने से बड़े पर्दे के एक युग का अंत हो गया, जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती। ईश्वर से उनकी लंबी उम्र और जल्द स्वस्थ्य होने की प्रार्थना की थी, खैर। मेरे दिल में मेरे हीरो की मॉचो मेन वाली तस्वीर हमेशा कैद रहेगी।
अब बस यही प्रार्थना कर सकता हूं कि ईश्वर धर्मेंद्र की आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें।
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