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दूषित पानी से मौत का मामला: मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बदलाव; पीड़ित परिवार और मरीजों से करेंगे मुलाकात

खुलासा फर्स्ट, इंदौर। दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपना पूर्व निर्धारित कार्यक्र

Khulasa First

संवाददाता

31 दिसंबर 2025, 9:02 पूर्वाह्न
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दूषित पानी से मौत का मामला

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम बदलते हुए अब सीधे इंदौर पहुंचने का फैसला लिया है।

उमरिया से इंदौर तक का बदला शेड्यूल
मुख्यमंत्री यहां पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे और अस्पतालों में भर्ती मरीजों का हाल जानेंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार से उमरिया जिले के दौरे पर हैं।

बुधवार सुबह उन्होंने एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर का भ्रमण किया और इसके बाद पाली में मां बिरासनी देवी के दर्शन किए। धार्मिक और स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद वे भोपाल लौटने के बजाय अब सीधे इंदौर रवाना होंगे, जहां जल संकट को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा करेंगे।

मौतों के आंकडे
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं।सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 3 मौतें दर्ज की गई हैं। जिला कलेक्टर के मुताबिक यह संख्या 4 है।

वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव का दावा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में 7 लोगों की जान जा चुकी है। महापौर ने स्पष्ट कहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

27 अस्पतालों में 147 मरीज भर्ती
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने जानकारी दी कि वर्तमान में 27 अस्पतालों में 147 मरीज भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह निःशुल्क होगा। किसी भी अस्पताल द्वारा एक रुपया भी वसूल नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा मामले की जांच के लिए विशेष समिति का गठन किया गया है। अब तक तीन अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। बीते 7 दिनों में 1100 से अधिक लोगों का इलाज किया जा चुका है।

इंदौर जल संकट पर सरकार की सख्ती
इंदौर में गंदे पानी से फैली बीमारी ने प्रशासन को अलर्ट मोड में ला दिया है। मुख्यमंत्री का दौरा इस बात का संकेत है कि सरकार इस मामले को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरतेगी।

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