धर्मशाला निर्माण में घोटाला: बिना जमीन आवंटन के टेंडर कर दिए जारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

विधिवत आवंटन बिना ही 85-85 लाख की दो धर्मशालाओं को दी गई स्वीकृति
गैस लाइन के ऊपर धर्मशाला, शासकीय चरनोई जमीन पर कब्जा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शासकीय चरनोई जमीन पर खुलेआम अवैध निर्माण का खेल अब प्रशासनिक नोटिस तक पहुंच गया है। मल्हारगंज तहसील क्षेत्र में पार्षद पति विजय परमार सहित अन्य के खिलाफ नायब तहसीलदार द्वारा अगस्त 2025 में सिविल जज की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है।
आरोप है कि अवैध निर्माण के नीचे से गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की हाई-प्रेशर गैस पाइपलाइन गुजर रही है, इसके बावजूद नियमों को ताक में रख निर्माण कराया गया।
गैल की लाइन के ऊपर निर्माण, बड़े हादसे की आशंका: मौके पर मौजूद बोर्ड और निर्माण स्थल की स्थिति यह दर्शाती है कि धर्मशाला और अन्य निर्माण गैल की गैस पाइपलाइन के ठीक ऊपर किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का निर्माण न केवल नियमों का उल्लंघन, बल्कि किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इसके बावजूद न तो गैल से अनुमति ली गई और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
विधायक कोटे से अवैध बोरिंग का भी आरोप
सूत्रों के अनुसार निर्माण स्थल पर विधायक कोटे से अवैध बोरिंग कराया गया। बिना अनुमति हुए इस बोरिंग ने मामले को और गंभीर बना दिया है। प्रशासनिक रिकॉर्ड में इस बोरिंग की कोई वैधानिक स्वीकृति दर्ज नहीं है। यायालय नायब तहसीलदार मल्हारगंज के समक्ष दर्ज प्रकरण के अनुसार ग्राम भोंरासला सर्वे क्रमांक 104 (5.825 हेक्टेयर) शासकीय भूमि है।
ग्राम नरवल सर्वे क्रमांक 1/1/1 (1.623 हेक्टेयर) शासकीय चरनोई भूमि दर्ज है। इन दोनों ही जगह बिना सक्षम अनुमति के विभिन्न समाजों के नाम पर धर्मशाला, बाउंड्रीवॉल, मंदिर और अन्य निर्माण कर दिए गए।नायब तहसीलदार न्यायालय द्वारा 3 सितंबर 2024 और 17 दिसंबर 2024 को स्पष्ट रूप से निर्माण पर रोक (स्थगन आदेश) लगाई गई थी।
इसके बावजूद मौके पर लोहे के खंभे गाड़कर जाली लगाई गई, बाउंड्रीवॉल खड़ी की गई और बोर्ड लगाकर जमीन पर कब्जा दर्शाया गया, जो न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना मानी जा रही है।
जमीन आवंटन शून्य: मामले में निगम अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जमीन का विधिवत आवंटन हुए बिना ही निविदा जारी कर 85-85 लाख रुपए की लागत से धर्मशाला निर्माण की स्वीकृति दे दी गई। यह पूरा मामला निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
प्रशासन ने लगाई रोक, आगे कार्रवाई तय, जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि-
शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किया गया।
बिना अनुमति निर्माण कराया गया।
न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन हुआ।
इसके बाद ग्राम नरवल और ग्राम भोंरासला की संबंधित शासकीय भूमि पर तत्काल प्रभाव से निर्माण पर रोक लगा दी गई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
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