समय और मृत्यु के स्वामी की एक झलक पाने को बेताब रहते हैं भक्त: कालों के काल महाकाल के दर्शनों के लिए उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब; नव वर्ष पर 10 लाख भक्तों के उज्जैन पहुंचने का अनुमान
हेमंत उपाध्याय वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट…इंदौर/उज्जैन । महाकाल महाकाल को कालों का काल कहा जाता है। अर्थात् वे समय और मृत्यु के स्वामी हैं। इसलिये उन्हें मृत्युंजय भी कहा जाता है। मान्यता है कि भक्त...
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संवाददाता

हेमंत उपाध्याय
वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट…इंदौर/उज्जैन।
महाकाल महाकाल को कालों का काल कहा जाता है। अर्थात् वे समय और मृत्यु के स्वामी हैं। इसलिये उन्हें मृत्युंजय भी कहा जाता है। मान्यता है कि भक्तों के सभी कष्ट हरने वाले भगवान महाकाल के दर्शन मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और मोक्ष मिलता है। ऐसे एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के दर्शनों के लिए नववर्ष की पूर्व संध्या और पहले दिन भक्तों का सैलाब उमड़ता है।
इस बार भी नव वर्ष पर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के महाकाल की कृपा प्राप्त करने के लिए भस्मारती में शामिल होने और दर्शनों के लिए अवंतिका नगरी आने की उम्मीद है। महाकाल मंदिर समिति ने नव वर्ष में महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के विशेष योजना तैयार की है।
भक्तों को सुगम दर्शन का लक्ष्य
महाकाल मंदिर समिति और जिला प्रशासन के अधिकारियों का लक्ष्य है कि नव वर्ष पर उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के सुगम दर्शन हों। उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। वर्ष के अंतिम सप्ताह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। अभी ही आम भक्तों को महाकाल दर्शन में करीब दो घंटे का समय लग रहा है।
प्रवेश, निकासी और अन्य प्रबंध पुख्ता
मंदिर समिति और प्रशासन ने भक्तों के मंदिर प्रवेश, निर्गम व अन्य प्रबंधों को अंतिम रूप दे दिया है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में है। शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था को भी और पुख्ता किया जा रहा है। भीड़ प्रबंधन के लिए शीघ्र दर्शन टिकट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
28 दिसंबर से 4 जनवरी तक अतिरिक्त पुलिस बल
अधिकारियों के अनुसार महाकाल मंदिर परिसर में 28 दिसंबर से 4 जनवरी तक अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को मंदिर में तैनात किया जाएगा।
चार धाम मंदिर पार्किंग से सामान्य दर्शनार्थियों को प्रवेश
सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से प्रवेश दिया जाएगा। वे शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय, नंदीद्वार और श्री महाकाल महालोक होते हुए मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-1 और नवीन टनल-1 से गणेश मण्डपम पहुंचेंगे और वहां से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर तिराहा होते हुए वापस चारधाम मंदिर पहुंच सकेंगे।
महाकाल मंदिर में अत्यधिक भीड़ की स्थिति में श्रद्धालुओं को फेसेलिटी सेंटर-1 से सीधे कार्तिकेय मण्डपम् में प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें द्वार नंबर 10 या निर्माल्य द्वार के रास्ते बाहर निकाला जाएगा। दर्शन मार्ग और मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों से कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी।
भस्म आरती दर्शन के लिए यह प्रबंध
महाकाल भस्म आरती दर्शन के लिए 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक ऑनलाइन और 31 दिसंबर को ऑफलाइन पंजीकरण बंद रहेगा। श्रद्धालुओं के लिए भस्म आरती के दौरान कार्तिकेय मण्डपम से चलित भस्मआरती दर्शन की व्यवस्था सुबह 4:15 बजे से की जाएगी।
श्रद्धालु कर्कराज, भील समाज धर्मशाला, कलोता समाज धर्मशाला, कार्तिक मेला ग्राउंड, मेघदूत पार्किंग और हरिफाटक ब्रिज के नीचे वाहन पार्क कर सकेंगे। चारधाम पार्किंग और म्यूजियम के सामने बड़े स्तर पर जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। लड्डू प्रसाद काउण्टर, प्राथमिक उपचार सुविधाएं, पेयजल वितरण,पूछताछ एवं सहायता केंद्र के अस्थाई काउन्टर लगेंगे।
अब तक लगभग डेढ़ करोड़ श्रद्धालु पहुंचे: इस वर्ष महाकाल मंदिर में दर्शनों के लिए करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालु पहुंचे हैं। नव वर्ष के पहले दिन करीब दस लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे। महाकाल मंदिर प्रशासक के अनुसार नव वर्ष 2026 के मौके पर करीब दस लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
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