खबर
टॉप न्यूज

कानून को ठेंगा, पति की दरिंदगी, पत्नी अस्पताल में: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो; तमाशबीन समाज

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से जुड़े घरेलू हिंसा के मामले से हड़कंप है। दाल मिल व्यापारी नीतेश अग्रवाल पर आरोप है लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद के बीच पत्नी रुचि के स

Khulasa First

संवाददाता

15 दिसंबर 2025, 9:56 पूर्वाह्न
2 views
शेयर करें:
कानून को ठेंगा, पति की दरिंदगी, पत्नी अस्पताल में

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से जुड़े घरेलू हिंसा के मामले से हड़कंप है। दाल मिल व्यापारी नीतेश अग्रवाल पर आरोप है लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद के बीच पत्नी रुचि के साथ इस कदर मारपीट की कि उन्हें गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिजनों का कहना है रुचि की हालत नाजुक है।

जानकारी के मुताबिक विवाद अचानक नहीं भड़का, बल्कि महीनों से चल रही तनातनी का विस्फोट था। रुचि की गर्दन, हाथ और पैरों में चोट हैं। परिजन आरोप लगा रहे हैं घटना के वक्त नीतेश की मां और बाउंसर भी मौजूद थे। उन्होंने भी रुचि के साथ बेरहमी से मारपीट की। पुलिस को सूचना दी गई और रुचि को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

लंबे समय से चल रहा विवाद
परिजनों के अनुसार नीतेश और रुचि का विवाह कुछ समय पहले हुआ है। शुरुआती दिनों में हालात सामान्य रहे, लेकिन धीरे-धीरे विवाद बढ़ता गया। रुचि की बहन मियां शर्मा का कहना है नीतेश ने उन पर और बहन यानी पत्नी रुचि पर चोरी का झूठा आरोप लगाया।

इससे आहत होकर रुचि कुछ समय के लिए अपने मायके दिल्ली चली गई थीं। रुचि ढाई साल के बच्चे के साथ लौटीं। तभी से नीतेश और उनकी मां के साथ विवाद और बढ़ता चला गया। रुचि को बार-बार घर से निकालने की कोशिश की जाती रही। इसी बीच मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा।

हाई कोर्ट के आदेश से बढ़ा तनाव
परिजनों के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया है रुचि ससुराल में बच्चों के साथ रह सकती हैं। इस आदेश से नीतेश बौखला गया। गुस्से में रुचि के साथ मारपीट की और जबरन घर से बाहर निकालने की कोशिश की। रुचि के परिवार का कहना है कोर्ट के आदेश के बावजूद रुचि को सुरक्षा नहीं मिली। नीतेश ने दबाव बनाकर, डराकर और मारपीट कर आदेश को निष्प्रभावी करने की कोशिश की।

सोशल मीडिया पर मारपीट का वीडियो
घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें कथित तौर पर साफ दिख रहा है नीतेश रुचि को घर से बाहर धकेलते हुए मारपीट कर रहा है। रुचि बच्चे के साथ मदद की गुहार लगाती दिखाई देती हैं, लेकिन आसपास खड़े लोगों में से कोई भी आगे नहीं आता। वीडियो सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया।

बहन को हत्या की आशंका
रुचि की बहन मिया शर्मा ने बताया डर है जीजा बहन की हत्या न कर दे। वह उसे और बच्चे को अपनाना नहीं चाहता। बहन साथ रहना और बच्चे का हक चाहती है, लेकिन हर बार उसे अपमानित किया गया। नीतेश ने रुचि पर तलाक का दबाव बनाया और इसके बदले रुपए का लालच दिया। रुचि ने पैसे लेने से इनकार कर दिया तो नीतेश और ज्यादा आक्रामक हो गया। रुचि पर अत्याचार बढ़ाए और घर से निकालने की कोशिश की गई।

पुलिस-प्रशासन मेरी जेब में
मियां शर्मा का दावा है नीतेश का कहना है पुलिस और प्रशासन मेरी जेब में है। कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। रुचि को घर से निकलना ही होगा। परिजन इस कथित बयान को जांच का अहम बिंदु मानते हैं और मांग कर रहे हैं निष्पक्ष जांच हो।

अस्पताल में जिंदगी की जंग
एमवाय अस्पताल सूत्रों के अनुसार, रुचि को गंभीर हालत में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों की टीम नजर रखे हुए है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन परिजनों का कहना है कि चोट गंभीर हैं और मानसिक आघात भी गहरा है। रुचि के नजदीकी लोगों ने बताया वह न सिर्फ शारीरिक दर्द से गुजर रही हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता में हैं।

पुलिस की भूमिका पर सवाल
पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप है सूचना के बावजूद तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं हुई। वहीं पुलिस का कहना है शिकायत की जांच जारी है। दावा है वायरल वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट और कोर्ट के आदेश—तीनों को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहता है कानून
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक आरोप सही हैं तो मामला घरेलू हिंसा अधिनियम, आईपीसी की गंभीर धाराएं और बाल अधिकारों से जुड़ी धाराओं के तहत आ सकता है। वीडियो सबूत, मेडिकल रिपोर्ट और कोर्ट आदेश इस मामले को मजबूत बना सकते हैं। एक वरिष्ठ वकील का कहना है कोर्ट के आदेश की अवहेलना और महिला के साथ हिंसा हुई है, तो यह दोहरा अपराध है। ऐसे मामलों में आरोपी को राहत मिलना मुश्किल होता है। इनको ध्यान में रखते हुए पुलिस को कदम उठाने चाहिए।

समाज की चुप्पी पर सवाल
वीडियो में चुभने वाला पहलू यह है घटना के दौरान लोगों ने मदद नहीं की। क्या हम समाज के तौर पर इतने असंवेदनशील हो गए हैं कि सामने हो रही हिंसा पर भी चुप रहते हैं। समाजशास्त्रियों का कहना है यह डर, उदासीनता और रसूख का मिश्रण हो सकता है। लोग सोचते हैं यह घरेलू मामला है, या फिर डरते हैं कि कहीं फंस न जाएं।

लेकिन चुप्पी भी अपराध को बढ़ावा देती है। इनको भी सामाजिक बहस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। परिजन मांग कर रहे हैं रुचि और बच्चे को पुलिस सुरक्षा दी जाए। आरोपी पर तत्काल और सख्त कार्रवाई हो। वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच हो, कोर्ट के आदेश के उल्लंघन पर अलग कार्रवाई की जाए।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!