जहरीले पानी से नहीं थम रही मौतें, 23वीं जान गई: भागीरथपुरा में गहराता मौत का साया; हालात अब भी बेकाबू
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा क्षेत्र इन दिनों एक भीषण स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा है। दूषित पानी से उपजे मौत के तांडव ने एक और को लील लिया। नयापुरा, जीवन की फैल में रहने वाली 59 वर्षीय कमलाबाई ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
इसके साथ ही क्षेत्र में जलजनित बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। मृतका कमलाबाई करीब एक माह पूर्व ही पति तुलसीराम के साथ इस क्षेत्र में किराए से रहने आई थीं। इस दंपति के लिए 6 जनवरी की शाम काल बनकर आई, जब कमलाबाई की तबीयत अचानक बिगड़ी।
परिजन के अनुसार उन्हें लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत थी, जिसके बाद प्राथमिक उपचार दिलाकर 7 जनवरी को एमवाय के आईसीयू में भर्ती कराया था। वहीं आज सुबह भगवानदास (64) की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
अस्पताल प्रबंधन और दावों के बीच उलझी मौत की गुत्थी
एक ओर जहां क्षेत्र में दूषित पानी के आउटब्रेक को इस मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है, वहीं एमवाय अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में अलग तर्क प्रस्तुत किया है। अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष है कि कमलाबाई पूर्व से ही ‘क्रोनिक किडनी डिजीज’ से ग्रसित थीं।
प्रबंधन के अनुसार महिला को डायलिसिस की सख्त जरूरत थी, लेकिन वह नियमित रूप से उपचार नहीं ले रही थी। अस्पताल का दावा है कि उन्हें उल्टी-दस्त के कारण नहीं, बल्कि शरीर में बढ़ते यूरिया के स्तर और उसके कारण आए ‘यूरेमिक सीजर’ की वजह से भर्ती किया गया था। प्रबंधन ने स्पष्ट तौर पर इस मामले को दूषित जलजनित आउटब्रेक से जोड़ने से इनकार किया है।
दहशत में भागीरथपुरा के रहवासी: अस्पताल के दावों के उलट भागीरथपुरा के रहवासियों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। क्षेत्र में एक के बाद एक हो रही मौतों ने नगर निगम और जल प्रदाय विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों से आने वाला गंदा पानी उनकी जान का दुश्मन बना हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन मौतों को केवल पुरानी बीमारियों का हवाला देकर टालता रहेगा या फिर क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा? फिलहाल कमलाबाई की मौत ने भागीरथपुरा के जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया है।
कांग्रेस की न्याय यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के विरोध में रविवार को कांग्रेस के आह्वान पर बड़ा गणपति चौराहे से राजवाड़ा अहिल्या माता प्रतिमा तक निकली ‘न्याय यात्रा’ में जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे व महापौर पर एफआईआर की मांग उठाई।
हजारों लोग तख्तियां लिए शामिल हुए। आम नागरिक ज़िम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने को लेकर नाराज नजर आए। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफ़े की मांग के साथ ही महापौर पर एफआईआर दर्ज करने संबंधी नारे भी लगाए। महिलाएं सबसे आगे, उनके पीछे सेवादल, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, वरिष्ठ नेता और नागरिकों का विशाल हुजूम था।
यात्रा की प्रमुख मांगें रही भागीरथपुरा कांड की जिम्मेदारी तय की जाए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। पुनरावृत्ति न हो, इसलिए ठोस उपाय किए जाएं, पीड़ित परिवारों के मुआवजे की रकम बढ़ाई जाए, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफ़े के साथ महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर एफआईआर हो।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा प्रदेश में 22 वर्ष से भाजपा सरकार है, 25 वर्ष से निगम परिषद है, 35 वर्ष से भाजपा के सांसद हैं। पूरे देश में स्वच्छता के मामले में इंदौर को जाना जाता है लेकिन उसे सरकार स्वच्छ जल नहीं दे सकी। यहां अव्यवस्थित यातायात से लोग मर रहे हैं और इंदौर के मंत्री व मुख्यमंत्री भाजपा के आयोजनों व भोजन भंडारों में व्यस्त हैं।
भागीरथपुरा में जहरीले पानी से लोगों की मृत्यु के बाद से मुख्यमंत्री इंदौर में दिखाई क्यों नहीं दे रहे? हम जिम्मेदार अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग करते हैं। मंत्री, महापौर से इस्तीफ़े की मांग के साथ ही महापौर पर तुरंत एफआईआर की मांग करते हैं, लेकिन जानते हैं भाजपा यह होने नहीं देगी पर घोषणा करते हैं इंदौर की जनता व प्रदेश को पानी का अधिकार यानी शुद्ध पेयजल का अधिकार दिलाकर रहेंगे।
तय करेंगे भविष्य का मप्र व इंदौर कैसा हो? उन्होंने जनसमुदाय से कहा आप भी संकल्प लीजिए वाटर ऑडिट में सहभागी बनेंगे। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा भागीरथपुरा के बेगुनाह लोगों की मृत्यु का हिसाब लिया जाएगा। ये लोग शुद्ध हवा और पानी भी नहीं दिला सके।
दूषित हवा के मामले में मप्र देश में दूसरे क्रम पर है। ये लड़ाई प्रदेश की जनता को न्याय दिलाने के लिए है, जिसका शंखनाद हो चुका है। जब तक इंदौर और प्रदेश की जनता को उनके हक और अधिकार नहीं मिल जाते हम कांग्रेसजन चैन से नहीं बैठेंगे।
भागीरथपुरा के हिंदुओं की मौत पर चुप्पी क्यों: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कहा भाजपा से पूछना चाहता हूं भागीरथपुरा के बेगुनाह हिंदुओं की मौत पर चुप क्यों है? भाजपा, मुख्यमंत्री, महापौर द्वारा इंदौर के साथ भेदभाव किया जा रहा है। मैंने शहर के कई क्षेत्रों का दौरा किया, वाटर चेकिंग की। इंदौर की जनता नर्क भोग रही है। पूरे शहर के लोग किडनी की खराबी और कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। इंदौर की जनता न्याय मांगती है। प्रदेश के 95 प्रतिशत किसान हिंदू हैं, उन्हें खाद नहीं मिल रही है। युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और भाजपा हिंदुओं की भलाई की बात कर रही है।
भाजपा भंडारों में व्यस्त: दिग्विजय सिंह: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा दुर्भाग्य है एक तरफ प्रदेश के कद्दावर मंत्री के क्षेत्र की जनता जहरीले पानी से मर रही है, दूसरी तरफ भाजपा भंडारों में व्यस्त है। ये लड़ाई इंदौर ही नहीं, पूरे प्रदेश की है।
भागीरथपुरा में पानी बांटने पहुंचा टैंकर सड़क में धंसा
नगर निगम अफसरों की लापरवाही से भागीरथपुरा में ड्रेनेजयुक्त दूषित पानी पीने से अब तक 23 लोगों की मौत हो गई है। जबकि सैकड़ों मरीजों का अस्पतालों में इलाज हो रहा है। ऐसे में निगम द्वारा टैंकरों से पानी सप्लाय किया जा रहा है, लेकिन निगम अफसरों की लापरवाही से भागीरथपुरा की सड़कों पर टैंकर फंस रहे हैं। इससे टैंकर चालक व रहवासी परेशान होने लगे हैं।
नगर निगम में अफसरों की अफसरशाही हावी है। इसके चलते निगम अफसर, नेता और ठेकेदार मिलीभगत कर विकास कार्य के नाम पर लीपापोती कर देते हैं। इसका खुलासा भी भागीरथपुरा में होने लगा है। पानी का टैंकर जब घर-घर पानी बांटने के लिए भागीरथपुरा की एक सड़क से निकल रहा था तभी सड़क धंस गई और टैंकर का पहिया उसमें फंस गया। देर तक टैंकर चालक मशक्कत करता रहा, लेकिन टैंकर नहीं निकल सका।
रहवासियों ने भी धक्का लगाकर टैंकर को निकालने का प्रयास किया, लेकिन टैंकर गड्ढे से नहीं निकला तो टैंकर चालक को मजबूरन पानी वहीं बहाना पड़ा। इसके बाद टैंकर निकल सका। इस घटना के बाद लोग कहने लगे कि निगम अफसरो ने दिखावे की सड़कें बनाई हैं, जो टैंकर के वजन से ही धंसने लगी है। इस तरह भागीरथपुरा में विकास कार्य के नाम पर निगम अफसर, नेता और ठेकेदारों ने कमाई के कार्य किए हैं।
ड्रेनेज लाइन डालने का कार्य जारी: भागीरथपुरा में जानलेवा हैजा फैलने के बाद निगम ने नई ड्रेनेज लाइन का काम शुरू कर दिया है। सीमेंट कांक्रीट की सड़कें खोदकर उनमें पाइप लाइन डाली जा रही है।
निगम अफसरों का कहना है कि भागीरथपुरा की ड्रेनेज पाइप लाइन पुरानी होने से वह कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, इसके चलते नई पाइप लाइन डाली जा रही है।
अभी भी मरीज मिल रहे: भागीरथपुरा में दूषित पानी का संक्रमण बहुत फैल गया है। नए मरीज भी सामने आ रहे हैं। मरीजों की संख्या भी बढ़ने से प्रशासन, निगम व स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फूलने लगे हैं।
क्लोरीनेशन और सफाई के बाद हालात सुधरे, लेकिन किसी तरह का बदलाव नहीं दिख रहा है।
अधिकतर इन्फेक्शन के मरीज: भागीरथपुरा में दूषित पानी से अधिकतर लोगों में इन्फेक्शन है। इससे उल्टी, दस्त के साथ हैजा, डायरिया जैसी संक्रामक बीमारी का खतरा बढ़ गया है। यही नहीं, लोगों की किडनी व लीवर पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
हालांकि सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी का कहना है कि पानी का असर होने से लोग बीमार हो रहे हैं, लेकिन जल्द ही इनके स्वास्थ्य में सुधार होने की संभावना है।
अफसर-नेता सक्रिय: बीमारी को पहले मामूली बताने वाले नेता और अफसर सक्रिय हो गए हैं। शासन-प्रशासन का प्रयास है कि सामान्य स्थिति बहाल की जाए, लेकिन हर दिन होती मौत और नए मरीजों के सामने आने से प्रशासन व शासन के दावे खोखले साबित होने लगे हैं।
भाजपा के दलित विरोधी चेहरे का फिर हुआ खुलासा
भागीरथपुरा कांड ने भाजपा के दलित विरोधी चेहरे का एक बार फिर खुलासा कर दिया है। एक वर्ष पूर्व भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर तोडफ़ोड़ के मामले में भाजपा पार्षद और एमआईसी सदस्य जीतू यादव को तुरंत पार्टी और एमआईसी से निकाल दिया गया था लेकिन भागीरथपुरा कांड के जिम्मेदार निगम के जल समिति प्रभारी बबलू शर्मा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दूसरी ओर, वार्ड 82 के पार्षद शानू शर्मा पर भी दुष्कर्म का आरोप लगा लेकिन उन पर भी कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि ब्राह्मण समाज से हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है भाजपा पर दलित विरोधी होने के आरोप समय-समय पर साबित होते रहे हैं।
गत जनवरी में भाजपा पार्षद जीतू यादव को पार्टी ने सिर्फ इसलिए निकाल दिया था क्योंकि उनका नाम भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर तोडफ़ोड़ व उनके बेटे के साथ अनुचित हरकत में सामने आया था जबकि न तो वे वहां मौजूद थे और न ही उनका कोई हाथ था।
फिर भी पार्टी ने अपनी दलित विरोधी मानसिकता के चलते यादव को न केवल पार्टी से निष्कासित कर दिया बल्कि एमआईसी से भी बाहर कर दिया। सालभर बाद भी यादव को पार्टी ने वापस नहीं लिया है जबकि भागीरथपुरा के दूषित जल वितरण कांड में सीधे तौर पर दोषी नगर निगम की जल समिति के प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू पर पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
खास बात ये है बबलू शर्मा को भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों की जानकारी मिल गई थी लेकिन वे दोस्तों को साथ दाल-बाफले की पार्टी में व्यस्त रहे। न मामले की तवज्जो दी न अब तक भागीरथपुरा पहुंचे हैं।
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